Asaduddin Owaisi: संभल जामा मस्जिद के सामने पुलिस चौकी बनाने पर भड़के ओवैसी, कहा- स्कूल-कॉलेज क्यों नहीं बनवा सकते

Published by : Pritish Sahay Updated At : 30 Dec 2024 10:26 PM

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AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी

Asaduddin Owaisi: संभल में जामा मस्जिद के सामने पुलिस चौकी बनाने को लेकर AIMIM सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी सरकार पर जमकर हमला किया है. ओवैसी ने कहा कि बीजेपी सरकार सांप्रदायिक है. वो राज्य में भेदभाव पूर्ण नीति अपना रही है. उन्होंने कहा कि सरकार संभव में पुलिस चौकी बनवा सकती है, लेकिन स्कूल-कॉलेज या अस्पताल नहीं बनवा सकती.

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Asaduddin Owaisi: एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी पर एक बार फिर हमला बोला है. संभल में जामा मस्जिद के सामने पुलिस चौकी बनाने को लेकर ओवैसी यूपी सरकार पर हमलावर हैं. ओवैसी ने कहा है कि बीजेपी सरकार मुस्लिमों के साथ भेदभाव पूर्ण बर्ताव कर रही है. ओवैसी ने एक स्टडी रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि जिन इलाकों पर मुसलमानों की संख्या अधिक है वहां सरकार सार्वजनिक सेवाएं देने में विफल रही है. ओवैसी ने यह भी कहा कि जब बीजेपी सरकार मस्जिद के सामने पुलिस चौकी बनवा सकती है तो स्कूल-कॉलेज या अस्पताल क्यों नहीं खोल सकती.

ओवैसी ने क्या कहा

एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि अध्ययन में जो कहा गया है उसके मुताबिक जिन इलाकों में मुस्लिमों की संख्या अधिक है वहां सरकार सार्वजनिक सेवाएं प्रदान करने में विफल रही है. वहीं स्कूल, कॉलेज या अस्पतालों की संख्या काफी कम है. ओवैसी ने कहा कि डार्टमाउथ कॉलेज, एमआईटी के पॉल लोवोसाड की ओर से किये गए अध्ययन में बताया गया है कि सरकार ने सार्वजनिक सेवाएं प्रदान करने में कितना भेदभाव दिखाया है. उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि संबल के ऐतिहासिक मस्जिद के ठीक सामने एक पुलिस चौकी का निर्माण कर सकते हैं. आप संभल में स्कूल, कॉलेज और अस्पताल क्यों नहीं बना सकते?

स्कूल छोड़ने में मुस्लिम बच्चियों की दर सबसे ज्यादा- ओवैसी

ओवैसी ने कहा कि यह एक सर्वविदित तथ्य है कि मुस्लिम महिलाओं में स्कूल छोड़ने की दर सबसे अधिक है. मुसलमानों में साक्षरता दर कम है. यह सर्वविदित तथ्य है कि मुस्लिम समुदाय में स्नातकों की संख्या सबसे कम है. विभिन्न चिकित्सा मुद्दे हैं तो उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार इन समस्याओं को हल करने में रुचि क्यों नहीं रखती है, जैसा कि वे दावा करते हैं कि वे एक विकसित भारत चाहते हैं, तो फिर आप ये सभी सेवाएं क्यों नहीं देते, लेकिन आपकी सांप्रदायिक मानसिकता है और आप यह संदेह पैदा करके उस सांप्रदायिक मानसिकता को मजबूत कर रहे हैं कि इन मुस्लिम इलाकों की पुलिस चौकियों की ओर से सीसीटीवी से निगरानी की जानी चाहिए.

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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