सुप्रीम कोर्ट ने गौतम अदाणी के खिलाफ जांच के लिए सेबी को दिया 3 महीने का समय, कहा-अपडेट रिपोर्ट दाखिल करें

Adani-Hindenburg row : ���ुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सेबी को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 14 अगस्त तक का समय दिया है. कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 11 जुलाई को निर्धारित की है.
अरबपति उद्योगपति गौतम अदाणी के खिलाफ जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने आज सेबी को तीन महीने का समय दिया है. गौरतलब है कि अमेरिका की शॉर्टसेलर फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च कंपनी ने गौतम अदाणी के समूह पर शेयर के मूल्यों में हेराफेरी का आरोप लगाया था, जिसके बाद अदाणी ग्रुप को बड़ा झटका लगा और उनके शेयर गिरने लगे.
सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सेबी को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 14 अगस्त तक का समय दिया है. कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 11 जुलाई को निर्धारित की है. सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश भी दिया कि जस्टिस एएम सप्रे समिति द्वारा पेश की गयी रिपोर्ट की काॅपी पक्षकारों को उपलब्ध करायी जाये, ताकि वे इस मामले में अदालत की मदद कर सकें.
गौरतलब है कि चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सेबी को गौतम अदाणी पर लगे शेयर मूल्यों में हेराफेरी के आरोपों की जांच पर नयी और अपडेट रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है. चीफ जस्टिस के अलावा सुप्रीम कोर्ट की इस पीठ में जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस पारदीवाला भी शामिल हैं.
ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट ने गौतम अदाणी के समूह पर लगे शेयर मूल्यों में हेराफेरी करने के आरोपों की जांच करने के लिए दो मार्च को छह सदस्यीय समिति बनाने का आदेश दिया था. हिंडनबर्ग रिसर्च कंपनी के आरोपों के बाद देश में खूब राजनीति हुई. विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार को संसद में घेरा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मसले पर जवाब मांगा था.
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By रजनीश आनंद
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रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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