26/11 Mumbai Attack : कसाब को पहचानने वाली बच्ची देविका एन रोटावण अब बड़ी हो गई, करना चाहती है आतंकियों का खात्मा

Updated at : 25 Nov 2020 11:11 PM (IST)
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26/11 Mumbai Attack : कसाब को पहचानने वाली बच्ची देविका एन रोटावण अब बड़ी हो गई, करना चाहती है आतंकियों का खात्मा

12th year of 26/11 Mumbai Attack : आज से ठीक 12 साल पहले देश की औद्योगिक राजधानी मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस यानी सीएसटी समेत कई स्थानों पर पाकिस्तानी आतंकियों ने खुंखार तरीके से हमला करके पूरी दुनिया को दहला दिया था. उसमें से एक आतंकी मोहम्मद अजमल आमिर कसाब को पहचान कर उसके ताबूत की आखिरी कील बनने वाले सबसे छोटी उम्र की गवाह 9 साल की बच्ची की यह ख्वाहिश है कि आईपीएस ऑफिसर बने. इस बच्ची का नाम देविका एन रोटावण है.

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12th year of 26/11 Mumbai Attack : आज से ठीक 12 साल पहले देश की औद्योगिक राजधानी मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस यानी सीएसटी समेत कई स्थानों पर पाकिस्तानी आतंकियों ने खुंखार तरीके से हमला करके पूरी दुनिया को दहला दिया था. उसमें से एक आतंकी मोहम्मद अजमल आमिर कसाब को पहचान कर उसके ताबूत की आखिरी कील बनने वाले सबसे छोटी उम्र की गवाह 9 साल की बच्ची की यह ख्वाहिश है कि आईपीएस ऑफिसर बने. इस बच्ची का नाम देविका एन रोटावण है.

मुंबई की रहने वाली इस नौ साल की बच्ची के पैर में आज के 12 साल पहले आतंकियों के हमले में गोली लगी थी. इस नन्हीं सी बच्ची ने अपनी आंखों के सामने आतंकी कसाब को गोलियां चलाते हुए देखा था. वह नौ साल की बच्ची अब बालिग होकर 21 साल की हो गई है. उसकी भी तमन्ना है और वह चाहती है कि आईपीएस बनकर खुद अपने हाथों से आतंकियों का खात्मा करे.

पिता के साथ कर रही थी ट्रेन का इंतजार

12 साल पहले की घटना को याद करते हुए देविका बताती है कि वह अपने पिता नटवरलाल के साथ पुणे जाने के लिए ट्रेन का इंतजार कर रही थी. इसी दौरान सीमा पार से आए लश्कर के आतंकियों ने सीएसटी रेलवे स्टेशन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दी. वह जान बचाने के लिए पिता के साथ भागने लगी. इसी दौरान उसके पैर में आ घुसी और वह वहीं पर गिर गई. उसने देखा कि सामने एक आतंकी बंदूक ताने खड़ा है और वह हंस रहा है, जिसकी पहचान बाद में मोहम्मद अजमल आमिर कसाब के रूप में हुई.

आतंकियों से नजर बचाकर जेजे अस्पताल में दाखिल हुई थी देविका

देविका उस भयवाह दृश्य को बताते हुए सहम जाती है. वह कहती है कि आतंकियों के हमले से लोग चीख-पुकार करते हुए इधर-उधर भाग रहे थे. आतंकियों से खुद को बचते-बचाते हुए वह पास ही के जेजे अस्पताल पहुंची, जहां के डॉक्टरों ने अगले दिन उसके दाएं पैर से एके-47 की गोली निकालने के लिए ऑपरेशन किया. इसके बाद अगले छह महीने के दौरान उसके पैर का दोबारा ऑपरेशन किया गया और फिर तीन साल के अंदर छह ऑपरेशन किए गए. फिलहाल, वह बालिका पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित है.

जब रिश्तेदारों और परिवार के लोगों ने बनाई दूरी

उसकी आगे की कहानी यह है कि उस आतंकी हमले के दौरान इलाज के बाद देविका का परिवार राजस्थान चला गया था, लेकिन मुंबई पुलिस के अनुरोध पर देविका मुंबई आई और अदालत में गवाही दी. देविका का कहना है कि कसाब अदालत में जज के सामने बैठा था. उसने उसको देखते ही पहचान लिया. उसे इस बात का दुख है कि उसके रिश्तेदार और अन्य लोग उससे दूरी बना लिए. उन्हें इस बात का भय है कि देविका ने आतंकी के खिलाफ गवाही दी है, तो आतंकी उन सबको मार देंगे. लेकिन, आज वही देविका 21 साल की हो गई है और पूरे जोशो-खरोश के साथ आतंकियों से लोहा लेने को तैयार है.

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Posted By : Vishwat Sen

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