राष्ट्रपति चुनाव 2017 : मोदी-शाह के धोबियापछाड़ से विपक्ष चित्त, एकजुट होने से पहले ही हारा

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 12 May 2017 9:00 AM

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नयी दिल्लीः राष्ट्रपति चुनाव में सरकर को पटखनी देने की कोशिशों में जुटे विपक्ष को नरेंद्र मोदी एंड टीम ने धोबियापछाड़ देकर चित्त कर दिया है. इसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी के किसी नेता का राष्ट्रपति बनना तय हो गया. दरअसल, राष्ट्रपति चुनाव में कांटे के मुकाबले की उम्मीद की जा रही थी, क्योंकि […]

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नयी दिल्लीः राष्ट्रपति चुनाव में सरकर को पटखनी देने की कोशिशों में जुटे विपक्ष को नरेंद्र मोदी एंड टीम ने धोबियापछाड़ देकर चित्त कर दिया है. इसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी के किसी नेता का राष्ट्रपति बनना तय हो गया.

दरअसल, राष्ट्रपति चुनाव में कांटे के मुकाबले की उम्मीद की जा रही थी, क्योंकि सरकार और विपक्ष के पास उपलब्ध वोटों में बहुत महीन सा अंतर था. ऐसे में सोनिया गांधी के नेतृत्व में विपक्ष एकजुट होने की कोशिशें कर रहा था.

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विपक्ष अपना सर्वसम्मत उम्मीदवार उतार कर सरकार पर दबाव बढ़ाना चाहता था. इन कयासों को तब बल मिला, जब शरद पवार ने सोनिया गांधी से भेंट की. कहा गया कि शरद पवार ने सोनिया गांधी से खुद को राष्ट्रपति बनाने में मदद करने की अपील की.

हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान आज तक नहीं आया. लेकिन, सोनिया गांधी विपक्षी दलों को एकजुट कर पातीं, उससे पहले ही नरेंद्र मोदी की सरकार ने वाइएसआर कांग्रेस और टीआरएस का समर्थन हासिल कर लिया.

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वाइएसआर कांग्रेस के नेता जगन मोहन रेड्डी ने पिछले दिनों प्रधानमंत्री से मुलाकात कर भाजपा उम्मीदवार को अपना समर्थन देने का एलान कर दिया.
इससे पहले, टीआरएस (तेलंगाना राष्ट्रीय समिति) मजबूत संकेत दे चुकी है कि राष्ट्रपति चुनाव में वह भाजपा प्रत्याशी को समर्थन देगी.

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भाजपा सूत्रों ने कहा है कि राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार पार्टी के अंदर से ही होगा. पार्टी से इतर किसी गैर-राजनीतिक-सामाजिक क्षेत्र से और स्वतंत्र सोचवाले किसी शख्स को अपना उम्मीदवार नहीं बनायेगी.

राष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा-राज्यसभा के साथ-साथ विधानसभाओं के सदस्य भी मतदान करते हैं. उत्तर-प्रदेश को मिला कर फिलहाल देश के 12 बड़े राज्यों में भाजपा के पास पूर्ण बहुमत की सरकार है.

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में धमाकेदार जीत से राष्ट्रपति चुनाव के निर्वाचक मंडल में भाजपा की स्थिति काफी मजबूत हो चुकी है. राष्ट्रपति चुनाव के निर्वाचक मंडल में स्पष्ट बहुमत से भाजपा कुछ ही दूर थी, लेकिन रेड्डी और राव के समर्थन ने उसकी उस मुश्किल को भी आसान कर दिया है.

अब चूंकि भाजपा बहुमत के करीब पहुंच चुकी है, कई और क्षेत्रीय दल राष्ट्रपति चुनाव में उसके प्रत्याशी के पक्ष में मतदान कर सकते हैं. हालांकि, कई दलों ने अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं. इसमें एआइएडीएमके और बीजेडी शामिल हैं.

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हालांकि, जनता दल यूनाइटेड, वामदल और तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी एकजुटता दिखाने की कोशिश की, लेकिन भाजपा ने उनकी चाल को लड़ाई शुरू होने से पहले ही नाकाम कर दिया.

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