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सांबा हमला : 80 मीटर लंबी सुरंग के जरिए अंतरराष्ट्रीय सीमा में घुसे आतंकी !

Updated at : 30 Nov 2016 6:36 PM (IST)
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सांबा हमला : 80 मीटर लंबी सुरंग के जरिए अंतरराष्ट्रीय सीमा में घुसे आतंकी !

नयी दिल्ली : बीएसएफ प्रमुख ने आज कहा कि जम्मू के सांबा में मारे गए तीन आतंकवादी खेतों में बनी 80 मीटर लंबी सुरंग से होकर अंतरराष्ट्रीय सीमा पार की होगी. सीमा सुरक्षा बल के 51 वें स्थापना दिवस पर यहां पत्रकारों को संबोधित करते हुए बल के प्रमुख केके शर्मा ने कहा कि आतंकी […]

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नयी दिल्ली : बीएसएफ प्रमुख ने आज कहा कि जम्मू के सांबा में मारे गए तीन आतंकवादी खेतों में बनी 80 मीटर लंबी सुरंग से होकर अंतरराष्ट्रीय सीमा पार की होगी. सीमा सुरक्षा बल के 51 वें स्थापना दिवस पर यहां पत्रकारों को संबोधित करते हुए बल के प्रमुख केके शर्मा ने कहा कि आतंकी ठिकानों पर सेना के ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ के बाद अर्द्धसैनिक बल के पास अंतरराष्ट्रीय सीमा पार से आतंकवादियों के घुसपैठ की कोशिश की संभावना के बारे में पुख्ता सूचना थी.

इसलिए यह भारी मात्रा में हथियारों से लैस आतंकवादियों का पता लगाने और उन्हें काबू करने में सक्षम रहा. उन्होंने बताया कि चमलीयाल सीमा चौकी पर ऑपरेशन के पूरा होने के बाद हमने बाड की जांच की और कोई उल्लंघन नहीं हुआ. फिर आज सुबह, हमने 2 गुना 2 मीटर आकार की एक छोटी सुरंग का पता लगाया…हमने बाड पर गहराई में नाका रखा है और इसलिए हम तीन आतंकवादियों का पता लगा सकें और काबू कर सकें. सुरंग एक खेत में पाई गई जहां खेती की जाती है और मिट्टी मुलायम है.

उन्होंने कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय सीमा से करीब 75 से 80 मीटर दूर है और बाड से करीब 35 से 40 मीटर की दूरी पर है.’ डीजी ने कहा कि सीमा की प्रहरी करने वाला बल अपने समकक्ष…पाकिस्तान रेंजर्स के समक्ष यह विषय उठाएगा लेकिन उन्होंने कहा कि शत्रुता बढ़ने के चलते कुछ समय से दूसरे पक्ष से संपर्क नहीं हो पा रहा है.

बीएसएफ अधिकारियों ने कहा कि यह कहने के लिए प्रचुर साक्ष्य और संकेत है कि आतंकवादी सीमा के इस ओर पहुंचने के लिए सुरंग से होकर गुजरे. शर्मा ने कहा कि सेना के एक शिविर पर कल हुआ नगरोटा हमला अलग है और यह जांच का विषय है कि इसका सांबा आतंकी घटना से कोई संबंध है या नहीं. उन्होंने कहा कि विशेष रुप से नियंत्रण रेखा पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ के बाद दोनों देशों के बीच शत्रुता बढ़ने के चलते बीएसएफ ने 15 पाकिस्तानी रेंजरों और 10 आतंकवादियों को मार गिराया जबकि उसे अपने पांच जवानों की जान गंवानी पड़ी.

बीएसएफ प्रमुख ने बताया कि पिछले 15 दिनों से अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कोई गोलाबारी नहीं हुई है. ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ के बाद हमें पता चला कि घुसपैठ की कोशिशें और हमले अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बढ़ेंगे और इसलिए संकट को लेकर हमने ऐसी कोशिशों के खिलाफ तैयारी की. शर्मा ने बताया कि बीएसएफ के पास इस बारे में पुख्ता सूचना थी कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के इलाके के आसपास से घुसपैठ की कोशिश हो सकती है और इसलिए हम तीन आतंकियों को प्रभावी रुप से काबू करने की स्थिति में थे.

डीजी ने बताया कि तीनों आतंकियों के पास भारी मात्रा में हथियार, जैसे कि एके 47, 20 मैगजीन, 517 गोलियां, आठ एमएम का एक पिस्तौल, 20 ग्रनेड ओर एक जीपीएस सेट के अलावा अन्य चीजें थी. बीएसएफ प्रमुख ने बताया कि सुरक्षा प्रतिष्ठानों को गंभीर खतरा होने की सूचनाएं हैं और इसलिए बलों को सतर्क कर दिया गया है तथा शिविरों की सुरक्षा की समीक्षा की गई है.

*जम्मू-कश्मीर में ट्रेनों को उड़ाना चाहते थे आतंकवादी : बीएसएफ

एक शीर्ष अधिकारी ने आज कहा कि सांबा जिले में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की ओर से मार गिराए गए तीन हथियारबंद आतंकवादी चलती ट्रेनों और पटरियों को आईईडी और पता लगाने में मुश्किल तरल विस्फोटकों से उड़ाकर सिलसिलेवार बम धमाकों को अंजाम देने की खातिर जम्मू-कश्मीर में घुसे थे. बीएसएफ की ओर से तीनों घुसपैठियों को मार गिराने के एक दिन बाद शीर्ष अधिकारी ने कहा कि तीनों आतंकवादी तरल विस्फोटक ‘ट्राईनाइट्रोग्लिसरीन’ की पांच बोतलें लेकर आए थे.

बीएसएफ के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) और विशेष महानिदेशक (पश्चिमी कमान) अरुण कुमार ने बताया, ‘‘बड़ी वारदातों को अंजाम देने के लिए आतंकवादियों ने घुसपैठ की थी. उनका मकसद था रेल की पटरियों और ट्रेनों को धमाके से उड़ाना. हमने आईईडी और तरल विस्फोटक बरामद किए हैं.’ कुमार ने बताया कि घुसपैठिए कई बड़ी आतंकवादी वारदातों को अंजाम देने के लिए आए थे, जिसमें ‘‘चलती ट्रेनों’ को धमाके में उड़ाना भी शामिल था जिससे ट्रेन में आग लग जाए.

आईईडी और तरल विस्फोटक लाने का मकसद पटरियों को उड़ाना और आग लगाना था. उन्होंने बताया, ‘‘यदि हमारे जवानों ने इन हथियारबंद आतंकवादियों को काबू नहीं किया होता और उन्हें नहीं मार गिराया होता तो इससे मुख्य इलाके में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ होता.’ कुमार ने कहा, ‘‘बीएसएफ के बहुस्तरीय सुरक्षा कवर के कारण ही यह आपदा टल सकी.’
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