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योगेन्द्र यादव, प्रशांत भूषण ने "स्वराज इंडिया" के नाम से बनायी नयी पार्टी

Updated at : 02 Oct 2016 6:37 PM (IST)
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योगेन्द्र यादव, प्रशांत भूषण ने "स्वराज इंडिया" के नाम से बनायी नयी पार्टी

नयी दिल्ली : स्वराज अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रशांत भूषण ने आज एक नई अखिल भारतीय राजनीतिक पार्टी ‘स्वराज इंडिया’ के गठन की घोषणा की. योगेन्द्र यादव को सर्वसम्मति से पार्टी का प्रथम राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया. अजित झा को पार्टी का प्रथम राष्ट्रीय महासचिव निर्वाचित किया गया है. प्रो. आनंद कुमार ‘‘ स्वराज इंडिया’ […]

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नयी दिल्ली : स्वराज अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रशांत भूषण ने आज एक नई अखिल भारतीय राजनीतिक पार्टी ‘स्वराज इंडिया’ के गठन की घोषणा की. योगेन्द्र यादव को सर्वसम्मति से पार्टी का प्रथम राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया. अजित झा को पार्टी का प्रथम राष्ट्रीय महासचिव निर्वाचित किया गया है. प्रो. आनंद कुमार ‘‘ स्वराज इंडिया’ के मार्गदर्शक एवं सलाहकार बनाये गए हैं. दिल्ली में हुए स्थापना अधिवेशन में नई पार्टी शुरू किये जाने की घोषणा की गयी जिसमें लगभग सभी राज्यों के 400 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने भाग लिया. सभी लोगों ने स्वराज इंडिया की दृष्टि और मिशन के लिए संघर्ष करने का संकल्प लिया. पार्टी के संस्थापक सदस्य की सूची में पहला हस्ताक्षर प्रसिद्ध वकील एवं पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण ने किया.

शांति भूषण ने आशा व्यक्त की कि नई राजनीतिक पार्टी विभाजनकारी और भ्रष्ट राजनीतिक पार्टियों का मुकाबला करेगी और देश में सच्चा स्वराज लाएगी. संगठन में पारदर्शिता, जवाबदेही और आंतरिक लोकतंत्र के सिद्धांत को सुनिश्चित करने के बाद राजनीतिक पार्टी के गठन का निर्णय लिया गया है. अधिवेशन को संबोधित करते हुए प्रशांत भूषण ने कहा कि स्वराज अभियान एक गैर-राजनीतिक संगठन के रुप में अपना अभियान जारी रखेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि सरकार और सरकारी संस्थाएं जनता की मर्जी से काम करें और जनहित में निर्णय लिए जाए. स्वराज अभियान के चार मुख्य कार्यक्रम चलते रहेंगे और अगर जरूरत पडी तो और कार्यक्रम भी चलाए जायंेगे.

स्वराज अभियान और स्वराज इंडिया दोनों की कार्यकारिणी अलग होगी. स्वराज इंडिया पार्टी में प्रशांत भूषण ने कोई कार्यकारी पद नहीं लिया है लेकिन वह इसके संस्थापक सदस्य हैं. उनकी अपेक्षा है कि स्वराज इंडिया देश में वैकल्पिक राजनीति का वाहक बनेगा.अधिवेशन के दौरान नेताओं ने यह दावा किया कि 14 अप्रैल 2015 को अपनी स्थापना के साथ ही स्वराज अभियान भ्रष्टाचार विरोधी जनलोकपाल आन्दोलन की सच्ची विरासत को लेकर आगे बढी है. 18 महीनों की अपनी यात्रा में स्वराज अभियान ने हमेशा सच्चे और सरोकारी मुद्दों को उठाया है. जय किसान आन्दोलन, एंटी-करप्शन टीम, अमन कमिटी और शिक्षा स्वराज जैसे कई कार्यक्रमों के जरिए स्वराज अभियान उन लोगों की आवाज बना जो विभाजनकारी राजनीति, कृषि संकट, भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्षरत हैं.
नेताओं ने कहा कि जन आंदोलनों के अलावा इस मुद्दे को लेकर स्वराज अभियान उच्चतम न्यायालय तक गया और सरकार को मजबूर किया कि विभिन्न लोक कल्याणकारी योजनाओं को सही मायने में और सही नीयत के साथ लागू किया जाए. साथ ही दिल्ली सरकार द्वारा जन लोकपाल बिल को कमजोर करने और केंद्र सरकार द्वारा पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रति गंभीर नहीं होने पर इसके खिलाफ अभियान चलाया गया। स्वराज इंडिया पार्टी की परिकल्पता में कहा गया है कि यह स्वेच्छा से सूचना के अधिकार के अंदर आने वाली भारत की इकलौती पार्टी होगी. सहभागिता पर आधारित पारदर्शी उम्मीदवार-चयन प्रक्रिया को आगे बढायेगी , साथ ही विधायकों पर कोई व्हिप नहीं होगा और हर स्तर पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित की जायेगी. ै पार्टी राष्ट्रपति मॉडल के साथ सामूहिक नेतृत्व को पोषित करेगी और पार्टी के बुनियादी ढांचे में संघीय व्यवस्था को आगे बढाया जायेगा जो 21वीं सदी के भारत की दृष्टि ‘स्वराज दर्शन’ पर आधारित है.
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