स्याही विवाद: चुनाव आयोग ने हरियाणा विधानसभा अधिकारी को अभ्यारोपित किया
Author Prabhat khabar digital desk
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नयी दिल्ली : चुनाव आयोग ने स्याही विवाद में हरियाणा विधानसभा सचिव को अभ्यारोपित करते हुए तथ्यों को छिपाने और लापरवाही बरतने को लेकर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की आज सिफारिश की. साथ ही, ‘अज्ञात लोगों ‘ के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज करने का भी आदेश दिया. हालांकि, एक वरिष्ठ चुनाव अधिकारी के खिलाफ चुनाव […]
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नयी दिल्ली : चुनाव आयोग ने स्याही विवाद में हरियाणा विधानसभा सचिव को अभ्यारोपित करते हुए तथ्यों को छिपाने और लापरवाही बरतने को लेकर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की आज सिफारिश की. साथ ही, ‘अज्ञात लोगों ‘ के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज करने का भी आदेश दिया. हालांकि, एक वरिष्ठ चुनाव अधिकारी के खिलाफ चुनाव आयोग की अभूतपूर्व कार्रवाई चुनाव नतीजे को प्रभावित नहीं करेगी, जिसमें भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सुभाष चंद्रा ने कांग्रेस समर्थित आरके आनंद को हराया था.
आरके नंदाल के खिलाफ चुनाव आयोग की कार्रवाई के बाद सूत्रों ने बताया कि चुनाव मुद्दा एक चुनाव याचिका के जरिए निपटाया जा सकता है क्योंकि चुनाव हो जाने के बाद आयोग की कोई भूमिका नहीं रह जाती. नंदाल चुनाव के लिए निर्वाचन अधिकारी थे. गौरतलब है कि कांग्रेस और अन्य के 12 विधायकों के वोट को अवैध घोषित किए जाने के बाद एक विवाद पैदा हो गया था.
दरअसल, उन्होंने आधिकारिक रुप से आपूर्ति की गई स्याही की बजाय दूसरे रंग की स्याही का इस्तेमाल अपनी वरीयता अंकित करने में किया था. आयोग ने हरियाणा विधानसभा के सचिव नंदाल को चुनाव आयोग ने उससे तथ्य छिपाने और इसके कानूनी निर्देशों का जानबूझ कर अनुपालन नहीं करने को लेकर दोषी ठहराया। साथ ही कहा कि उनके खिलाफ कार्यवाही छह महीने के अंदर पूरी होनी चाहिए.
चुनाव आयोग ने कहा कि आयोग के विचार में यह कर्तव्य निर्वहन में निगरानी नियंत्रण और लापरवाही का एक गंभीर मामला है जिसके तहत ‘वोटिंग कंपार्टमेंट’ में एक अवैध कलम पाई गई और मत पत्रों पर निशान लगाने में एक अन्य अनधिकृत कलम का गुप्त रुप से इस्तेमाल किया गया, जिसके चलते 12 मतपत्र खारिज हो गए. आयोग ने हरियाणा के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर नंदाल के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की है. इसलिए, आयोग ने फैसला किया है कि आरके नंदाल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए.
यह कार्यवाही छह महीने के अंदर पूरी होनी चाहिए और अनुशासनात्मक कार्यवाही पर कोई आखिरी फैसला चुनाव आयोग से परामर्श करने के बाद सक्षम प्राधिकार द्वारा किया जाना चाहिए. ईसी ने बताया कि हरियाणा के मुख्य चुनाव अधिकारी :सीईओ: को भी इस मामले में सहयोग करने का निर्देश दिया गया है.
राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी को लिखे एक पत्र में चुनाव आयोग ने कहा है कि आईपीसी की विभिन्न धाराओं और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत एक प्राथमिकी अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज की जाएगी ताकि इस घटना के पीछे मौजूद लोगों की पहचान सुनिश्चित हो सके और उन पर मामला दर्ज हो सके.
इसने सीईओ को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देते हुए कहा कि चुनाव ड्यूटी या अन्य तरह से मौजूद रहे अधिकारियों, जिनके कार्य से कथित तौर पर कलम या स्याही बदली गई उनकी पहचान की जा सकती है और उनके खिलाफ कानून के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है. चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि किसी वरिष्ठ चुनाव अधिकारी के खिलाफ यह अभूतपूर्व कार्रवाई है. गौरतलब है कि 11 जून 2016 को नतीजे की घोषणा के दो दिनों बाद आयोग को आनंद और हरियाणा कांग्रेस प्रमुख अशोक तंवर से एक शिकायत मिली थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि मतदान प्रक्रिया में बडे पैमाने पर धांधली हुई है.
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