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म्यामां के राष्ट्रपति सोमवार को मोदी से मुलाकात करेंगे

Updated at : 28 Aug 2016 9:29 PM (IST)
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म्यामां के राष्ट्रपति सोमवार को मोदी से मुलाकात करेंगे

नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल म्यामां के राष्ट्रपति यू थिन क्याव के साथ व्यापक मुद्दों पर बातचीत करेंगे. म्यामां में चर्चित नेता आन सान सू ची की पार्टी राष्ट्रीय लीग द्वारा सैन्य सरकार से सत्ता लिए जाने के बाद दोनों देशों के बीच शीर्ष स्तर पर यह पहली बातचीत है. उम्मीद है कि […]

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नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल म्यामां के राष्ट्रपति यू थिन क्याव के साथ व्यापक मुद्दों पर बातचीत करेंगे. म्यामां में चर्चित नेता आन सान सू ची की पार्टी राष्ट्रीय लीग द्वारा सैन्य सरकार से सत्ता लिए जाने के बाद दोनों देशों के बीच शीर्ष स्तर पर यह पहली बातचीत है.

उम्मीद है कि वार्ता में द्विपक्षीय संबंधों, खासकर व्यापार और निवेश जैसे क्षेत्रों में नई गति प्रदान करने तथा 1600 किलोमीटर लंबी भारत…म्यामां सीमा का प्रबंधन बढाने पर जोर दिया जाएगा. शीर्ष पद ग्रहण करने के बाद क्याव की यह पहली विदेश यात्रा है. सू ची की पार्टी की शानदार जीत के बाद करीब पांच महीना पहले क्याव ने शीर्ष पद ग्रहण किया था.
वह कल बौद्ध तीर्थस्थल गया पहुंचे थे. वहां उन्होंने पवित्र महाबोधि मंदिर में पूजा अर्चना की थी. वह यहां पहुंचने से पहले आज सुबह आगरा गए और ताज महल को देखा.म्यामां के राष्ट्रपति के साथ उनकी पत्नी दाव सु सु ल्विन और एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया है जिसमें कई प्रमुख मंत्री और शीर्ष अधिकारी भी शामिल हैं.
दोनों देशों के संबंधों को आगे बढाने के तरीकों की संभावना तलाशने के अलावा दोनों नेताओं के भारत..म्यामां सीमा पर उग्रवादी गतिविधियों पर काबू के तरीकों पर भी चर्चा करने की संभावना है. विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन ने यात्रा के बारे में शुक्रवार को संवाददाताओं को जानकारी देते हुए कहा था कि हम इसे वास्तव में ठोस यात्रा बनाना चाहते हैं.
म्यामां में चीन अपनी गतिविधियां बढा रहा है और विभिन्न प्रमुख परियोजनाओं में विशाल निवेश कर रहा है. भारत के लिए म्यामां एक रणनीतिक सहयोगी है तथा विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पिछले दिनों अपनी यात्रा के दौरान वहां के नेतृत्व से कहा था कि म्यामां की प्रगति के लिए भारत हर मदद मुहैया कराने को तैयार है.
शुरु में भारत लोकतंत्र के लिए सू ची के संघर्ष का समर्थन करता था लेकिन बाद में आर्थिक और सुरक्षा हितों को देखते हुए वहां के सैन्य शासन के साथ संबंध मधुर हो गए। सू ची ने इसकी आलोचना की थी.क्याव राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के आमंत्रण पर भारत आए हैं. वह कल मुखर्जी से मिलेंगे.
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