टल सकता है जेटली का पाकिस्तान दौरा

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 18 Aug 2016 6:25 PM

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नयीदिल्ली : सरकार ने आज कहा कि इस्लामाबाद में इस महीने होने वाली दक्षेस के वित्त मंत्रियों की बैठक में भारत की भागीदारी के स्तर पर उसने अबतक कोई फैसला नहीं किया है. ऐसे संकेत हैं कि वित्त मंत्री अरुण जेटली दोनों देशों के संबंधों में तनाव की वजह से इस सम्मेलन से परहेज कर […]

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नयीदिल्ली : सरकार ने आज कहा कि इस्लामाबाद में इस महीने होने वाली दक्षेस के वित्त मंत्रियों की बैठक में भारत की भागीदारी के स्तर पर उसने अबतक कोई फैसला नहीं किया है. ऐसे संकेत हैं कि वित्त मंत्री अरुण जेटली दोनों देशों के संबंधों में तनाव की वजह से इस सम्मेलन से परहेज कर सकते हैं.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने यहां अपनी साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, ‘‘इस्लामबाद में होने वाली दक्षेस के वित्त मंत्रियों की बैठक में भारत के भागीदारी स्तर पर अबतक कोई फैसला नहीं किया गया है.’ यह सम्मेलन इस्लामाबाद में 25-26 अगस्त को होगा.

इस सप्ताह के प्रारंभ में आधिकारिक सूत्रों ने बताया था कि जेटली राजनीतिक कारणों से पाकिस्तान नहीं जा सकते हैं.

एक सूत्र ने इस माह के प्रारंभ में हुई केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की यात्रा का जिक्र करते हुए कहा था, ‘‘आप सभी जानते हैं कि पिछली बार क्या हुआ था और क्या हो रहा है.’ सिंह की यह यात्रा दक्षेस के मंत्रिस्तरीय सम्मेलन के लिए हुई थी. इस यात्रा के दौरान सिंह और पाकिस्तान के गृह मंत्री चौधरी निसार अली खान के बीच आरोप-प्रत्यारोप चला था. दोनों ने दक्षेस की इस बैठक के दौरान असहजरूप से बमुश्किल हाथ मिलाया था. पाकिस्तान अधिकारियों ने पीटीआइ और दूरदर्शन प्रतिनिधि समेत भारतीय मीडियाकर्मियों को इस्लामाबाद में सातवें दक्षेस गृह मंत्री सम्मेलन के स्थल के अंदर नहीं जाने दिया था.

सिंह ने राज्यसभा को बताया था कि बैठक हो जाने के बाद पाकिस्तान के गृहमंत्री, जो मेजबान थे, ने सहभागियोंं को लंच के लिए आमंत्रित किया था लेकिन वह उसके तुरंत बाद कार से चले गए.

उन्होंने कहा था, ‘‘देश की प्रतिष्ठा को ध्यान में रखते हुए मैंने वही किया जो मुझे करना चाहिए. मुझे कोई शिकायत नहीं है. मै वहां लंच करने नहीं गया था.” भारत ने कश्मीर पर विदेश सचिव स्तर की वार्ता करने के पाकिस्तान के प्रस्ताव को कल ठुकरा दिया था और स्पष्ट किया था कि आतंकवाद पाकिस्तान के साथ उसके संबंध के केंद्र में है जिस पर उसके भिन्न दृष्टिकोण ने द्विपक्षीय रिश्ते की प्रगति कठिन बना दी है.

इसके अतिरिक्त, इस हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर अपने भाषण में घोषणा की थी कि भारत आतंकवाद के सामने नहीं झुकेगा. उन्होंने बलूचिस्तान एवं पीओके के लोगों पर अत्याचार का मुद्दा उठाया था एवं कहा था कि उन्होंने ऐसा करने पर उन्हें धन्यवाद दिया.

वैसे मोदी ने कश्मीर की हिंसा का कोई सीधा जिक्र नहीं किया लेकिन उन्होंने पाकिस्तान पर आतंकवादियों का महिमामंडन करने और भारत में लोगों की हत्याओं पर जश्न मनाने का आरोप लगाया.

पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने हाल ही एक बयान में कहा था कि उनका देश अच्छे मेजबान की भूमिका निभाएगा और संपूर्ण वातावरण सकारात्मक रखने का प्रयास करेगा.

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