शिवसेना ने स्वर्ण जयंती समारोह से भाजपा को किया दरकिनार, दोनों दलों ने दी सफाई

मुम्बई : महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में जीत के लिए भाजपा और शिवसेना ने अलग-अलग राह चुनी. भाजपा को जब ज्यादा सीटें मिली, तो शिवसेना और भाजपा का टूटता रिश्ता एक बार फिर कच्चे धागे में बंध गया. महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर भी शिवसेना की कई मांगे भाजपा ने पूरी नहीं की. अब भाजपा […]
मुम्बई : महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में जीत के लिए भाजपा और शिवसेना ने अलग-अलग राह चुनी. भाजपा को जब ज्यादा सीटें मिली, तो शिवसेना और भाजपा का टूटता रिश्ता एक बार फिर कच्चे धागे में बंध गया. महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर भी शिवसेना की कई मांगे भाजपा ने पूरी नहीं की. अब भाजपा को शिवसेना ने अपने 50 वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया है, जिसके अलग-अलग अर्थ निकाले जा रहे हैं. हालांकि दोनों पार्टियों ने पूरी स्थिति पर सफाई दी है.
महाराष्ट्र में देवेन्द्र फडणवीस के नेतृत्व में सरकार बनी और इसमें अहम साझेदार के रूप में शिवसेना ने अपना समर्थन दिया. दोनों पार्टियों के बीच दरार कई बार साफ नजर आने लगती है. कई मुद्दों पर शिवसेना ने महाराष्ट्र सरकार के इतर अपना पक्ष रखा जो सरकार विरोधी था. एकनाथ खडसे जब विवादों में फंसे तो शिवसेना सरकार के विरोध में खड़ी हुई. सरकार ने जब एकनाथ खडसे पर जब कार्रवाई कर दी तो भी शिवेसना इसके विरोध में थी. भाजपा और शिवसेना सरकार गठन के लिए भले ही साथ हो लेकिन मुद्दे और राजनीति में इनकी राहें अलग हो जाती है.
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