गैर हिंदी राज्यों में भाजपा का बढ़ता वोट प्रतिशत, कांग्रेस को हैरान-परेशान करने की क्यों है वजह?

Updated at : 19 May 2016 2:42 PM (IST)
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गैर हिंदी राज्यों में भाजपा का बढ़ता वोट प्रतिशत, कांग्रेस को हैरान-परेशान करने की क्यों है वजह?

इंटरनेट डेस्क नयी दिल्ली : पांच राज्य पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम व पुड्डुचेरी में हुए चुनाव में भाजपा का बढ़ता वोट प्रतिशत वहां की स्थानीय पार्टियों के साथ देश की मुख्य विपक्षी कांग्रेस को हैरान-परेशान करने के लिए काफी है. अहम बात यह कि ये गैर हिंदी भाषी राज्य हैं, जहां परंपरागत रूप से […]

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इंटरनेट डेस्क


नयी दिल्ली :
पांच राज्य पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम व पुड्डुचेरी में हुए चुनाव में भाजपा का बढ़ता वोट प्रतिशत वहां की स्थानीय पार्टियों के साथ देश की मुख्य विपक्षी कांग्रेस को हैरान-परेशान करने के लिए काफी है. अहम बात यह कि ये गैर हिंदी भाषी राज्य हैं, जहां परंपरागत रूप से क्षेत्रीय पार्टियां, वाम दल व राष्ट्रीय पार्टी के रूप में कांग्रेस उपस्थित रही है. ऐसे में वहां भाजपा के वोट में इजाफा मुख्य रूप से कांग्रेस व अन्य दूसरों को बेचैन करने की स्वाभाविक वजह है.


असम में असम गण परिषद के साथ गंठबंधन कर चुनाव लड़ने वाली भाजपा को 29.5 प्रतिशत वोट हासिल हुए और उसकी सहयोगी असम गण परिषद को 8.7 प्रतिशत वोट. अगर दोनों को जोड़ते हैं तो यह 38.2 होता है. वहीं, अकेले व लगभग सभी सीटों पर लड़ने वाली कांग्रेस को 31 प्रतिशत वोट हासिल हुए हैं.

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चुनाव परिणाम के बाद गोवाहाटी में कांग्रेस कार्यालय में पसरा सन्नाटा.

उधर, तमिलनाडु में भाजपा ने 2.7 प्रतिशत वोट हासिल किये और संभवत: एकाध सीट पर उसका खाता भी खुल जाये. वहीं, कांग्रेस को 6.4 प्रतिशत वोट मिले हैं, जो डीएमके के साथ चुनाव मैदान में कूदी थी. वहां की प्रमुख पार्टी अन्नाद्रमुक को 41.3 प्रतिशत व डीएमके को 31.6 प्रतिशत वोट मिले हैं. जबकि अलग मोर्चा बनाने वाली डीएमडीके को मात्र 2.3 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए हैं.


पश्चिम बंगाल में जोरशोर से उतरी भाजपा कोई बहुत ज्यादा सीटें हासिल करने की ओर तो नहीं बढ़ रही है, लेकिन उसका वोट प्रतिशत उसके लिए बड़े संतोष की बात है, जो लोकसभा चुनाव के वोट प्रतिशत के आसपास कायम है. उसे अबतक वहां 10.3 प्रतिशत वोट मिले हैं. जबकि उसकी वास्तविक प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस को 11.7 प्रतिशत वोट हासिल हुआ है. तृणमूल कांग्रेस को दोपहर तक की मतणगना के ट्रेंड के मुताबिक 45.2 प्रतिशत वोट हासिल हुए हैं. जबकि लेफ्ट-कांग्रेस गठजोड़कीअगुवा सीपीएम को 19.5 प्रतिशत, फाॅरवर्ड ब्लॉक को तीन प्रतिशत, आरएसपी को 1.6 प्रतिशत, सीपीआइ को मात्र 1.5 प्रतिशत वोट मिले हैं.


उधर, केरल जैसे राज्य में भाजपा ने 10.7 प्रतिशत वोट हासिल किये हैं. वहां, एलडीएफ की अगुवा सीपीएम को 26.4 प्रतिशत व यूडीएफ की अगुवा कांग्रेस को 23.9 प्रतिशत वोट हासिल हुए हैं. यूपीएफ की घटक सीपीआइ को 8.2 प्रतिशत व आइयूएमएल को सात प्रतिशत वोट मिले हैं.


पुड्डुचेरी में भी भाजपा ने दो प्रतिशत वोट लाया है. वहां कांग्रेस को 31.7 प्रतिशत, एआइएनआरसी को 29.7 प्रतिशत, अन्नाद्रमुक को 14.6 प्रतिशत, द्रमुक को 7.9 प्रतिशत वोट हासिल हुए हैं.

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विधानसभा चुनाव 2016 के लिए एक जनसभा को संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी.

पांच राज्यों के चुनाव परिणाम से भाजपा इसलिए प्रसन्न है कि वह पूर्वोत्तर के राज्य असम में पहली बार सत्ता में आ रही है और अन्य राज्यों में उसका वोट प्रतिशत या तो बढ़ रहा है या कायम है, जो उसे वहां कांग्रेस के राष्ट्रीय विकल्प को रूप में खड़ा कर रही है. ये बढ़ते वोट प्रतिशत आने वाले समय में सीटों की संख्या में भी तब्दील हो सकते हैं.


इस चुनाव परिणाम के बाद भाजपा या एनडीए राज्यों के अनुरूप जहां देश के 43प्रतिशत हिस्से पर सत्ता में आ जायेगी, वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूपीए का मात्र 15 प्रतिशत आबादी पर शासन रह जायेगा. अन्य दलों का 41 प्रतिशत हिस्से पर शासन हो जायेगा.

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