हैदराबाद खुदकुशी मामला : ''आप'' ने पूछा यह कैसा विकास
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 20 Jan 2016 1:13 PM
नयी दिल्ली : आम आदमी पार्टी हैदराबाद विश्वविद्यालय के दलित छात्र की आत्महत्या के मामले में कल यानी 21 जनवरी से राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करेगी. इस मामले को लेकर पार्टी काफी गंभीर नजर आ रही है. आज पार्टी के ट्वीट हैंडल के जरिए केंद्र की मोदी सरकार पर जोरदार हमला किया गया. पार्टी के ट्विटर […]
नयी दिल्ली : आम आदमी पार्टी हैदराबाद विश्वविद्यालय के दलित छात्र की आत्महत्या के मामले में कल यानी 21 जनवरी से राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करेगी. इस मामले को लेकर पार्टी काफी गंभीर नजर आ रही है. आज पार्टी के ट्वीट हैंडल के जरिए केंद्र की मोदी सरकार पर जोरदार हमला किया गया. पार्टी के ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया कि रोहित वेमुले के क़त्ल की पृष्ठभूमि मानव मंत्रालय द्वारा 5-5 चिठ्ठियों से दबाव में बनी. भाजपाई अपनी गलतियों पर उठे सवालों को ज़बरदस्ती देश से जोड़कर या राजनैतिक फायदा बताकर आख़िर मुंह क्यों छुपाते फिरते हैं?
देश का भविष्य बनने वाले छात्रों के खून में सामाजिक भेदभाव का ज़हर घोलने वाले देश के विकास की बात किस मुंह से करते हैं? #DalitVirodhiModi
— AAP (@AamAadmiParty) January 20, 2016
ट्विटर में कहा गया है कि आख़िर कौनसे हित हैं जिसे साधने को भाजपाई मंत्री और मानव संसाधन मंत्रालय चिठ्ठियां भेजकर छात्रों के निलंबन का दबाव बना रहा था? भाजपा कोर्ट केस की आड़ में अपने गुनाह छुपा रही है? क्या कोर्ट ने निलंबन का आदेश दिया था या केवल रिपोर्ट मांगी थी? भाजपा अपनी सामाजिक अन्याय और विघटनकारी नीतियों का ज़हर छात्र राजनीति में घोलना चाहती है, यह हत्या उसी का परिणाम है.
ट्विटर हैंडल में कहा गया है कि प्रतीत हो रहा है कि भाजपा द्वारा दलित छात्रों का निलंबन अपनी छात्र इकाई का दबदबा क़ायम करने की नियत से बनाया गया था. किसी विदेशी राष्ट्रप्रमुख के जन्मदिन को भी प्रमुखता देने वाले PM मोदी आख़िर रोहित वेमुले की हत्या पर कब तक चुप रहेंगे? दलितों और पिछड़ों के नाम पर राजनैतिक रोटियां सेकने वाले दल इस हत्या पर भाजपा की गोदी में सत्तासुख ओढ़े सोये पड़े हैं. क्या सामाजिक न्याय का दम भरने वाले PM अपने मंत्रियों के ख़िलाफ़ कोई एक्शन लेंगे या पहले की तरह बचाते रहेंगे?
पार्टी ने कहा कि शायद उन छात्रों की आवाज़ को इसलिए दबाया गया था क्योंकि वोह पिछड़ों की आवाज़ बुलंद करते थे? एक ओर सबका साथ सबका विकास की बात होती है और दूसरी ओर सारकारी दबाव में दलित छात्रों का यूनिवर्सिटी से निलंबन होता है. देश का भविष्य बनने वाले छात्रों के खून में सामाजिक भेदभाव का ज़हर घोलने वाले देश के विकास की बात किस मुंह से करते हैं?
आपको बता दें कि मंगलवार को आप नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. इस घटना के विरोध में पार्टी कार्यकर्ताओं ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया. आप नेता दिलीप पांडे ने कहा, इस घटना के बाद केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय व संबंधित विश्वविद्यालय के कुलपति को तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी की भूमिका को भी संदिग्ध बताया. पार्टी नेता संजय सिंह ने कहा, एक दलित छात्र द्वारा आत्महत्या किए जाने का मामला बेहद शर्मनाक है.
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