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आप ने आज फिर साधा जेटली पर निशाना, दागे पांच सवाल

Updated at : 18 Dec 2015 2:12 PM (IST)
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आप ने आज फिर साधा जेटली पर निशाना, दागे पांच सवाल

नयी दिल्ली : आज एक बार फिर आम आदमी पार्टी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वित्तमंत्री अरुण जेटली पर निशाना साधा. पार्टी के सदस्य आशुतोष और संजय सिंह ने संवाददाताओं के सामने कुछ तथ्य रखे और वित्तमंत्री से पांच सवाल किये हैं. आशुतोष ने जेटली पर तीखा हमला करते हुए उन्हें ‘ मास्टर अॅाफ हाफ ट्रूथ […]

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नयी दिल्ली : आज एक बार फिर आम आदमी पार्टी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वित्तमंत्री अरुण जेटली पर निशाना साधा. पार्टी के सदस्य आशुतोष और संजय सिंह ने संवाददाताओं के सामने कुछ तथ्य रखे और वित्तमंत्री से पांच सवाल किये हैं. आशुतोष ने जेटली पर तीखा हमला करते हुए उन्हें ‘ मास्टर अॅाफ हाफ ट्रूथ एंड हैंडसम लाय’ बताया.

आशुतोष ने अरुण जेटली के ब्लॉग का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने लिखा है कि आज तक उनपर कोई व्यक्तिगत आरोप नहीं लगा है, जबकि यह सरासर गलत है. उन्होंने भाजपा सांसद कीर्ति आजाद के पत्र का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने 13-09-2015 को जेटली को पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने उल्लेख किया था कि डीडीसीए में जो कॉरपोरेट बॉक्स बने हैं, उन्हें उन कंपनियों को क्यों दिया गया जो उनके करीब थे.
आशुतोष ने वित्तमंत्री से पूछा है कि क्या यह व्यक्तिगत आरोप नहीं है. उन्होंने वित्तमंत्री से पांच सवाल पूछे हैं और उन्होंने यह भी कहा कि यह सारे सवाल तथ्यात्मक हैं, कोई भी सवाल आधारहीन नहीं है, इसलिए वित्तमंत्री को इनका जवाब देना चाहिए.
आम आदमी पार्टी की ओर से पूछे गये सवाल इस प्रकार हैं :-
1. 21 सेंचुरी किसकी कंपनी है और इस कंपनी में क्या जेटली का कोई अपना भी भागीदार है. आम आदमी पार्टी का आरोप है कि यह कंपनी है तो लोकेश शर्मा की लेकिन जिस तरह से उसे फायदा पहुंचाने का जिक्र कीर्ति आजाद ने अपने पत्र में किया है, उससे यह स्पष्ट होता है कि जेटली का कोई अपना भी कंपनी में है.
2. आखिर क्यों जेटली ने ओएनजीसी पर इस बात के लिए दबाव बनाया कि वह हॉकी इंडिया को पांच करोड़ रुपये दे.क्या इसमें हितों के टकराव का मामला नहीं बनता है.

3
. दिल्ली में 114 करोड़ के खर्च से जो स्टेडियम बना है उसमें 57 करोड़ तो ईपीआईएल को दिये गये, जो एक पब्लिक सेक्टर कंपनी है. लेकिन जो शेष 57 करोड़ रुपये हैं, वह किस कंपनी को दिये गये. क्या जेटली इसका जवाब देंगे.

4.
कंपनियों के पेमेंट्‌स में जिन नौ कंपनियों का जिक्र है, उन सब के ईमेल और डायरेक्टर एक ही हैं. हमारा सवाल जेटली से यह है कि वे बतायें कि क्या उन्हें इन कंपनियों की जानकारी थी. क्या यह सब फरजी कंपनियां हैं?

5.
आशुतोष ने कहा कि जेटली ने अपने ब्लाग में लिखा है कि यूपीए के शासनकाल में डीडीसीए की जांच हुई थी, जिसमें कुछ माइनर गड़बड़ियों के अलावा कुछ नहीं निकला था. आशुतोष ने आरोप लगाया कि जेटली जिसे माइनर गड़बड़ी बता रहे हैं वह कंपनी एक्ट के तहत दंडनीय है. अत: हम यह जानना चाहते हैं कि आखिर क्यों जेटली देश से झूठ बोल रहे हैं.
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