हार्दिक के खिलाफ देशद्रोह की दूसरी प्राथमिकी पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
Author Prabhat khabar digital desk
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अहमदाबाद : गुजरात उच्च न्यायालय ने पटेल आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल और पांच अन्य लोगों के खिलाफ पुलिस की अपराध शाखा द्वारा राष्ट्रद्रोह और सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने को लेकर दर्ज की गयी प्राथमिकी को निरस्त करने को लेकर दायर याचिका पर दलीलों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा. न्यायमूर्ति […]
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अहमदाबाद : गुजरात उच्च न्यायालय ने पटेल आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल और पांच अन्य लोगों के खिलाफ पुलिस की अपराध शाखा द्वारा राष्ट्रद्रोह और सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने को लेकर दर्ज की गयी प्राथमिकी को निरस्त करने को लेकर दायर याचिका पर दलीलों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा.
न्यायमूर्ति जे बी पर्दीवाला की अदालत में जिरह के दौरान लोक अभियोजक मितेश अमीन ने अपराध शाखा द्वारा हार्दिक और आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन करने वाले पांच अन्य नेताओं केतन पटेल, चिराग पटेल, दिनेश पटेल, अल्पेश कठिरिया और अमरीश पटेल के खिलाफ कडा अभियोग लगाने का मजबूती से बचाव किया.
अमीन के अनुसार अपराध शाखा द्वारा किये गये फोन टेपिंग के आधार पर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है. उन्होंने कहा कि इस साल जुलाई से सितंबर के मध्य पटेल नेताओं द्वारा किये गये ऐसे 200 फोन कॉल को अपराध शाखा ने रिकॉर्ड किया.
अमीन ने आरोप लगाया कि बातचीत में बहुत अधिक कटुता थी. उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान आरोपियों को अपने समर्थकों से पुलिस चौकियों को जलाने, रेल पटरियों को उखाड़ने और पुलिसकर्मियों की हत्या करने के लिए कहते हुए सुना जा सकता है.
अभियोजक ने दलील दी कि ये बातचीत सरकार को गिराने के प्रयास का हिस्सा था. फोन कॉल के अलावा पुलिस को पता चला कि 25 अगस्त की रात को हार्दिक को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किये जाने के बाद सोशल मीडिया के जरिये समुदाय के लोगों को 35 लाख संदेश भेजे गये जिनमें उनसे हिंसा का सहारा लेने का आग्रह किया गया था.
अमीन ने कहा कि इस तरह के संदेश के कारण राज्यभर में हिंसा फैल गयी जिसमें एक पुलिसकर्मी समेत सात लोगों की जान चली गयी. अभियोजन पक्ष की दलील के जवाब में हार्दिक के वकील बी एम मंगुकिया ने कहा कि लोगों को सरकार से असहमति जताने का पूरा अधिकार हैं क्योंकि लोकतंत्र में यह एक मौलिक अधिकार है. उन्होंने कहा कि अगर लोग आक्रामक रुख भी अख्तियार करें तो यह राष्ट्रद्रोह या सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना नहीं है.
मंगुकिया ने तर्क दिया कि रेल पटरी हटाना देशद्रोह या युद्ध छेड़ना नहीं है क्योंकि समय-समय पर इस तरह के प्रदर्शन होते रहते हैं और अब तक इस तरह का कडा अभियोग किसी पर नहीं लगाया गया है. उन्होंने कहा कि विरोध भाजपा की चुनी हुई सरकार के खिलाफ था ना कि सरकार की संप्रभुता के खिलाफ. सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायमूर्ति पर्दीवाला ने फैसला सुरक्षित रखा. हार्दिक के खिलाफ दर्ज कराया गया देशद्रोह का यह दूसरा मामला है. राष्ट्रदोह के दूसरे मामले में 22 वर्षीय नेता कल तक अपराध शाखा की हिरासत में रहेंगे.
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