पाकिस्तान में फंसी गीता का घर बिहार में, माता-पिता को पहचाना

Updated at : 15 Oct 2015 6:54 PM (IST)
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पाकिस्तान में फंसी गीता का घर बिहार में, माता-पिता को पहचाना

नयी दिल्ली : भारत की गीता पाकिस्तान से अब बहुत जल्द वापस आ जायेगी. गीता ने अपने मां बाप को भी तस्वीरों में पहचान लिया है. खबरों के अनुसार गीता के मां – बाप बिहार के रहने वाले हैं. 26 अक्टूबर को गीता अपने माता पिता से मिलेगी. विदेश मंत्रालय ने भी इसकी पुष्टि की […]

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नयी दिल्ली : भारत की गीता पाकिस्तान से अब बहुत जल्द वापस आ जायेगी. गीता ने अपने मां बाप को भी तस्वीरों में पहचान लिया है. खबरों के अनुसार गीता के मां – बाप बिहार के रहने वाले हैं. 26 अक्टूबर को गीता अपने माता पिता से मिलेगी. विदेश मंत्रालय ने भी इसकी पुष्टि की है कि गीता के माता – पिता का पता चल गया है. गीता के वापस आने के बाद गीता के डीएनए की जांच होगी जिसके बाद उसे परिवार वालों को सौंप दिया जायेगा. फिल्म बजरंगी भाईजान के परदे पर आने के बाद गीता की कहानी भी मीडिया में खूब सुर्खियों में रही. भारत और पाकिस्तान दोनों तरफ से मीडिया वालों ने उसके घर वालों को तलाशने की पूरी कोशिश की.
प्रभात खबर ने भी अपने स्तर पर गीता के घरवालों को खोजने का प्रयास किया. कई जगहों से कई तस्वीरें भेजी गयी. दोनों तरफ से किया गया यही ईमानदार प्रयास अब अंजाम तक पहुंचने वाला है. गीता कब से अपने देश वापस आने का इंतजार कर रही है गीता जन्म से बहरी और गूंगी है. पाकिस्तान में एक एनजीओ गीता की देखभाल कर रहा था. फिल्म बजरंगी भाईजान की कहानी पर भी एनजीओ के कुछ सदस्यों ने संदेह जताते हुए कहा कि फिल्म की कहानी गीता पर ही लिखी गयी थी. हालांकि फिल्म निर्माता और निर्देशक की तरफ से इस बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी . हालांकि इस फिल्म के परदे पर आने से गीता की मुहिम और तेज हुई.
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा है कि गीता को भारत लाने के लिए सरकार हर जरूरी प्रक्रिया पूरी कर रही है. गौरतलब है कि करीब 14-15 साल पहले पंजाब की सीमा पर भटकते हुए गीता पाकिस्तान चली गयी. पाकिस्तान रेंजर ने खेतों से उसे पकड़ा़ पाकिस्तानी रेंजर को लगा कि वह आसपास के गांव से होगी़. काफी छानबीन की, लेकिन उसके बारे में पता नहीं लगा सका़. इसके बाद पाकिस्तानी रेंजरों ने उसका नाम सलमा रखा. इसके बाद लाहौर में ऐधी फाउंडेशन में गीता को पहुंचाया गया़. पाकिस्तान के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता अब्दुल सत्तार ऐधी ने इसकी स्थापना की थी. ऐधी फाउंडेशन में अब्दुल सत्तार की पत्नी बिलकिस ऐधी ने पहली बार लोगों को बताया कि वह हिंदू है.
इसके बाद फाउंडेशन ने हिंदू संस्कार से इसका लालन-पालन किया़. बिलकिस ऐधी ने ही उसे गीता नाम दिया. भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों ने पिछले माह गीता को 15 से 20 तसवीरें दिखायी थी. इन सभी ने भारत में गीता के अभिभावक और परिवार से होने का दावा किया था. अब गीता को उसके परिवार वाले मिल गये जिससे दोनों देश के लोग खुश हैं, जिन्होंने इस मुहिम में हिस्सा लिया या खुद को गीता की कहानी से जुड़ा हुआ महसूस किया.
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