बाढ़ के एक साल पूरा होने पर बोले उमर ना तो हमें यहां से कुछ मिल रहा है ना वहां से

Updated at : 07 Sep 2015 5:02 PM (IST)
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बाढ़ के एक साल पूरा होने पर बोले उमर ना तो हमें यहां से कुछ मिल रहा है ना वहां से

श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर में आयी विनाशकारी बाढ़ के एक साल बाद पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आज केंद्र सरकार से कहा कि अगर उसके पास बाढ़ पीडितों के पुनर्वास के लिए धन नहीं हैं या वह उनके लिए किसी पैकेज की घोषणा नहीं करना चाहती तो उसे राज्य के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता की इजाजत दे […]

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श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर में आयी विनाशकारी बाढ़ के एक साल बाद पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आज केंद्र सरकार से कहा कि अगर उसके पास बाढ़ पीडितों के पुनर्वास के लिए धन नहीं हैं या वह उनके लिए किसी पैकेज की घोषणा नहीं करना चाहती तो उसे राज्य के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता की इजाजत दे देनी चाहिए.

उमर ने विनाशकारी बाढ़ की पहली बरसी पर नेशनल कान्फ्रेंस की ओर से आयोजित रक्तदान शिविर में रक्तदान करने के बाद पत्रकारों से कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि जहां से आए, सहायता आनी चाहिए. अगर केंद्र वित्तीय सहयोग देने के लिए तैयार नहीं है, या उसके पास धन नहीं है तो हमें जहां से मिल रहा है, उसे पाने की इजाजत मिलनी चाहिए.’’
विपक्षी नेशनल कान्फ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष उमर ने कहा कि राज्य के लोगों को दोनों तरफ से ङोलना पडा. केंद्र ने कोई पैकेज नहीं दिया और ना ही उसने कोई अंतरराष्ट्रीय सहायता लेने की इजाजत दी. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हमने (पूर्ववर्ती नेका-कांग्रेस सरकार) ने विश्व बैंक से चर्चा कर के अंतरराष्ट्रीय सहायता हासिल करने की प्रक्रिया शुरू की थी. विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के अधिकारियों के साथ मेरी पहली बैठक आदर्श चुनाव आचार संहिता के प्रभावी होने से पहले हुई थी.’’
उमर ने कहा, ‘‘हमने एक परियोजना तैयार की लेकिन उसपर भी आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई. सो, हम दोनों तरफ से भुगत रहे हैं. ना तो हमें यहां से कुछ मिल रहा है और ना ही वहां से जहां से हमें कुछ धन मिल पाता.’’
उन्होंने बाढ़ की बरसी मनाने के सत्तारुढ पीडीपी के फैसले को ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण’’ करार देते हुए कहा, ‘‘सच्चाई यह है कि बाढ़से प्रभावित हुए लोगों के पास जश्न मनाने के लिए कुछ नहीं है. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सरकार की ‘‘अकर्मठता ’’ के चलते अब उच्च न्यायालय को स्वत: संज्ञान लेना पडा है.
उन्होंने कहा, ‘‘अदालत ने राज्य और साथ ही केंद्र सरकार को जवाब देने के लिए बाध्य किया है. अब, हमें उम्मीद है कि उच्च न्यायालय के दबाव के चलते लोगों को कुछ मिल सकेगा जो ये लोग (राज्य एवं केंद्र सरकार) अब तक देना नहीं चाहते थे. वे अपनी तरफ से लोगों को कुछ देने के लिए तैयार नहीं हैं. मैंने अपनी सरकार के दौरान जो कुछ दिया, लोगों को उससे ज्यादा कुछ नहीं मिला.’’
उमर ने कहा, ‘‘जब से (एक मार्च से) पीडीपी-भाजपा सरकार सत्ता में आई, उन्हें (बाढ़ पीडितों को) लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है. बहुत मुश्किल से उन्हें 2000-2500 करोड रुपये का जो कोष मिला वह राज्य आपदा राहत कोष और भारत सरकार के पहली किस्त का पैसा था जिसकी घोषणा मेरी सरकार के दौरान घटनास्थल पर की गई थी. एक अधेला ज्यादा नहीं.’’ उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने विभिन्न परिव्ययों के खाते में राज्य को जो दिया था, उसे वापस ले लिया.
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘उन्होंने बाढ़राहत के नाम पर ढेर सारी चीजों के लिए पैसे लिए. लेकिन जिन्हें नुकसान झेलना पडा, उन्हें कुछ नहीं मिला. हेलीकाप्टरों का उपयोग किया गया, लेकिन हमसे पैसे लिए गए. उनकी नौकाएं इस्तेमाल की गई, लेकिन हमसे धन लिया गया. प्रधानमंत्री पुनर्निर्माण कार्यक्रम के तहत देनदारियों के लिए कोष को बाढ़ के नाम पर ले लिया गया.’’
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