आप विधायक सुरिंदर सिंह को मिली जमानत
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 22 Aug 2015 3:59 PM
नयी दिल्ली: एनडीएमसी के एक कर्मचारी से कथित मारपीट को लेकर गिरफ्तार किये गये दिल्ली छावनी के आप विधायक सुरिंदर सिंह को शनिवार को यहां की एक अदालत ने जमानत दे दी जबकि विधायक ने आरोप लगाया कि यह मामला दिल्ली के सत्तारुढ़ दल को दबाने और परेशान करने के लिए राजनीतिक बदले की भावना […]
नयी दिल्ली: एनडीएमसी के एक कर्मचारी से कथित मारपीट को लेकर गिरफ्तार किये गये दिल्ली छावनी के आप विधायक सुरिंदर सिंह को शनिवार को यहां की एक अदालत ने जमानत दे दी जबकि विधायक ने आरोप लगाया कि यह मामला दिल्ली के सत्तारुढ़ दल को दबाने और परेशान करने के लिए राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है. मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट गोमती मनोचा की अदालत ने दिल्ली छावनी के विधायक के अलावा दो अन्य- उनके ड्राइवर पंकज और सहायक प्रवीण को भी 30 हजार रुपये के निजी मुचलके और उतनी ही राशि की जमानत पर छोड़ने का आदेश दिया.
अदालत ने आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने की पुलिस की दरख्वास्त खारिज कर दी और यह कहते हुए उन्हें जमानत दी कि जिन अपराधों को लेकर उन पर मामला दर्ज किया गया है, उनमें से एक में भी अपराध के लिए सात साल से अधिक की कैद का प्रावधान नहीं है और उनके फरार होने या न्याय से भागने की कोई संभावना नहीं है. अदालत ने कहा, इसके अलावा, सीआरपीसी की धारा 164 के तहत गवाहों के बयान पहले ही दर्ज किये जा चुके हैं. आरोपियों से हिरासत में पूछताछ या किसी बरामदगी की भी जरुरत नहीं है. कल गिरफ्तार किये गये इन आरोपियों को आज अदालत में पेश किया गया था और पुलिस ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग करते हुए आवेदन दिया था.
सुनवाई के दौरान विशेष सरकारी वकील अनुपम एस शर्मा ने कहा कि आरोपी सबूत गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं और पीड़ित मुकेश को धमकियां भी दी गयी हैं. उन्होंने कहा कि आरोपियों की जमानत अर्जियां खारिज कर दी जाएं क्योंकि सत्र अदालत ने सुरिंदर सिंह की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी थी. इस मामले में अनुसूचित जाति-जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम के तहत आरोप लगाये गये हैं, इसलिए केवल सत्र अदालत ही जमानत अर्जियों पर सुनवाई कर सकती है. पुलिस की दलीलें खारिज करते हुये सिंह के वकील रमेश गुप्ता ने कहा, आप और उस पार्टी के बीच शीतयुद्ध है जो (केंद्र में) सत्ता में है. वह उस पार्टी के सदस्य हैं जो दिल्ली में सत्ता में है जबकि अन्य पार्टी के नियंत्रण में दिल्ली पुलिस है. उन्होंने कहा कि यह मामला दिल्ली के सत्तारुढ दल को दबाने और परेशान के लिए राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है.
गुप्ता ने यह भी कहा कि इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं की गयी है और यदि आरोपियों ने कोई कथित अपमानजनक या जातिवादी टिप्पणियां की है तो वह सुनवाई का मामला है. सुनवाई के दौरान पुलिस ने आरोप लगाया कि सुरिंदर ने अपने रुतबे का दुरुपयोग किया और अपने सहयोगियों के साथ मिलकर नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद के बेलदार मुकेश के साथ मारपीट की एवं उनपर अपमानजनक जातिसूचक टिप्पणियां की. मुकेश का अब भी इलाज चल रहा है.
अभियोजन पक्ष ने कहा कि मुकेश ओर गवाह रामजीवन मीना के बयान सीआरपीसी की धारा 164 के तहत पहले ही दर्ज किये जा चुके हैं. मुकेश ने सुरिंदर से उन्हें मिली धमकियांे के बारे में कल शिकायत दर्ज करायी थी. बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि आरोपियों से कोई बरामदगी नहीं की जानी है तथा उनसे हिरासत में और किसी पूछताछ की जरुरत भी नहीं है. अतएव उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का केाई मतलब नहीं होगा। आरोपियों ने जांच में सहयोग भी किया है.
इस मामले से निबटने की इस अदालत के क्षेत्रधिकार के मुद्दे पर बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि वैसे अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम के मामले की सुनवाई विशेष अदालत द्वारा ही की जा सकती है लेकिन यदि मजिस्ट्रेट अदालत को आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने का अधिकार है तो उसे उन्हें जमानत पर रिहा करने का भी अधिकार है. उन्होंने यह भी दलील दी कि न तो सीआरपीसी और न ही अनुसुचित जाति-जनजाति अधिनियम मजिस्ट्रेट के जमानत देने के अधिकारों पर रोक लगाता है.
अदालत ने कहा, वैसे तो अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम के तहत अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष अदलात बनायी गयी है लेकिन चूंकि मजिस्ट्रेट अदालत आरोपी केा हिरासत में भेजने के लिए सक्षम है तो प्राकृतिक उपसिद्धांत के अनुसार मजिस्ट्रेट को आरोपियों केा जमानत देने का भी अधिकार है.
उल्लेखनीय है कि चार अगस्त को सिंह के खिलाफ तुगलक रोड इलाके में एनडीएमसी कर्मचारी से कथित मारपीट एवं दुव्र्र्यवहार करने को लेकर मामला दर्ज किया गया था. उस वक्त एनडीएमसी के अधिकारियों की एक टीम नियमित जांच कर रही थी और उसने एक ई-रिक्शा ड्राइवर को उसके दस्तावेजों की जांच के लिए पकडा था. सिंह ऐसे तीसरे आप विधायक हैं जिन्हें पिछले दो महीने में गिरफ्तार किया गया था. दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर को जून में फर्जी शैक्षणिक डिग्री के मामले में पकड़ा गया था जबकि कांेडली के विधायक मनोज कुमार को जुलाई में गिरफ्तार किया गया था.
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