व्यापमं के आरोपियों ने राष्ट्रपति से गुहार की, जमानत दें या दें खुदकुशी की इजाजत

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भोपाल : मध्यप्रदेश के कुख्यात व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) के जरिये प्रदेश में हुए प्री-मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) को अनुचित तरीके से पास करने वाले ग्वालियर जेल में बंद लगभग 70 चिकित्सा पाठ्यक्रम के छात्रों और जूनियर डाक्टरों ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को पत्र लिखकर गुहार लगायी है कि उन्हें इस मामले में जमानत पर जेल […]

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भोपाल : मध्यप्रदेश के कुख्यात व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) के जरिये प्रदेश में हुए प्री-मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) को अनुचित तरीके से पास करने वाले ग्वालियर जेल में बंद लगभग 70 चिकित्सा पाठ्यक्रम के छात्रों और जूनियर डाक्टरों ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को पत्र लिखकर गुहार लगायी है कि उन्हें इस मामले में जमानत पर जेल से रिहा किया जाये अथवा उन्हें खुदकुशी करने की इजाजत दी जाये.

एक छात्र के पालक एएस यादव और अन्य छात्रों के हस्ताक्षर वाले इस पत्र में राष्ट्रपति को लिखा गया है, हम सभी विचाराधीन आरोपी बहुत लम्बे समय से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं, जिसकी वजह से हम सभी छात्रों एवं डाक्टरों का भविष्य अंधकारमय हो गया है. इसके कारण हम लोग अत्यधिक मानसिक एवं सामाजिक प्रताडना का शिकार हो रहे हैं और हमारे मन में आत्महत्या करने जैसे नकारात्मक विचार उत्पन्न हो रहे हैं.

पत्र में लिखा गया है, हम लोगों में से अधिकतर युवा डॉक्टर शासकीय चिकित्सा सेवाओं में कार्यरत हैं और कई चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अध्यनरत हैं. काफी लम्बे समय से जेल में बंद होने के कारण हमारी पारिवारिक एवं आर्थिक स्थिति काफी दयनीय हो गयी है और हमारे परिवार भूखमरी के कगार पर हैं.
पत्र में आगे कहा गया है कि, न्यायिक प्रक्रिया में असमानता होने के कारण सभी युवा डॉक्टरों को सेन्ट्रल जेल ग्वालियर में काफी लम्बे समय से बंद रखा गया है, जबकि समान धाराओं एवं आरोपों में गिरफ्तार हुए हमारे समकक्ष आरोपियों को जबलपुर, भोपाल और अन्य स्थानों की न्यायपालिका के द्वारा कुछ ही दिनों में सत्र और उच्च न्यायालय से जमानत हासिल हो चुकी है.
पत्र में कहा गया है, व्यावसायिक परीक्षा मंडल के अधिकारियों और कर्मचारियों (प्रवेश समिति), काउंसलिंग कमेटी की अनिमितताओं को छुपाने एवं उन्हें बचाने के लिये लाचार और कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को इसमें आरोपी बनाकर उन्हें राजनीतिक कारणों से जमानत नहीं देकर, उनमें अपराधिक प्रवृत्ति पैदा करने की कोशिश की जा रही है.
पत्र के अंत में राष्ट्रपति से गुहार की गयी है, न्यायिक प्रक्रिया में समानता लाते हुए हमें जमानत की राहत दी जाये, जिससे हमारा अध्ययन एवं चिकित्सा सेवायें लम्बे समय के लिये प्रभावित न हों और हम पुन: समाज की मुख्य धारा में लौट सकें. आरोपी विद्यार्थियों द्वारा राष्ट्रपति को लिखे इस पत्र के प्रति प्रधानमंत्री कार्यालय, उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, मप्र उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और गृह मंत्रालय सहित मीडिया को भी भेजी गयी है.
ग्वालियर जेल के अधीक्षक दिनेश नारगवे ने बताया, राष्ट्रपति और अन्य को लिखा यह पत्र उन्होंने (छात्रों) मुझे नहीं सौंपा है. पिछले एक साल से ग्वालियर जेल में बंद एक विचाराधीन कैदी विशाल यादव से मैंने इस संबंध में पूछा तो उसने बताया, उन्होंने ऐसा पत्र लिखा है लेकिन उसे भेजा नहीं है और यह पत्र उनके वकील के पास है.
वकील विनय हासवानी ने ग्वालियर से फोन पर बताया कि जेल में बंद आरोपियों से न्यायालय में सुनवाई के दौरान मिलने पर पालकों द्वारा हासिल किया गया यह पत्र लेकर कुछ पालक मेरे पास आए और मुझे यह पत्र सौंपा. हासवानी ने बताया, कल मैंने यह पत्र राष्ट्रपति कार्यालय सहित अन्य स्थानों को भेज दिया है.
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