नयी दिल्ली : जापान के उत्तर-आधुनिक उपन्यासकार हारकी मुराकामी का नाम इस साल के नोबल साहित्य पुरस्कार की दौड़ में शामिल विद्वानों में सबसे उपर माना जा रहा है और भारत में भी उनके प्रशंसक हैं.ब्रिटिश वेबसाइट लैडब्रोक्स ने मुराकामी को नोबेल पुरस्कार का संभावित दावेदार बताया है. पिछले साल भी नोबेल पुरस्कार के लिए मुराकामी, रश्दी और महाश्वेता देवी के नाम पर अटकलें चल रहीं थीं लेकिन 12.5 लाख डॉलर का यह पुरस्कार अंतत: चीनी लेखक मो यान को प्रदान किया गया.
जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के जापानी अध्ययन केंद्र की प्रोफेसर अनिता खन्ना ने कहा, ‘‘युवा पीढ़ी मुराकामी की रचनाओं की बहुत प्रशंसक है. उनकी पुस्तकें आसानी से मिल भी जाती हैं. मसलन ‘काफका ऑन दा शोर’ और ‘नार्वेइयन वुड’ ऐसी पुस्तकें हैं जिनसे युवा आसानी से अपने को जोड़ लेते हैं.’’ मुराकामी ने अपनी रचनाओं में बीटल्स, जैज आदि अमेरिकी लोक संस्कृति के तत्वों का विस्तार से संदर्भ दिया है. 64 वर्षीय मुराकामी के संबंध में पुणे की कानून छात्रा अर्पिता देसाई ने कहा कि उन्हें मुराकामी का 2002 में आया उपन्यास ‘काफका’ संयोग से पढ़ने को मिला जो उन्हें बहुत पसंद आया.

