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सुषमा स्‍वराज-ललित मोदी मामला, कांग्रेस ने कहा, पीएम नरेंद्र मोदी की मर्जी से हुआ सब

Updated at : 15 Jun 2015 6:06 PM (IST)
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सुषमा स्‍वराज-ललित मोदी मामला, कांग्रेस ने कहा, पीएम नरेंद्र मोदी की मर्जी से हुआ सब

रणदीप सुरजेवाला ने ललित मोदी मामले में ना केवल सुषमा स्‍वराज पर हमला बोला, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह को भी आड़े हाथों लिया. सुरजेवाला ने कहा कि पूरा देश जानता है कि विदेश मंत्रालय प्रधानमंत्री के इशारे पर चलता है और सुषमा एक सहयोगी की तरह काम करती हैं. कांग्रेस […]

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रणदीप सुरजेवाला ने ललित मोदी मामले में ना केवल सुषमा स्‍वराज पर हमला बोला, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह को भी आड़े हाथों लिया. सुरजेवाला ने कहा कि पूरा देश जानता है कि विदेश मंत्रालय प्रधानमंत्री के इशारे पर चलता है और सुषमा एक सहयोगी की तरह काम करती हैं. कांग्रेस की ओर से सुरजेवाल ने एक तस्‍वीर जारी की जिसमें नरेंद्र मोदी को ललि‍त मोदी के साथ दिखाया गया है.

तस्‍वीर का हवाला देकर कांग्रेस ने कहा कि नरेंद्र मोदी की सहमती से सुषमा ने एक भगोड़े को देश से बाहर भेजनें में मदद की और देश के धन को विदेश में शिफ्ट कराने में भी सहयोग कर रही हैं. सुरजेवाला ने एक के बाद एक कई आरोप लगाये हैं. उन्‍होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के साथ जिसके भी संबंध रहते हैं सरकार उसके सभी कामों में सहयोग करती है. उन्‍होंने कांग्रेस की ओर से सुषमा के इस्‍तीफे की मांग की.

गौरतलब है कि ललित मामले में पूरा विपक्ष भाजपा और सरकार पर हमला कर रहा है. कांग्रेस तो जगह-जगह प्रदर्शन कर इस्‍तीफे की मांग कर रहा है और सुषमा स्‍वराज का पुतला भी जला रहा है. कांग्रेस के वरीष्‍ठ नेता व पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने ललित मोदी को यात्रा दस्तावेज दिलाने में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के मदद करने पर उठे विवाद के मद्देनजर इस विषय पर ब्रिटिश सरकार को लिखे गए पत्रों को आज सार्वजनिक करने की मांग की.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने ट्विट किया, ‘पारदर्शिता के लिए भारत सरकार को उन पत्रों को सार्वजनिक करना चाहिए जो ललित मोदी के मामले में ब्रिटेन के चांसलर को लिखे गए थे.’ दो साल पहले तत्कालीन वित्त मंत्री के रूप में चिदंबरम ने ब्रिटिश सरकार से पूछा था कि वह आइपीएल के पूर्व प्रमुख ललित मोदी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है जो लंदन में शरण लिये हुए हैं. ललित मोदी पर धन शोधन समेत कई तरह की वित्तीय अनियमितता के आरोप हैं.

चिदंबरम ने इस विषय को चासंलर आफ एक्सचेकर जार्ज ओसबोर्न के साथ 2013 में बैठक के दौरान उठाया था. वह चाहते थे कि मोदी को भारत वापस भेजा जाए क्योंकि मोदी का पासपोर्ट जब्त कर लिया गया था और ब्रिटेन की वीजा की अवधि समाप्त हो गई थी. कांग्रेस के अलावे अन्‍य विपक्षी दलों ने भी कहा कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज द्वारा घोटाला-दागी पूर्व आइपीएल प्रमुख ललित मोदी को मदद पहुंचाने के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्पष्टीकरण देना चाहिए.

इसके साथ ही उन्होंने मामले में सुषमा के इस्तीफे की भी मांग की. हालांकि सत्तारुढ भाजपा सुषमा के साथ खडी नजर आई, वहीं कांग्रेस ने इसके दोहरे मापदंडों की निन्दा की और कहा कि विवाद पर प्रधानमंत्री को राष्ट्र से माफी मांगनी चाहिए. कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा, ‘यह इसलिए हुआ है क्योंकि ललित मोदी भी एक ‘मोदी’ हैं. इसलिए, भारत सरकार उनकी मदद कर रही है. मैं इसकी कडी निन्दा करता हूं. मैं भाजपा के दोहरे मापदंडों की निन्दा करता हूं.

उन्होंने कहा, ‘इसके लिए सरकार संयुक्त रूप से जिम्मेदार है. स्वराज को तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए. क्योंकि सरकार भी, इसके लिए जिम्मेदार है, प्रधानमंत्री को राष्ट्र से माफी मांगनी चाहिए.’ माकपा ने बयान जारी कर सुषमा स्वराज द्वारा ललित मोदी की मदद को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया और मामले में जांच की मांग की. पार्टी महासचिव सीताराम येचुरी ने मांग की कि प्रधानमंत्री को संसद और देश को बताना चाहिए कि मामले का समाधान किस तरह होने जा रहा है. सबसे पहले, विदेश मंत्री के खिलाफ बहुत ही गंभीर आरोप लगे हैं. लेकिन प्रधानमंत्री चुप एवं शांत हैं.

येचुरी ने संवाददाताओं से कहा, ‘हम प्रधानमंत्री से पूछ रहे हैं हमें यह बताएं कि इसका समाधान किस तरह होने जा रहा है. इसलिए इस स्थिति में, प्रधानमंत्री, जिनका विशेषाधिकार है कि परिषद (मंत्रियों की) में किसे रखा जाए, को इसका उत्तर देना है.’ तृणमूल कांग्रेस नेता सौगत राय ने कहा कि सुषमा को मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए था और अब उन्हें मंत्री के रूप में कुछ अनुचित करने की बात स्वीकार करनी चाहिए.

भाजपा हालांकि सुषमा स्वराज का लगातार बचाव कर रही है. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सुषमा ने ललित मोदी की मदद मानवीय आधार पर की थी. उन्होंने कहा, ‘सुषमा स्वराज का जीवन पारदर्शिता और ईमानदारी से भरा है. उनकी ईमानदारी संदेह से परे है. उन्होंने जो कुछ किया, वह उन्होंने मानवीय आधार पर किया. यदि किसी ने नियम कानूनों का पालन करते हुए मदद की तो उसमें अपराध कहां है?’ जाने माने अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि एक मंत्री द्वारा पूर्व आईपीएल आयुक्त की मदद करना पूरी तरह गलत है.

उन्होंने इस तरह के मामलों से निपटने के लिए हितों के टकराव से संबंधित एक कडा कानून लाने की मांग की. भूषण ने कहा, इसके बजाय, भाजपा भ्रष्टाचार रोकथाम कानून को, यहां तक कि इससे आपराधिक कदाचार को हटाकर, कमजोर कर रही है. इससे पता चलता है कि नरेंद्र मोदी सरकार भ्रष्टाचार से लडने को कटिबद्ध नहीं है.’ उन्होंने कहा, ‘मेरे विचार से, उन्हें (सुषमा को) इस्तीफा दे देना चाहिए, लेकिन यह फैसला करना भाजपा के लोगों का काम है.’

विवाद की शुरुआत ई मेल्स के खुलासे से हुई जिनसे पता चला कि सुषमा ने पिछले साल जून में ललित मोदी को पुर्तगाल यात्रा के लिए यात्रा दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए भारतीय मूल के ब्रिटिश सांसद कीथ वाज और यहां इसके उच्चायुक्त जेम्स बीवन से बात की थी जिससे कि ललित मोदी अपनी पत्नी के कथित कैंसर उपचार के लिए पुर्तगाल जा सकें. भारत में वांछित ललित मोदी ने 2009 में दक्षिण अफ्रीका में हुए टी-20 क्रिकेट टूर्नामेंट में विदेशी विनिमय कानून के कथित उल्लंघन में जांच से बचने के लिए 2010 से लंदन को अपना घर बना लिया है. पूर्व संप्रग सरकार ने उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया था और उनके प्रत्यर्पण के लिए जोर दिया था.

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