भाजपा की ओर से पेश तीन तरफा चुनौतियों से लडें : सीताराम येचुरी

नयी दिल्ली : माकपा ने आज कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान तेज हो रहे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और निरंकुश शासन की ओर बढने जैसी प्रवृत्तियां चुनौती पेश कर रही हैं, जिससे लडा जाना चाहिए. माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने मोदी सरकार पर कई मुद्दों से पीछे हटने का आरोप लगाया, जिसका उसने संप्रग […]
नयी दिल्ली : माकपा ने आज कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान तेज हो रहे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और निरंकुश शासन की ओर बढने जैसी प्रवृत्तियां चुनौती पेश कर रही हैं, जिससे लडा जाना चाहिए. माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने मोदी सरकार पर कई मुद्दों से पीछे हटने का आरोप लगाया, जिसका उसने संप्रग सरकार के शासनकाल के दौरान विरोध किया था यथा मल्टी ब्रांड खुदरा कारोबार में एफडीआइ का मुद्दा.
येचुरी ने राजग सरकार के इस महीने के उत्तरार्द्ध में एक साल पूरे होने से पहले उसपर निशाना साधा है. येचुरी ने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा अपनाई जा रही नव उदारवादी आर्थिक नीति, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की ‘त्रिमूर्ति’ को ‘त्रिशूल’ नहीं बनने दिया जाना चाहिए. येचुरी ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘हमारे सामने चुनौती इस त्रिमूर्ति को त्रिशूल में बदलने से रोकना है, जो लोगों के हितों को नुकसान पहुंचाएगी.’
इस प्रवृत्ति को कैसे रोका जा सकता है, इसपर उन्होंने कहा, ‘हमारी अन्य वाम दलों के साथ बातचीत चल रही है. वहीं किसान सभा और ट्रेड यूनियन इन मुद्दों पर आंदोलन करने के लिए स्वतंत्र रूप से कार्य कर रहे हैं.’ दो दिवसीय पोलित ब्यूरो की बैठक में हुई चर्चा के बारे में संवाददाताओं को जानकारी देते हुए येचुरी ने कहा कि हाल में पार्टी कांग्रेस ने भाजपा सरकार द्वारा अपनाई जा रही तीन प्रवृत्तियों पर गौर किया.
ये हैं नव उदारवादी आर्थिक सुधारों पर आक्रामक तरीके से आगे बढना, सांप्रदायिक धु्रवीकरण को तेज करके देश के धर्मनिरपेक्ष-लोकतांत्रिक ढांचों पर निरंतर हमला और लोकतांत्रिक संस्थाओं का क्षरण करके निरंकुश शासन की ओर बढना. येचुरी ने कहा कि ये प्रवृत्तियां बढ रही हैं. उन्होंने कहा कि एकजुट विपक्ष संसद में भाजपा की योजनाओं को रोकने में सक्षम है.
येचुरी ने कहा कि भाजपा सरकार कई मुद्दों पर पीछे हट रही है जिसका उसने संप्रग सरकार के शासनकाल के दौरान विरोध किया था जैसे खुदरा कारोबार में एफडीआइ. भूमि अधिग्रहण मामले पर उसका पीछे हटना भी अहम मामला है. उन्होंने कहा कि यह तो राज्यसभा में सिर्फ एकजुट विपक्ष की वजह से सरकार इस विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति को भेजने पर मजबूर हुई.
उन्होंने कहा, ‘जिस तरीके से मोदी सरकार संसदीय लोकतंत्र को कमजोर कर रही है वह अप्रत्याशित है. इसने एक साल के अपने कार्यकाल के दौरान लोकसभा में बिना संसदीय जांच के तकरीबन 50 कानून (90 फीसदी से अधिक) पारित किए हैं.’ येचुरी ने कहा, ‘विपक्षी पार्टियों की संयुक्त ताकत की वजह से ही वह सात विधेयकों को जिसे उसने बहुमत की निरंकुशता का इस्तेमाल करके लोकसभा में पारित किया था, उसे राज्यसभा में प्रवर समिति को भेजने पर मजबूर हुई.’
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