Rajasthan: जयपुर बम ब्लास्ट के 4 आरोपी बरी, ट्रायल कोर्ट के फांसी की सजा को HC ने पलटा, 71 लोगों की गई थी जान

राजस्थान हाईकोर्ट ने साल 2008 में जयपुर के विभिन्न इलाकों में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में निचली अदालत का फैसला पलटते हुए चार आरोपियों को बुधवार को बरी कर दिया है. कोर्ट ने एटीएस की जांच को लेकर फटकार भी लगाई है.
राजस्थान हाई कोर्ट ने साल 2008 में जयपुर के विभिन्न इलाकों में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में निचली अदालत का फैसला पलटते हुए चार आरोपियों को बुधवार को बरी कर दिया है, आपको बाताएं कि, विशेष अदालत ने इन चार आरोपियों को 2019 में फांसी की सजा सुनाई थी.
इसके साथ ही हाई कोर्ट ने साक्ष्यों की कड़ियां जोड़ने में ‘कमजोर’ जांच के लिए भी जांच एजेंसी को फटकार लगाई है, बचाव पक्ष के वकील एसएस अली ने बताया कि अदालत ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को ऐसी जांच के लिए आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया है. उल्लेखनीय है कि राजस्थान की राजधानी जयपुर में 13 मई 2008 को सिलसिलेवार हुए आठ बम धमाकों में कम से कम 71 लोगों की मौत हुई थी और 180 से अधिक घायल हुए थे.
वहीं राजस्थान में मुख्य विपक्षी दल बीजेपी ने एटीएस की जांच को लेकर अशोक गहलोत सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस फैसले से राज्य द्वारा की गई पैरवी पर संदेह पैदा होता है. भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि इतने बड़े अपराध में आरोपियों का बरी होना प्रदेश की अभियोजन पक्ष पर संदेह पैदा करता. पूनियां ने ट्वीट किया,‘‘ जयपुर बम ब्लास्ट मामले पर में आरोपियों का बरी होना गहलोत सरकार की पैरवी पर शंका पैदा करता है ; राज्य सरकार की न्यायिक पैरवी की लापरवाही संदेह पैदा करती है, यह कांग्रेस सरकार की तुष्टिकरण की पराकाष्ठा है.’’
इधर, बचाव पक्ष के वकील एसएस अली ने कहा कि अदालत ने मामले की जांच करने वाले आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) द्वारा प्रस्तुत पूरे आधार को गलत पाया. उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय ने राजस्थान के पुलिस महानिदेशक को इस तरह की जांच के लिए एटीएस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. मुख्य सचिव को मामले पर नजर रखने के निर्देश भी दिए गए हैं. उन्होंने बताया,‘‘एटीएस आरोपियों की यात्रा योजना को साबित करने में विफल रही कि उन्होंने 13 मई को एक बस में दिल्ली से जयपुर की यात्रा की थी, एक ढाबे में खाना खाया, साइकिल खरीदीं, बम रखे और उसी दिन शताब्दी एक्सप्रेस में दिल्ली लौट आए. एटीएस बस के टिकट नहीं दिखा सकी.’
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By Abhishek Anand
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