बोले मोदी, भारत-चीन हजारों साल के अपने रिश्तों की डोर को और मजबूत करें

Published at :02 Feb 2015 7:37 PM (IST)
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बोले मोदी, भारत-चीन हजारों साल के अपने रिश्तों की डोर को  और मजबूत करें

नयी दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि भारत और चीन के रिश्तों की डोर हजारों साल से हमें अटूट बंधन में बांधे हुए है और दोनों को चाहिए कि हम एक-दूसरे को और बेहतर ढंग से समझें.मोदी ने चीन की राजधानी बीजिंग में आयोजित ‘विजिट इंडिया इयर 2015’ कार्यक्रम के अवसर पर यहां […]

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नयी दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि भारत और चीन के रिश्तों की डोर हजारों साल से हमें अटूट बंधन में बांधे हुए है और दोनों को चाहिए कि हम एक-दूसरे को और बेहतर ढंग से समझें.मोदी ने चीन की राजधानी बीजिंग में आयोजित ‘विजिट इंडिया इयर 2015’ कार्यक्रम के अवसर पर यहां से वीडियो संदेश में कहा, ‘‘भारत और चीन के रिश्तों की डोर कुछ ऐसी है, जो हजारों वषो’ से हमें अटूट बंधन में बांधे हुए है. हम दोनों की विरासत प्राचीन सभ्यता हैं, जिनके बीच गहरे संबंध भी हैं.’’ इन दिनों विदेश मंत्री सुषमा स्वराज चीन की यात्रा पर हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ हमारी पुरातन सभ्यताओं ने दुनिया को बहुत कुछ दिया है. आने वाली सदी एशिया की होगी. इस सदी में हमें एक बार फिर दुनिया को बहुत कुछ देना है, बहुत कुछ बताना है. इसके लिए जरुरी है कि हम एक-दूसरे को देखें, जानें, और समङों और यह तब होगा जब हम, एक-दूसरे के यहां और बडी संख्या में आए-जाएं ..जनता के बीच आदान प्रदान बढाएं.’’

इस साल मई में प्रधानमंत्री के रुप में चीन जा रहे मोदी ने कहा कि वह पहले भी चीन की यात्रा कर चुके हैं और उनका अनुभव बहुत ही अच्छा रहा. उन्होंने कहा कि किताबों में चीन के बारे में बहुत कुछ पढा था, लेकिन चीन जाकर जो अनुभव मैंने पाया, वो अद्वितीय था. जब भी मैं चीन गया, मेरे मन में हमेशा एक कसक रह जाती थी कि काश मेरे पास ज्यादा समय होता तो मैं चीन के हर क्षेत्र में जाता, हर इलाके में जाता, अधिकतम लोगों से मिलता, बहुत कुछ देखता.

उन्होंने कहा कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनफिंग की भारत यात्रा के समय हमने फैसला किया था कि 2015 में चीन में ‘विजिट इंडिया इयर’ होगा और 2016 में ‘विजिट चाइना इयर’ होगा.प्रधानमंत्री ने चीन के लोगों को भारत आने का न्यौता देते हुए कहा इस साल आप भारत आइए, और शुआन जांग तथा फाहिआन के कदमों पर चलने का अनुभव कीजिए. बोध गया, सारनाथ और कुशीनगर जैसे अनगिनत स्थान हैं, आप इतिहास के पन्ने पलटिए.

उन्होंने कहा, ‘‘ इसके अलावा ‘योग की जन्मभूमि भारत में गंगा नदी के किनारे कुछ आसन लगाइए, भारत की संस्कृति, विविधता और सौन्दर्य का अनुभव कीजिए. अतिथि देवो भव:, यानी भारत में अतिथि भगवान का रुप माना जाता है.’’ मोदी ने कहा, चीन के साथ मेरा निजी रुप से भी एक विशेष नाता है और मैं उसे बहुत गहरा रिश्ता समङता हूं. मेरा जन्म जहां हुआ, वो गुजरात प्रदेश का एक छोटा सा गांव वडनगर वो वह स्थान है जहां चीन के प्रसिद्द यात्री, शुआन जांग जब भारत आये थे, तो मेरे गांव भी आये थे. और कहते हैं कि बहुत लम्बे अरसे तक वो मेरे गांव में रहे थे. और वे भारत से वापस जाकर चीन में शुआन जांग शिआन क्षेत्र गए थे, और जब मुङो इस बात की जानकारी हुयी तो मुझे बडा आनंद हुआ कि वो राष्ट्रपति शी जिनपिंग का क्षेत्र है. इसे भी मैं एक बडा विशेष प्रकार का संकेत समझता हूं.

उन्होंने कहा, ये सब सिर्फ इतिहास की बातें नहीं हैं. वर्तमान में भी हम उसी अटूट डोर से बंधे हैं.प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर सभी चीनवासियों को उनके नव वर्ष की शुभकामनाएं दीं.

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