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नरेंद्र मोदी ने कहा, ''बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ'' अभियान, बेटी बनेगी बुढ़ापे का सहारा

Updated at : 22 Jan 2015 3:39 PM (IST)
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नरेंद्र मोदी ने कहा, ''बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ'' अभियान, बेटी बनेगी बुढ़ापे का सहारा

नयी दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज हरियाणा के पानीपत से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत की. योजना को 100 जिलों में लागू किया जायेगा. इस मौके पर इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत, हरियाणा के राज्यपाल और मुख्यमंत्री, केंद्रीय बाल विकास मंत्री मेनका गांधी, स्मृति ईरानी, रविशंकर प्रसाद समेत कई लोग […]

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नयी दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज हरियाणा के पानीपत से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत की. योजना को 100 जिलों में लागू किया जायेगा. इस मौके पर इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत, हरियाणा के राज्यपाल और मुख्यमंत्री, केंद्रीय बाल विकास मंत्री मेनका गांधी, स्मृति ईरानी, रविशंकर प्रसाद समेत कई लोग मौजूद थे ब्रॉड एबेंसडर के रूप में माधुरी दीक्षित को चुना गया है. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरूआत करते हुए प्रधानमंत्री पांच बच्चों को खाते भेंट किये उन्होंने इस मौके पर कहा, यह अवसर पिछली सरकार ने क्या किया क्या नहीं किया गलती किसकी थी इस तरह के विचार करने का नहीं है.

पानीपत की धरती पर इस कार्यक्रम का आयोजन जिम्मेदारियों का अहसास कराने के लिए किया गया है. यहां हर किसी की सामूहिक जिम्मेदारी है. हम जबतक एक समाज के रूप में समस्या के प्रति संवेदनशील नहीं होंगे तो अपना सिर्फ नुकसान नहीं करेंगे कई पीढ़ियों का नुकसान करेंगे. यह कार्यक्रम भले ही पानीपत की धरती पर हो रहा है यह संदेश हर गांव हर राज्य के लिए है. अगर बेटी पैदा नहीं होगी तो बहु कहां से लाओगे. हमारी सोच में यह दोगलापन कब तक चलेगा कि बेटी को हम नहीं पढ़ायेंगे लेकिन बहु हमें पढ़ी लिखी चाहिए. मैं आपके बीच बहुत बड़ी पीड़ा लेकर आया हूं कि कैसे एक मां के पेट में मार दिया जाता है. हम 21वीं सदी के लोग हैं यह कहलाने के लायक नहीं है हमारी सोच आज भी 18वीं सदी के जैसी है. अगर घर में खाना बना हो और मां ऊपर से बच्चों को घी दे रही हो तो बेटे को दो चम्मच और बेटी को एक चम्मच देती है. यह सोच सिर्फ हरियाणा की नहीं है पूरे देश की है. अगर बेटे बुढापे में काम आते तो इतने वृद्धा आश्रम नहीं खुले होते. ऐसी सैकड़ों बेटियां है जो मां बाप की सेवा करने के लिए अपने सपने चूर कर देते हैं. पूरा विश्व कल्पना चावला पर गर्व करता है. उसी हरियाणा में मां के पेट में पल रही कल्पना चावला को मारकर हम दुनिया को क्या मूंह दिखायेंगे. अगर अवसर मिला तो बेटे से ज्यादा बेटियां कमाल कर के दिखाती है. रिजल्ट देख लिजिए बेटियां कमाल कर रही है. शिक्षक देख लिजिए महिलाओं की संख्या ज्यादा है.
कार्यक्रम प्रधानमंत्री की सोच का नतीजा :मेनका गांधी
केंद्रीय बाल विकास मेंत्री मेनका गांधी ने भी इस मौके पर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम पर प्रकाश डालते हुए सभी से कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सहयोग मांगा उन्होंने कहा कि आज महिलाओं का अस्तित्व खतरे में है. 1000 लड़को में सिर्फ 914 लड़कियां है कहीं कहीं तो यह आकड़ा 800 से भी कम है. मेनका गांधी ने प्रधानमंत्री का धन्यावाद देते हुए कहा कि मुझे खुशी है कि इन्होंने इस तरफ ध्यान दिया और हरियाणा से इसकी शुरूआत करने का मन बनाया. आज अगर हम इस जनसभा में खड़े हैं तो यह प्रधानमंत्री की पहल का नतीजा है. हरियाणा के कई गांवों में कई सालों से लड़कियों का जन्म नहीं हुआ. सोचिये लड़कियां आज कहां नाम रौशन नहीं कर रही फौज, पुलिस, सरकार, आईटी सभी जगह महिलाएं नाम रौशन कर रही है. कल्पना चावला भी हरियाणा से थी उन्होंने पूरी दुनिया में भारत का नाम रौशन किया.
बेटी नहीं होगी तो बहु कहां से लायेंगे :माधुरी दीक्षित
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की ब्रॉड एबेंसडर माधुरी दीक्षित ने कहा आज हम मंगल ग्रह तक पहुंच गये हैं लेकिन आज भी लोगों की सोच पूरानी है बच्चियों को आज भी कुछ लोग बोझ मानते हैं घर, परिवार, समाज या देश तभी विकास करेगा जब महिलाओं का भी विकास होगा. सबसे पहले बच्चा अगर किसी से सीखता है तो वह मां है. अगर मां शीक्षित होगी तो बच्चा भी शिक्षा के साथ अपनी पहली शुरूआत करेगा. अगर घरों में बेटियां नहीं होगी तो आप अपने बच्चों की शादी किस से करेंगे. माधुरी ने कहा, हम भी तीन बहनें है हमारे मां बाप ने हमारे साथ कोई भेदभाव नहीं किया. मुझे एक मां, बेटी, बहन और पत्नी के नजरिये से इस कार्यक्रम से बहुत उम्मीद है.
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