विकास और सुशासन की अलग-अलग परिभाषा बनाये : सुषमा
Updated at : 04 Jan 2015 9:10 PM (IST)
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फरीदाबादः केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने प्रदेश के भाजपा विधायकों से आह्वान किया है कि वे विकास और सुशासन की अलग-अलग परिभाषा रखते हुए कार्य करें. विकास की जड में भ्रष्टाचार होगा तो सुशासन के मायने खत्म हो जाएंगे. सुषमा ने कहा भाजपा की प्रदेश सरकार ने भी मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में […]
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फरीदाबादः केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने प्रदेश के भाजपा विधायकों से आह्वान किया है कि वे विकास और सुशासन की अलग-अलग परिभाषा रखते हुए कार्य करें. विकास की जड में भ्रष्टाचार होगा तो सुशासन के मायने खत्म हो जाएंगे.
सुषमा ने कहा भाजपा की प्रदेश सरकार ने भी मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में विकास के साथ सुशासन की परिकल्पना की है. केंद्रीय विदेश मंत्री रविवार को सूरजकुंड में भाजपा के तीन दिवसीय नवनिर्वाचित प्रशिक्षण शिविर के समापन सत्र में भाजपा के विधायकों को संबोधित कर रही थी.
उन्होंने कहा, ‘‘मेरी राजनीतिक यात्रा ा भी हरियाणा से 1977 में बतौर विधायक शुरु हुई थी. उस समय इस तरह के प्रशिक्षण शिविर नहीं लगते थे, जो कुछ सीखा वह अनुभव से ही सीखा है.’’ उन्होंने कहा कि प्रदेश में भाजपा के 4 से 47 विधायक बने हैं, ये प्रदेश के लोगों की उम्मीद का वोट है. प्रदेश के लोगों की उम्मीद है कि भाजपा राज्य में साफ-सुथरा शासन देगी. पार्टी के सभी विधायक इस पर खरा उतरें.
उन्होंने कहा कि आम आदमी के लिए शासन मददगार साबित होगा तो ही सुशासन आएगा. विधायक इस लक्ष्य को लेकर चले तो ही पार्टी को प्रदेश की जनता में विशिष्ट पहचान मिलेगी. केंद्रीय मंत्री ने विधायकों से कहा कि वे रोजमर्रा के विकास कार्यों के साथ अपने-अपने क्षेत्र में एक ऐसा उल्लेखनीय काम भी कराएं जिसे संबंधित क्षेत्र के लोग हमेशा याद करें.
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