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योजना आयोग का स्थान नीति आयोग ने लिया, प्रधानमंत्री मोदी होंगे अध्यक्ष

Updated at : 01 Jan 2015 8:51 PM (IST)
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योजना आयोग का स्थान नीति आयोग ने लिया, प्रधानमंत्री मोदी होंगे अध्यक्ष

नयी दिल्ली: देश में 65 साल पुराना योजना आयोग गुरुवार को इतिहास बन गया और उसकी जगह नई संस्था नीति आयोग ने ले ली. इसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी होंगे और राज्यों की भागीदारी के साथ राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताएं तैयार करने के लिये संस्था की संचालन परिषद में सभी मुख्यमंत्री शामिल होंगे. नीति आयोग […]

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नयी दिल्ली: देश में 65 साल पुराना योजना आयोग गुरुवार को इतिहास बन गया और उसकी जगह नई संस्था नीति आयोग ने ले ली. इसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी होंगे और राज्यों की भागीदारी के साथ राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताएं तैयार करने के लिये संस्था की संचालन परिषद में सभी मुख्यमंत्री शामिल होंगे.

नीति आयोग (राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान) की संचालन परिषद में सभी मुख्यमंत्रियों तथा उप-राज्यपालों को शामिल करना पिछले निकाय से इसे अलग बनाता है. प्रधानमंत्री मोदी ने इसे ऐतिहासिक बदलाव बताया जो सहयोगपूर्ण संघवाद की भावना को आगे बढाएगा.

इस संस्था में एक उपाध्यक्ष तथा एक मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) होगा. साथ ही पांच पूर्णकालिक सदस्य और दो अंशकालिक सदस्य होंगे जबकि चार केंद्रीय मंत्री इसके पदेन सदस्य होंगे.

देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नहेरु द्वारा स्थापित योजना आयोग एक इतिहास बन गया. छह दशकों से भी अधिक के अपने कार्यकाल में योजना आयोग ने 12 पंचवर्षीय योजनायें और छह वार्षिक योजनायें तैयार की और उनके क्रियान्वयन के लिये 200 लाख करोड रुपये से अधिक का आवंटन किया.

सरकार ने आज इस 65 वर्ष पुरानी संस्था पर पर्दा गिराते हुये इसके स्थान पर नई संस्था ‘नीति आयोग’ यानी ‘राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान – एनआईटीआई’ की घोषणा की है.योजना आयोग के नाम से जाने जाने वाले आयोग को 15 मार्च 1950 को सामान्य सरकारी प्रस्ताव के जरिये स्थापित किया गया था. आयोग ने इस दौरान राजनीतिक स्तर पर कई उतार चढाव देखे.
संयोग से नई संस्था का गठन भी मंत्रिमंडल के प्रस्ताव के जरिये ही स्थापित की गई है जिसमें महात्मा गांधी, बी.आर. अंबेडकर, स्वामी विवेकानंद और दीन दयाल उपाध्याय जैसे नेताओं के विचारों के उल्लेख किये गए हैं.वर्ष 2014 राजनीतिक और आर्थिक बदलाव का वर्ष साबित हुआ जिसमें सरकार के बदलाव के लिये निर्णायक जनादेश मिला. यह जनादेश योजना आयोग की समाप्ति का कारण बन गया.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2014 को लालकिले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र के नाम अपने पहले संबोधन में योजना आयोग के स्थान पर नई संस्था बनाने की घोषणा की थी.नये संस्थान का कार्यालय संसद भवन से कुछ कदम की दूरी पर स्थित पुराने योजना आयोग के मुख्यालय भवन में ही होगा.
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