सरकार गठन पर पीडीपी ने अपने विधायकों के साथ विचार विमर्श किया शुरू

Updated at : 28 Dec 2014 8:07 PM (IST)
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सरकार गठन पर पीडीपी ने अपने विधायकों के साथ विचार विमर्श किया शुरू

श्रीनगर : जम्मू कश्मीर की खंडित जनादेश वाली विधानसभा में पीडीपी ने सारे विकल्पों को खुले रखते हुए राज्य में नयी सरकार के गठन के लिए अपने नवनिर्वाचित विधायकों के साथ आज विचार विमर्श शुरू किया. भाजपा या कांग्रेस से हाथ मिलाने के संवेदनशील मुद्दे पर आमराय बनाने की कोशिश के तहत यह कदम उठाया […]

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श्रीनगर : जम्मू कश्मीर की खंडित जनादेश वाली विधानसभा में पीडीपी ने सारे विकल्पों को खुले रखते हुए राज्य में नयी सरकार के गठन के लिए अपने नवनिर्वाचित विधायकों के साथ आज विचार विमर्श शुरू किया. भाजपा या कांग्रेस से हाथ मिलाने के संवेदनशील मुद्दे पर आमराय बनाने की कोशिश के तहत यह कदम उठाया गया है.

पीडीपी के मुख्य प्रवक्ता नईम अख्तर ने भाजपा के साथ गठजोड सहित सभी विकल्पों के खुले होने का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार गठन के लिए एक गठजोड बनाने की विभिन्न संभावनाओं पर चर्चा के लिए पार्टी के नव निर्वाचित विधायकों के साथ एक अनौपचारिक बातचीत हुई है.

उन्होंने बताया, ‘पार्टी नेतृत्व के राज्यपाल से मिलने से पहले पार्टी में आमराय बनाने की प्रक्रिया में हम जुटे हुए हैं.’ राज्यपाल एनएन वोहरा द्वारा पीडीपी और भाजपा के लिए सरकार गठन के प्रस्तावों के साथ आने के लिए एक जनवरी की समय सीमा तय किए जाने के मद्देनजर आमराय बनाने के लिए यह कवायद शुरू की गई है.

87 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी के 28 विधायक हैं जबकि भाजपा के 25 विधायक हैं. राज्य में पहली बार सत्ता में आने के लिए पुरजोर कोशिश कर रही भाजपा एक नयी सरकार के गठन के लिए पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस, दोनों ही पार्टियों के संपर्क में हैं. नेकां के 15 विधायक हैं.

भाजपा के साथ साझेदारी करने के नफा नुकसान पर पीडीपी के अंदर बहस तेज हो गई है और पार्टी के अंदर एक धडा इस विचार पर हिचकिचा रहा है. हालांकि, पीडीपी में एक अन्य विचार यह है कि भाजपा के साथ जाना राज्य के लिए फायदेमंद होगा जिसे केंद्र से भारी मात्रा में वित्तीय सहायता की जरुरत है जहां भगवा पार्टी सत्ता में है.

वहीं, दूसरी ओर पीडीपी के पास कांग्रेस और अपने चिर प्रतिद्वंद्वी नेकां से समर्थन के प्रस्ताव हैं. ये दोनों ही पार्टियां सत्ता से भाजपा को दूर रखना चाहती हैं. कांग्रेस के 12 विधायक हैं. पीडीपी और कांग्रेस ने पहले भी राज्य में शासन किया है लेकिन सरकार गठन में पीडीपी के समर्थन की नेकां के समर्थन की आश्चर्यजनक पेशकश ने सत्ता की दावेदारी में एक नया आयाम खोल दिया है.

पीडीपी के दुविधाग्रस्त होने के मद्देनजर पार्टी संस्थापक मुफ्ती मोहम्मद सईद ने 23 दिसंबर को चुनाव नतीजे आने के बाद से सरकार गठन पर सार्वजनिक रूप से एक शब्द भी नहीं बोला है. सईद मेडिकल जांच के लिए गुपकर रोड स्थित अपने आवास से इस हफ्ते पहली बार आज बाहर निकले.

अख्तर ने बताया,’उन्होंने (सईद) कुछ समय पहले अपनी आंख की सर्जरी कराई थी और इसके बाद जांच कराने के लिए गए थे.’ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कांग्रेस ने पीडीपी का समर्थन किया है और नेकां ने भी उसका समर्थन किया है.

उन्होंने बताया, ‘अब पीडीपी को फैसला करना है कि क्या यह भाजपा के साथ जाना चाहती है या फिर कांग्रेस या नेकां या निर्दलीय विधायकों के साथ.’ गौरतलब है कि पीडीपी ने कल भाजपा के लिए सख्त शर्तें रखीं. दरअसल, भाजपा राज्य में नयी सरकार के गठन के लिए उसे रिझा रही है.

पीडीपी ने घोषणा की कि संविधान के अनुच्छेद 370 (जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा) को खत्म करने के खिलाफ पार्टी के रुख पर कोई बातचीत नहीं हो सकती. वोहरा ने शुक्रवार को पीडीपी और भाजपा को अलग अलग पत्र भेजकर उनके नेताओं को सरकार गठन पर चर्चा के लिए एक जनवरी से पहले आने का न्योता दिया है. इनमें पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष जुगल किशोर शर्मा शामिल हैं.

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