चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूरे, डरबन में 17 हजार श्रद्धालुओं ने किया हनुमान चालीसा पाठ

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कार्यक्रम में उपस्थित स्वामी अभेदानंद, अनूप जलोटा, गायिका अनुजा सहाय और अन्य.

कार्यक्रम में उपस्थित स्वामी अभेदानंद, अनूप जलोटा, गायिका अनुजा सहाय और अन्य.

दक्षिण अफ्रीका के डरबन में चिन्मय मिशन ने 75वीं वर्षगांठ पर 'मैन टू हनुमान' कार्यक्रम आयोजित किया. 17,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने 27 बार हनुमान चालीसा का पाठ कर एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक समागम का अनुभव किया.

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Hanuman Chalisa: दक्षिण अफ्रीका के डरबन स्थित चैट्सवर्थ स्टेडियम ने उस समय एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक क्षण का साक्षी बना, जब चिन्मय मिशन ने अपनी स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित 'चिन्मय अमृत महोत्सव' के अंतर्गत भव्य "मैन टू हनुमान" कार्यक्रम का आयोजन किया। इस विशाल आयोजन में 17,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने एक साथ 27 बार सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया। इस प्रकार कुल 4 लाख से अधिक सामूहिक पाठ पूरे हुए.

आयोजन का क्या है संदेश

इसे भारत के बाहर सनातन धर्म के सबसे बड़े सार्वजनिक आध्यात्मिक आयोजनों में से एक माना जा रहा है. स्टेडियम पूरी तरह केसरिया रंग, भक्ति, उत्साह और सांस्कृतिक एकता के वातावरण में रंग गया. हजारों श्रद्धालु हाथों में केसरिया ध्वज और भगवान हनुमान के चित्र लिए भक्ति में लीन दिखाई दिए. यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा, सामाजिक एकता और सेवा भाव का विराट प्रदर्शन भी बना. आयोजकों के अनुसार, इसका उद्देश्य व्यक्ति के आंतरिक परिवर्तन के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का संदेश देना था.

भक्ति और सांस्कृतिक गौरव का बना ऐतिहासिक उत्सव

"मैन टू हनुमान" कार्यक्रम ने डरबन के चैट्सवर्थ स्टेडियम को भक्ति के महासागर में बदल दिया। हजारों श्रद्धालु एक स्वर में जब हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे तो पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा. केसरिया ध्वजों की लहराती कतारें, भगवान हनुमान के जयकारे और सामूहिक मंत्रोच्चार ने ऐसा दृश्य प्रस्तुत किया जिसे उपस्थित लोगों ने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया. चिन्मय मिशन साउथ अफ्रीका ने इस आयोजन के माध्यम से न केवल अपने 75 वर्षों की आध्यात्मिक यात्रा का उत्सव मनाया, बल्कि अफ्रीका में सनातन धर्म की मजबूत उपस्थिति का भी प्रभावशाली संदेश दिया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भेजा विशेष शुभकामना संदेश

कार्यक्रम के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष शुभकामना संदेश भेजते हुए चिन्मय मिशन के 75 वर्षों की आध्यात्मिक सेवा की सराहना की. उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका में आयोजित यह अमृत महोत्सव भारतीय आध्यात्मिक विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण का शानदार उदाहरण है. "चंट डरबन, शांत डरबन" विषय सामूहिक भक्ति के माध्यम से सामाजिक सद्भाव स्थापित करने की प्रेरणा देता है. प्रधानमंत्री ने कहा कि हजारों श्रद्धालुओं द्वारा एक साथ हनुमान चालीसा का पाठ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामूहिक आध्यात्मिक साधना है, जो यह विश्वास मजबूत करती है कि व्यक्तिगत परिवर्तन से विश्व में शांति और करुणा स्थापित की जा सकती है. उन्होंने भारतीय प्रवासी समुदाय की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. साथ ही भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने में भी प्रवासी भारतीयों की भूमिका उल्लेखनीय रही है.

80 से अधिक बसों में पहुंचे हजारों श्रद्धालु

कार्यक्रम में शामिल होने के लिए क्वाज़ुलु-नताल और आसपास के विभिन्न प्रांतों से हजारों श्रद्धालु पहुंचे. आयोजकों ने उनके आवागमन के लिए 80 से अधिक विशेष बसों की व्यवस्था की थी. इसके अलावा, बड़ी संख्या में श्रद्धालु निजी वाहनों से भी कार्यक्रम स्थल पहुंचे. कई लोगों ने इस आयोजन को अपने जीवन का सबसे बड़ा आध्यात्मिक अनुभव बताया. दूर-दराज के इलाकों से पहुंचे परिवार सुबह से ही स्टेडियम में पहुंचकर सामूहिक पाठ का हिस्सा बने.

अनूप जलोटा और अनुजा सहाय का भक्ति संगीत

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण पद्मश्री भजन सम्राट अनूप जलोटा और प्रसिद्ध सिंगर-अभिनेत्री अनुजा सहाय की प्रस्तुति रही. दोनों कलाकारों के नेतृत्व में हजारों श्रद्धालुओं ने एक स्वर में हनुमान चालीसा का गायन किया. पूरे स्टेडियम में तालियों, जयकारों और भक्ति गीतों की गूंज सुनाई देती रही. अनूप जलोटा के भावपूर्ण गायन ने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, जबकि अनुजा सहाय के मधुर स्वर ने पूरे वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया.

सभा को संबोधित करते हुए अनूप जलोटा ने चिन्मय मिशन की 75 वर्षों की वैश्विक सेवा को श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने कहा कि 2026 में दक्षिण अफ्रीका में स्वामी अभेदानंद की आध्यात्मिक सेवा के 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं और उन्होंने भारतीय संस्कृति को नई पीढ़ियों तक पहुंचाने में ऐतिहासिक योगदान दिया है. उन्होंने स्वामी अभेदानंद को अफ्रीका में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले भारतीय हिंदू संतों में से एक बताते हुए उनके कार्यों की सराहना की.

स्वामी अभेदानंद का संदेश, 'मैं एक गर्वित हिंदू हूं'

कार्यक्रम के दौरान स्वामी अभेदानंद सरस्वती का संबोधन पूरे आयोजन का सबसे भावनात्मक क्षण साबित हुआ. उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से अपनी आध्यात्मिक पहचान को गर्व के साथ स्वीकार करने का आह्वान किया. उनके आह्वान पर पूरा स्टेडियम तीन बार "मैं एक गर्वित हिंदू हूं" के उद्घोष से गूंज उठा. स्वामी अभेदानंद ने स्पष्ट किया कि यह गर्व किसी विभाजन या श्रेष्ठता का प्रतीक नहीं, बल्कि अपनी आध्यात्मिक विरासत को आत्मविश्वास के साथ स्वीकार करने और मानवता की सेवा के लिए समर्पित रहने का संदेश है. उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को भाषा, जाति, क्षेत्र और परंपराओं के मतभेदों से ऊपर उठकर एकता के साथ आगे बढ़ना चाहिए.

आस्था के चरम पर पहुंचा पूरा स्टेडियम

हनुमान चालीसा के अंतिम पाठ के दौरान पूरा स्टेडियम अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहा था. हजारों श्रद्धालु भगवान हनुमान के चित्र और "मैं एक गर्वित हिंदू हूं" लिखे केसरिया ध्वज हाथों में लिए खड़े थे. जब स्वामी अभेदानंद ने स्वयं मंच से ध्वज लहराया, तो पूरा स्टेडियम भी उसी उत्साह के साथ ध्वज लहराने लगा. अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। भक्ति, गर्व, कृतज्ञता और सांस्कृतिक एकता का यह दृश्य पूरे आयोजन की सबसे यादगार तस्वीर बन गया.

क्वाज़ुलु-नताल के प्रीमियर भी हुए शामिल

कार्यक्रम में क्वाज़ुलु-नताल के प्रीमियर थामीन्तुली भी विशेष रूप से शामिल हुए. उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ केसरिया ध्वज लहराया और हनुमान चालीसा की पुस्तिका लेकर सामूहिक पाठ में भाग लेने का प्रयास किया. उन्होंने चिन्मय मिशन को 75 वर्ष पूरे होने पर बधाई दी तथा स्वामी अभेदानंद के नेतृत्व में दक्षिण अफ्रीका में मिशन द्वारा किए जा रहे सामाजिक और आध्यात्मिक कार्यों की प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में सद्भाव, अनुशासन और सांस्कृतिक विविधता के सम्मान को मजबूत करते हैं.

200 स्वयंसेवकों ने संभाली पूरे आयोजन की जिम्मेदारी

इतने विशाल आयोजन के सफल संचालन के पीछे लगभग 200 स्वयंसेवकों की मेहनत रही. स्वयंसेवकों ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा, प्रवेश, पार्किंग, बैठने की व्यवस्था और अन्य सभी व्यवस्थाओं का जिम्मा संभाला. हर श्रद्धालु का स्वागत विशेष गिफ्ट बैग देकर किया गया, जिसमें भगवान हनुमान और पूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद की तस्वीरें, प्रेरणादायक पुस्तकें, अभिमंत्रित सिंदूर प्रसाद, पानी की बोतल और फल शामिल थे.

20 हजार श्रद्धालुओं के लिए तैयार किया गया महाप्रसाद

कार्यक्रम में कोई भी श्रद्धालु भूखा न रहे, इसके लिए लगभग 100 स्वयंसेवकों ने पूरी रात मेहनत कर 20,000 से अधिक भोजन पैकेट तैयार किए. इनमें बिरयानी, करी और सूजी का हलवा शामिल था, जिन्हें महाप्रसाद के रूप में सभी श्रद्धालुओं में वितरित किया गया. इसके अलावा दो सप्ताह तक स्वयंसेवकों ने विभिन्न मंदिरों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से चिन्मय अन्नपूर्णा आश्रम की विशाल रसोई में पारंपरिक प्रसाद 'रोट' तैयार किया. आटा, घी और चीनी से बनने वाला यह विशेष प्रसाद भगवान हनुमान को अर्पित करने के बाद हजारों श्रद्धालुओं में वितरित किया गया.

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विश्व पटल पर सनातन संस्कृति का प्रभावशाली संदेश

चिन्मय मिशन के 75वें स्थापना वर्ष पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और वैश्विक भारतीय समुदाय की एकजुटता का सशक्त प्रदर्शन बनकर सामने आया. 17 हजार से अधिक श्रद्धालुओं की सामूहिक भागीदारी, लाखों बार हनुमान चालीसा का पाठ, स्वयंसेवकों की सेवा भावना और विभिन्न समुदायों की सहभागिता ने यह साबित किया कि सनातन परंपरा आज भी विश्वभर में लोगों को जोड़ने और सामाजिक सद्भाव का संदेश देने की क्षमता रखती है.

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कुमार विश्वत सेन

लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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