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निर्भया मामलाः सुप्रीम कोर्ट ने दोषी विनय शर्मा की याचिका ठुकराई, कहा समीक्षा की जरूरत नहीं

Updated at : 14 Feb 2020 2:37 PM (IST)
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निर्भया मामलाः सुप्रीम कोर्ट ने दोषी विनय शर्मा की याचिका ठुकराई, कहा समीक्षा की जरूरत नहीं

नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को निर्भया सामूहिक बलात्कार और हत्या मामले में मौत की सजा पाये दोषी विनय कुमार की याचिका खारिज कर दी. विनय कुमार ने राष्ट्रपति द्वारा उसकी दया याचिका खारिज किये जाने के आदेश को चुनौती दी थी. न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना […]

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नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को निर्भया सामूहिक बलात्कार और हत्या मामले में मौत की सजा पाये दोषी विनय कुमार की याचिका खारिज कर दी. विनय कुमार ने राष्ट्रपति द्वारा उसकी दया याचिका खारिज किये जाने के आदेश को चुनौती दी थी.

न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने विनय कुमार शर्मा की याचिका खारिज करते हुये कहा कि इसमें दया याचिका खारिज करने के आदेश की न्यायिक समीक्षा का कोई आधार नहीं है. शीर्ष अदालत ने कहा कि राष्ट्रपति के समक्ष शर्मा की मेडिकल रिपोर्ट सहित सारी सामग्री पेश की गयी थी और उन्होंने दया याचिका खारिज करते समय सारे तथ्यों पर विचार किया था.

शीर्ष अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट के मद्देनजर शर्मा की इस दलील को भी अस्वीकार कर दिया कि उसकी दिमागी हालत ठीक नहीं है और कहा कि इस रिपोर्ट के अनुसार उसकी सेहत ठीक है. निचली अदालत ने 31 जनवरी को अगले आदेश तक के लिए चारों दोषियों- मुकेश कुमार सिंह, पवन गुप्ता, विनय कुमार शर्मा और अक्षय कुमार को फांसी देने पर रोक लगा दी थी. ये चारों दोषी इस समय तिहाड़ जेल में बंद हैं.

निर्भया से 16-17 दिसंबर, 2012 को दक्षिणी दिल्ली में चलती बस में छह लोगों ने सामूहिक बलात्कार किया और दरिंदगी के बाद उसे सड़क पर फेंक दिया था. निर्भया की बाद में 29 दिसंबर, 2012 को सिंगापुर के एक अस्पताल में मौत हो गयी थी. इन छह आरोपियों में से एक राम सिंह ने तिहाड़ जेल में कथित रूप से आत्महत्या कर ली थी जबकि छठा आरोपी किशोर था जिसे तीन साल सुधार गृह में रखने के बाद 2015 में रिहा कर दिया गया.

फांसी में क्यों हो रही है देर

delhi prison rules की धारा 836 के मुताबिक, अगर किसी एक मामले में एक से अधिक दोषी है और सभी को फांसी हुई है, तो जब तक किसी एक का विकल्प बाकी रहता है तब तक किसी को फांसी नहीं हो सकती है. सुप्रीम कोर्ट में इसी मामले में सोमवार को सुनवाई है.

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