दिल्ली चुनाव परिणाम : पूर्वांचलियों का आप को साथ भाजपा को भी दीं सात सीटें, कांग्रेस के 66 में से 63 प्रत्याशियों की जमानत जब्त

By Prabhat Khabar Digital Desk
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भाजपा की झोली में आठ सीटें, पांच का फायदा

दिल्ली विधानसभा की 70 में से करीब 15 सीटें पूर्वांचली बहुल हैं. लिहाजा, सभी दलों ने इन सीटों पर पूर्वांचली लोगों के न केवल मुद्दों को उठाया, बल्कि पूर्वांचली उम्मीदवारों पर भी दांव लगाया.

दिल्ली विधानसभा चुनाव में पूर्वांचली-बिहारी वोटरों ने अहम भूमिका निभायी. एक ओर जहां आम आदमी पार्टी का इन वोटरों ने साथ दिया, वहीं भाजपा जिन ने आठ सीटों पर जीत दर्ज की है, उनमें सात सीटें पूर्व और उत्तर-पूर्व दिल्ली की हैं. इन्हीं इलाकों में पूर्वांचली और बिहार-झारखंड के लोग सबसे ज्यादा रहते हैं, लेकिन भाजपा के लिए यह आंकड़ा नाकाफी है.

जिस तरह का असर पूर्वांचली पूर्वी और उत्तर-पूर्वी दिल्ली में रखते हैं, उसके हिसाब से ये टैली कुछ भी नहीं है. इस चुनावी नतीजे से पता चलता है कि 2015 की तरह इस बार भी पूर्वांचली वोटर्स ने आम आदमी पार्टी को ही वोट दिया है.

दरअसल, दिल्ली के चुनाव में पूर्वांचली वोटर्स की अहम भूमिका होती है. इसी को ध्यान में रखते हुए साल 2016 में मनोज तिवारी को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन जिन पूर्वांचली वोटर्स ने 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को झोली भर-भर के वोट दिये, उसने इस विधानसभा चुनाव में भाजपा को गच्चा दे दिया. पूर्वांचली वोटर्स पिछले दो बार से विधानसभा चुनाव में भाजपा को गच्चा देते आये हैं.

15 सीटें पूर्वांचली बहुल, 25 से 30 सीटों पर इनका प्रभाव

एक आंकड़े के मुताबिक दिल्ली में बिहार और यूपी के रहने वाले पूर्वांचली वोटर दिल्ली की करीब 25 से 30 सीटों पर अपना असर रखते हैं. इनमें 15 सीटें पूर्वांचल बहुल सीटें हैं. इन सीटों की किस्मत पूर्वांचल के वोटर ही तय करते हैं. पूर्वांचल के वोटर्स सावधानी से वोट करते हैं. केंद्र के चुनाव में उनके भाजपा को वोट करने का पैटर्न मिलता है, तो राज्य के चुनाव में आम आदमी पार्टी को.

पहले से थे संकेत, लोकसभा में भाजपा, विधानसभा में आप

पूर्वांचली के वोटिंग पैटर्न को लेकर 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद एक दिलचस्प आंकड़ा सामने आया था. 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद सीएसडीएस ने पूर्वांचली वोटर्स पर एक सर्वे करवाया.

इस सर्वे में जिन 56 फीसदी पूर्वांचली ने लोकसभा के चुनाव में भाजपा को वोट दिया था, उनमें से 24 फीसदी पूर्वांचली ने कहा कि वे राज्य विधानसभा के चुनाव में आम आदमी पार्टी को वोट करेंगे. मतलब भाजपा के आधे वोटर्स पहले से ही मन बना चुके थे कि वे 2020 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को वोट करेंगे. नतीजों से ऐसा लग भी रहा है.

नहीं पड़ा हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के मुद्दे का असर

पूर्वांचल के इन वोटर्स के लिए हिंदुत्व और राष्ट्रवाद एक बड़ा मुद्दा है. इसलिए दिल्ली चुनावों के दौरान इन मुद्दों को भाजपा ने जोरदार तरीके से उठाया भी.

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर और परवेश वर्मा जैसे नेताओं ने भड़काऊ और तीखे बयान भी दिये, लेकिन फिर भी उनके वोट हासिल नहीं कर सके. केजरीवाल ने अपनी सधी और संयमित प्रतिक्रिया से मामले को और बिगड़ने नहीं दिया.

लोअर और मिडिल क्लास पूर्वांचली ने दिया आप का साथ

एक बड़ी बात ये भी रही है कि दिल्ली में पूर्वांचल के ज्यादातर वोटर्स वर्किंग क्लास से आते हैं. बहुत सारे लोग मेहनत मजदूरी करने वाले हैं. इन लोगों के लिए केजरीवाल सरकार की कल्याणकारी योजनाओं ने काम किया. इस वजह से भी एक तरफ वे मोदी के चेहरे को केंद्र में देखना चाहते थे, तो राज्य में उन्हें केजरीवाल जैसा सीएम ही चाहिए था. दिल्ली का मिडिल क्लास पूर्वांचली वोटर्स भी आम आदमी पार्टी का समर्थक है. इसकी वजह है बिजली और पानी पर मिलने वाली छूट. सरकारी स्कूलों की बेहतर हालत और स्वास्थ्य सेवाओं की सुधरती स्थिति.

2015 में भी आप ने 13 सीटें पूर्वांचली इलाकों से जीती थीं

2015 में भी पूर्वांचली वोटर्स ने ‘आप’ का साथ दिया था. 2015 में ‘आप’ से जीते 67 उम्मीदवारों में 13 पूर्वांचल से थे. इस जीत के बाद भी केजरीवाल ने पूर्वांचली वोटर्स तक अपनी पहुंच और ज्यादा पहुंचायी. छठ पर्व के मौकों पर घाटों की साफ सफाई इसी कड़ी का एक हिस्सा थी.

आठ महिला विधायक

सभी ‘आप’ की

‘आप’ ने नौ महिला उम्मीदवार उतारे थे, आठ को मिली जीत

मंगोलपुरी : राखी बिड़लान

शालीमार बाग : बंदना कुमारी

कालका जी : आतिशी

आरके पुरम : प्रमिला टोकस

राजौरी गार्डन : धनवंती चंदेला

हरिनगर : राजकुमारी ढिल्लो

पालम : भावना गौर

त्रीनगर : प्रीती तोमर.

आप की एक महिला उम्मीदवार सरिता सिंह रोहतास नगर सीट से भाजपा जीतेंद्र महाजन से हार गयीं.

भाजपा की एक भी महिला उम्मीदवार नहीं जीती.

आप के सभी प्रमुख नेता जीते

आप के सभी प्रमुख नेता चुनाव जीत गये. राघव चड्ढा, अतिशी, गोपाल राय ने भी जीत दर्ज की है.

कपिल मिश्रा हारे

भाजपा में शामिल हुए बागी आप नेता कपिल मिश्रा को मॉडल टाउन विधानसभा क्षेत्र में आप उम्मीदवार अखिलेशपति त्रिपाठी से करारी शिकस्त मिली है. 2015 में करावल नगर सीट पर आम आदमी पार्टी के टिकट पर कपिल मिश्रा ने जीत हासिल की थी.

आप के ये नेता हारे

लक्ष्मी नगर सीट से नितिन त्यागी, रोहतास नगर से सरिता सिंह, घोंडा से श्रीदत्त शर्मा हारे.

अंतिम दौर में जीते सिसोदिया

पटपड़गंज से उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी जीत दर्ज की. सिसोदिया 12 राउंड की गिनती तक पीछे चले और 13वें राउंड में आगे हुए.

भाजपा का वोट प्रतिशत बढ़ा कांग्रेस और आप का गिरा

दिल्ली विधानसभा चुनाव में आप ने 53.57% मत हासिल किये हैं, जबकि भाजपा को 38.51 फीसदी वोट मिले हैं. वहीं, कांग्रेस का मत प्रतिशत गिरकर 4.26% पर आ गया. आंकड़े के अनुसार, भाजपा का वोट प्रतिशत बढ़ा है, जबकि आप को 0.77%, जबकि कांग्रेस को 5.39% का नुकसान हुआ है.

किसको कितने वोट मिले

2015 2020

पार्टी वोट वोट अंतर

आप 54.34% 53.57% - 0.77%

भाजपा 32.19 38.51% + 6.32%

कांग्रेस 9.65 4.26% - 5.39

किसके कितने पूर्वांचली उम्मीदवार, कितने जीते

पार्टी उम्मीदवार

आप 13

भाजपा 08

कांग्रेस 03

जेडीयू 02

2015 के चुनाव में भी आम आदमी पार्टी ने 13 पूर्वांचली उम्मीदवार उतारे थे और सभी ने जीत हासिल की थी. भाजपा ने सिर्फ तीन पूर्वांचली को टिकट दिया था.

2019 : लोकसभा चुनाव

पार्टी वोट प्रतिशत

आप 18.1%

भाजपा 56.00%

कांग्रेस 22.5%

विस : भाजपा का वोट प्रतिशत ऐसे गिरा

दिल्ली में 1993 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में भाजपा 42.82% वोट मिले थे. इसने 1998 में 34.02% मत और 2003 में 35.22% वोट हासिल किये. भाजपा ने 2008 में 36.34%, 2013 में 33.07% और 2015 में 32.19% मत हासिल किये थे.

अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सभी 12 सीटों पर ‘आप’ का कब्जा

सीमापुरी : मंत्री राजेंद्र पाल गौतम

सुल्तानपुर माजरा : मुकेश कुमार अहलावत

देवली : प्रकाश जरवाल

अंबेडकर नगर : अजय दत्त

गोकलपुर : सुरेंद्र कुमार

कोण्‍डली : कुलदीप कुमार

मादीपुर : गिरीश सोनी

मंगोलपुरी : राखी बिड़लान

रतन नगर : राज कुमार आनंद

त्रिलोकपुरी : रोहित कुमार

करोल बाग : विशेष रवि.

आप के सभी मुस्लिम उम्मीदवार जीते कांग्रेस के सभी की जमानत जब्त

सीट उम्मीदवार(आप) जीत का अंतर कांग्रेस को मत

ओखला अमानतुल्ला खान 70,000 4,575

सीलमपुर अब्दुल रहमान 36,920 20,247

बल्लीमारान इमरान हुसैन 36,172 65,644

मुस्तफाबाद हाजी युनूस 20,704 5,355

मटिया महल शोएब इकबाल 50,241 3409

'मेरा ट्वीट संभाल कर रखना' पर अब जम कर ट्रोल हुए मनोज तिवारी

भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी अपने एक ट्वीट को लेकर जम कर ट्रोल हो रहे हैं. मनोज तिवारी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए आठ फरवरी को हुए मतदान के दिन ट्वीट कह कहा था- ‘सभी एग्जिट पोल फेल होंगे. मेरा यह ट्वीट संभाल कर रखियेगा.’ सोमवार को जब चुनाव परिणाम के रुझान आने लगे और आम आदमी पार्टी की सरकार बनती दिखने लगी, तो ट्विटर पर लोगों ने मनोज तिवारी को जम कर ट्रोल किया. एक यूजर ने यहां तक लिखा कि मनोज तिवारी के लिए अब अंडरग्राउंड होने का वक्त आ गया है.

कांग्रेस के 66 में से 63 प्रत्याशियों की जमानत जब्त

चुनाव में करारी शिकस्त के बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मंगलवार को पद से इस्तीफा दे दिया.

आप में आये दूसरे दल के ये नेता शोएब इकबाल, प्रहलाद सिंह साहनी, धनवती चंदीला, राजकुमारी ढिल्लन और विनय मिश्रा ने विजय हासिल की.

बेअसर साबित हुए केजरीवाल से छिटके नेता

अरविंद केजरीवाल से छिटके नेता इस चुनाव में पूरी तरह से बेअसर साबित हुए. आप के लगभग सभी बागी विधायकों को दिल्ली वालों ने नकार दिया. चुनाव मैदान में दूसरे दलों के टिकट पर उतरे आप के आठ बागी विधायकों में सात विधायक चुनाव हार गये. सिर्फ आप के बागी अनिल वाजपेयी गांधीनगर से भाजपा के टिकट पर जीते. कपिल मिश्रा, अलका लांबा, आदर्श शास्त्री, एनडी शर्मा और कमांडो सुरेंद्र सिंह हार गये. लांबा कांग्रेस के टिकट पर चांदनी चौक से आप के प्रहलाद सिंह साहनी से, शास्त्री द्वारका में कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में आप के विनय मिश्रा से हार गये.

चुनाव मैदान में कूदे थे 16 बागी

आप 09

कांग्रेस 03

भाजपा 04

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