कश्मीर मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- व्यक्तिगत स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना जरूरी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 01 Oct 2019 6:56 PM

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नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान खत्म करने के बाद कश्मीर घाटी में लगी पाबंदियों का मुद्दा उठने पर मंगलवार को कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना होगा. न्यायमूर्ति एनवी रमण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति बीआर गवई की पीठ ने यह […]

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नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान खत्म करने के बाद कश्मीर घाटी में लगी पाबंदियों का मुद्दा उठने पर मंगलवार को कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना होगा.

न्यायमूर्ति एनवी रमण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति बीआर गवई की पीठ ने यह टिप्पणी उस समय की जब जम्मू कश्मीर प्रशासन ने कहा कि घाटी में टेलीफोन की शतप्रतिशत लाइनें काम कर रही हैं और दिन के दौरान लोगों के आवागमन पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध नहीं है. जम्मू कश्मीर प्रशासन की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि घाटी में यदि मोबाइल और इंटरनेट सुविधाएं बहाल की गयीं तो सीमा पार से फर्जी व्हाट्सऐप संदेश आने शुरू हो जायेंगे और यह यहां हिंसा भड़का सकते हैं. कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन, कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला और फाउंडेशन आॅफ मीडिया प्रोफेशनल्स के अध्यक्ष प्रणंजय गुहा ठाकुरता सहित अनेक याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि कश्मीर में संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप है और पत्रकारों के आवागमन पर प्रतिबंध है.

पीठ ने केंद्र को इन याचिकाओं पर जवाब देने और याचिकाकर्ताओं को इसके बाद अपने प्रत्युत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया. इसके साथ ही इस मामले को नवंबर के दूसरे सप्ताह के लिए सूचीबद्ध कर दिया. पीठ ने घाटी में पाबंदियों से संबंधित नौ याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना होगा. इससे पहले, सुनवाई शुरू होते ही शीर्ष अदालत ने माकपा महासचिव सीताराम येचुरी की याचिका पर कहा कि यह बंदीप्रत्यक्षीकरण याचिका थी और उन्हें न्यायालय ने राहत दे दी है. पीठ ने येचुरी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन से कहा, आपने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी. वह अनुरोध अब उपलब्ध नहीं है क्योंकि उस व्यक्ति (मोहम्मद यूसुफ तारिगामी) ने खुद भी अनुच्छेद 370 को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में याचिका दायर की है. यह एक सीमित मुद्दे के बारे में थी. अब आप और क्या राहत चाहते हैं?

रामचंद्रन ने कहा कि वह चाहते हैं कि तारिगामी की हिरासत को गैरकानूनी घोषित किया जाये या फिर पांच अगस्त के बाद उन्हें हिरासत में रखने को न्यायोचित ठहराने के लिए प्राधिकारियों से कहा जाये. इस पर पीठ ने कहा कि जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय सुचारू ढंग से काम कर रहा है और याचिकाकर्ता राहत के लिए वहां जा सकता है. पीठ ने कहा, यदि आप चाहते हैं कि आपकी याचिका पर यहां सुनवाई होनी चाहिए, तो यह सामान्य प्रक्रिया के तहत ही आयेगी और यदि आप चाहते हैं कि आपकी याचिका पर शीघ्र सुनवाई हो तो आपको जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय जाना होगा.

रामचंद्रन ने जोर दिया कि इस मामले पर शीर्ष अदालत को ही विचार करना चाहिए, इसके बाद पीठ ने केंद्र को इस याचिका पर जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए इसे नवंबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया. इसी से संबंधित एक अन्य मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजादी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने कहा कि न्यायालय के आदेश के अनुसार यह नेता कश्मीर गया था. अत: उसकी याचिका में किये गये पहले अनुरोध पर अमल हो चुका है. अहमदी ने कहा कि उनके अन्य अनुरोध अभी भी शेष हैं और प्राधिकारियों को न्यायालय को बताना चाहिए कि कानून के किन प्रावधानों के तहत घाटी में लोगों के आवागमन को प्रतिबंधित किया गया है.

मेहता ने पीठ से कहा कि दिन के समय घाटी में लोगों के आने जाने पर कोई प्रतिबंध नहीं है और परिस्थितियों को देखते हुए रात के समय आवागमन पर पाबंदी लगायी जाती है. पीठ ने मेहता को लोगों के आवागमन पर पाबंदियों के बारे में दो सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया. शीर्ष अदालत ने अस्पतालों में इंटरनेट संचार सेवा बहाल करने के लिये समीर कौल की याचिका पर विचार करने से इंकार करते हुए उन्हें जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय जाने का निर्देश दिया. अनुराधा भसीन, पूनावाला और ठाकुरता की याचिकाओं पर शीर्ष अदालत ने जानना चाहा कि इस मामले में हस्तक्षेप के लिये कितने आवेदन दायर किये गये हैं. पीठ ने घाटी में पाबंदियों से संबंधित मसले पर अब कोई नया आवेदन दायर करने पर रोक लगा दी.

मेहता ने पूनावाला के याचिका दायर करने के औचित्य पर सवाल उठाया और कहा कि वह टीवी की शख्सियत हैं और राज्य के निवासी नहीं है. इस पर, नयायमूर्ति गवई ने सवाल किया, क्या यह तहसीन पूनावाला वही व्यक्ति है जिसने नागपुर मामले में हमारे खिलाफ कुछ आरोप लगाये थे? न्यायमूर्ति गवई निश्चित ही न्यायाधीश बीएच लोया की मृत्यु के मामले का जिक्र कर रहे थे. पूनावाला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी घटना की जानकारी नहीं है, लेकिन घाटी में पाबंदियों का मामला गंभीर है और इस पर विचार करने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि वे घाटी में पूरी तरह सब कुछ ठप होने से प्रभावित हैं क्योंकि अधिकांश अस्पताल श्रीनगर में होने की वजह से लोग बहुत परेशान हो रहे हैं.

मीनाक्षी आरोड़ा ने सवाल किया, किस अधिसूचना के तहत कश्मीर घाटी में सब कुछ ठप किया गया है, सरकार को न्यायालय को यह बताना चाहिए. मेहता ने ऐसे किसी भी दावे को गलत बताया और कहा कि घाटी में अस्पताल सामान्य ढंग से काम कर रहे हैं और पांच अगस्त से मध्य सितंबर तक लाखों लोगों ने चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उठाया है. मेहता ने कहा, स्वास्थ्य सुविधाओं पर किसी प्रकार की पाबंदी नहीं है और सारे अस्पताल सुचारू ढंग से काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर इंटरनेट सेवायें बहाल की गयीं तो वहां फेक न्यूज का प्रवाह होने लगेगा. उन्होंने कहा कि अनेक इलाकों में लोगों और पत्रकारों के लिए इंटरनेट के स्टाल स्थापित किये जा रहे हैं. पीठ ने कश्मीर घाटी में पाबंदियों से संबंधित इन सभी मामलों को नवंबर महीने के लिए सूचीबद्ध करते हुए केंद्र को इन याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया.

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