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भारतीय रेलवे को मिली पहली कमांडो फोर्स CORAS, आतंकी हो या नक्सली अब किसी की खैर नहीं

देशभर में रेल यात्री और ट्रेनों के परिचालन के दौरान लगातार बढ़ते आतंकी खतरे को देखते हुए अब रेलवे ने सुरक्षा के लिहाज से कोरस यानि रेल सिक्योरिटी कमांडो की तैनाती शुरू कर दी है. (CORAS)कोरास का मतलब कमांडो फॉर रेलवे सिक्योरिटी है. रेलवे की कमांडोज फोर्स के इन जवानों को खासतौर पर तैयार किए […]

देशभर में रेल यात्री और ट्रेनों के परिचालन के दौरान लगातार बढ़ते आतंकी खतरे को देखते हुए अब रेलवे ने सुरक्षा के लिहाज से कोरस यानि रेल सिक्योरिटी कमांडो की तैनाती शुरू कर दी है. (CORAS)कोरास का मतलब कमांडो फॉर रेलवे सिक्योरिटी है. रेलवे की कमांडोज फोर्स के इन जवानों को खासतौर पर तैयार किए गया है जो किसी भी तरह की अप्रिय हालातों से निपटने में सक्षम हैं.

चाहे आतंकी हमला हो, नक्सलियों का हमला हो या फिर प्राकृतिक आपदा से यात्रियों को बचना हो, इन कमांडोज को खासतौर पर ट्रेनिंग दी गई है.पहले चरण में कोरस के 1200 कमांडो को देशभर में तैनात किया जा रहा है आजादी के पर्व पर ये कमांडो फोर्स रेलवे में शामिल हो गई है. यह ऐसे स्थानों पर मौजूद रहेंगे जहां पर अक्सर अप्रिय हालातों का खतरा बना रहता है.
छत्तीसगढ़ के जगदलपुर और दंतेवाड़ा, उत्तर-पूर्व राज्यों के संवेदनशील इलाके या फिर जम्मू कश्मीर जैसी जगहों पर इन कोरास को तैनात रखा जाएगा और जरूरत पड़ने पर इनकी मदद ली जाएगी. रेलवे के मुताबिक अभी तक देश के कुछ हिस्सों में रेलवे के प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में भी दिक्कत आती थी.
खासतौर पर ऐसे इलाकों में जहां पर नक्सली, आतंकी और उल्फा के हमलों का डर रहता था. लेकिन अब इन कमांडोज की मदद से रेलवे अपने प्रोजेक्ट को पूरा करने की भी योजना बना रही है.आरपीएफ के डीजीपी की माने तो इन जवानों को एनएसजी और मार्कोस की तर्ज पर ट्रेनिंग दी गई है. मार्कोस जहां समुद्री ऑपरेशन में महारत हासिल रखते हैं.

वहीं एनएसजी के जवानों के पास अलग-अलग इलाकों में ऑपरेशन की महारत है. इसी तरह रेलवे के ऑपरेशंस को अंजाम देने के लिए कोरास को खासतौर पर तैयार किया गया है. कोरास में रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स और रेलवे प्रोटेक्शन स्पेशल फोर्स के जवान शामिल किये गए हैं. इन कमांडो की खास तरह की यूनिफार्म होगी. इनके पास बुलेट प्रूफ जैकेट होगी और अलग तरह का हेलमेट होगा. इसके साथ ही इनके पास अत्याधुनिक हथियार भी मौजूद रहेंगे.
इसमें से अधिकतर जवान 30 से 35 साल उम्र के हैं और इनकी ट्रेनिंग एनएसजी, फोर्स वन और ग्रेहाउंड जैसे कमांडोड के साथ में हुई है. रेलवे सुरक्षा बल की अपनी कमांडो यूनिट का आइडिया आरपीएफ के महानिदेशक अरुण कुमार का है. रेल मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, कोरस की ट्रेनिंग एनएसजी के मानेसर स्थित मुख्यालय के अलावा नक्सल आपरेशनों के लिए आंध्र प्रदेश व तेलंगाना पुलिस द्वारा विशेष रूप से तैयार ‘ग्रे हाउंड्स’ फोर्स के ट्रेनिंग सेंटरों में चार चरणों में हुई है.
Prabhat Khabar Digital Desk
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