महान क्रांतिकारी शहीद चंद्रशेखर आजाद की जयंती आज, पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 23 Jul 2019 11:00 AM

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भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक एवं लोकप्रिय स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद और स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक की जयंती आज है. आजाद का जयंती पर पीएम मोदी ने श्रद्धांजलि अर्पित की है. शहीद चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर #ChandrashekharAzad ट्विटर के टॉप ट्रेंड में है. मंगलवार को स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक और चंद्रशेखर आजाद […]

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भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक एवं लोकप्रिय स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद और स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक की जयंती आज है. आजाद का जयंती पर पीएम मोदी ने श्रद्धांजलि अर्पित की है. शहीद चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर #ChandrashekharAzad ट्विटर के टॉप ट्रेंड में है.

मंगलवार को स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक और चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर पर उन्हें श्रद्धांजलि दी और देश के स्वतंत्रता अभियान में उनके योगदान को सराहा. तिलक की 163वीं जयंती पर प्रधानमंत्री ने कहा कि कृतज्ञ राष्ट्र उनके योगदान को हमेशा याद रखेगा.
पीएम मोदी ने ट्वीट किया- ‘भारत माता के वीर सपूत चंद्रशेखर आजाद को उनकी जयंती पर मेरी विनम्र श्रद्धांजलि. वे एक निर्भीक और दृढ़ निश्चयी क्रांतिकारी थे, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपने जीवन की आहुति दे दी. उनकी वीरता की गाथा देशवासियों के लिए प्रेरणा का एक स्रोत है.’

बता दें कि चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई, 1906 को मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के भाबरा नामक स्थान पर हुआ. वो जब किशोर थे तभी बनारस आ कर रहने लगे. 1920-21 के वर्षों में वे गांधीजी के असहयोग आंदोलन से जुड़े. वे गिरफ्तार हुए और जज के समक्ष प्रस्तुत किए गए. जहां उन्होंने अपना नाम ‘आजाद’, पिता का नाम ‘स्वतंत्रता’ और ‘जेल’ को उनका घर बताया. उन्हें 15 कोड़ों की सजा दी गयी.
हर कोड़े के वार के साथ उन्होंने, ‘वंदे मातरम्’ और ‘महात्मा गांधी की जय’ का स्वर बुलंद किया. इसके बाद वे सार्वजनिक रूप से आजाद कहलाए. रामप्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में आजाद ने काकोरी षड्यंत्र (1925) में सक्रिय भाग लिया और पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार हो गए. 17 दिसंबर, 1928 को चंद्रशेखर आजाद ने जे.पी. साण्डर्स की गोल मार कर हत्या कर दी.
उन्होंने संकल्प किया था कि वे न कभी पकड़े जाएंगे और न ब्रिटिश सरकार उन्हें फांसी दे सकेगी. 1931 में इलाहाबाद के अलफ्रेड पार्क में अंग्रेजों से लड़ते हुए जब उनके पास मात्र एक गोली बची तो खुद को गोली मार कर मातृभूमि के लिए प्राणों की आहुति दे दी.
पीएम मोदी ने ट्वीट किया, ‘‘लोकमान्य तिलक को उनकी जयंती पर कोटि-कोटि नमन. देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत वह एक ऐसे स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने पूर्ण स्वराज के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया. कृतज्ञ राष्ट्र उनके योगदान को सदैव स्मरण करता रहेगा. ’

बता दें कि बाल गंगाधर तिलक को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के जनक के तौर पर याद किया जाता है. उन्होंने ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे ले कर रहूंगा’ नारा दिया, जिसने सभी के मन में आजादी का जोश उत्पन्न किया.
23 जुलाई 1856 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी में जन्में बाल गंगाधर तिलक स्वतंत्रता सेनानी के साथ एक समाज सुधारक, राष्ट्रीय नेता, इतिहासकार, संस्कृत, हिंदू धर्म, गणित और खगोल विज्ञान के विद्वान थे। वह आधुनिक भारत के प्रधान आर्किटेक्ट में से एक थे.
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