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#ModiCabinet2 सदानंद गौड़ा : किसान आंदोलन ने राजनीति में दिलायी पहचान

Updated at : 30 May 2019 10:44 PM (IST)
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#ModiCabinet2 सदानंद गौड़ा : किसान आंदोलन ने राजनीति में दिलायी पहचान

पिता का नाम : श्री देवरागुंद वेंकप्पा गौड़ा जन्म तिथि: बुधवार ,18 मार्च, 1953 जन्म स्थान : देवारंगुंडा, जिला दक्षिण कन्नड़ (कर्नाटक) शैक्षणिक योग्यता : बीएससी, एल. एल. बी किसान आंदोलनों के जरिये राजनीति में उतरे गौड़ा, कानून से स्नातक हैं और 1979 से 1982 तक वो सरकारी वकील भी रह चुके हैं. गौड़ा वोक्कालिंगा […]

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पिता का नाम : श्री देवरागुंद वेंकप्पा गौड़ा

जन्म तिथि: बुधवार ,18 मार्च, 1953

जन्म स्थान : देवारंगुंडा, जिला दक्षिण कन्नड़ (कर्नाटक)

शैक्षणिक योग्यता : बीएससी, एल. एल. बी

किसान आंदोलनों के जरिये राजनीति में उतरे गौड़ा, कानून से स्नातक हैं और 1979 से 1982 तक वो सरकारी वकील भी रह चुके हैं. गौड़ा वोक्कालिंगा समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. किसान आंदोलन के जरिए राजनीति में ऊपर उठे सदानंद गौड़ा ने अपना राजनीतिक सफ़र की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ज़िला इकाई के महासचिव के रूप में की थी. वर्ष 1994 में पहली बार विधायक बने सदानंद गौड़ा को खोखो और टेनिस खेलना पसंद है.

उनकी खास रूचि यक्षगान में है हम आपको बता दें कि यक्षगान गायन की एक पारंपरिक गायन प्रथा है. वर्ष 1976 में डी.वी. गौड़ा ने सुलेय और पुत्तूर में वकालत का अभ्यास किया और शिरसी में वकालत की. डी.वी. सदानंद गौड़ा श्रम आंदोलन में सबसे आगे थे और वह पुत्तूर विभाजन में भारतीय मजदूर संघ के महासचिव और सुलेय तालुक के ऑटो रिक्शा चालक संघ के अध्यक्ष भी थे.

दक्षिण कन्नड़ और यक्षगण की लोक कलाओं के अलावा वह बैडमिंटन, टेनिस और खो-खो जैसे खेलों में भी काफी रूचि रखते हैं. सदानंद गौड़ा ने श्रीमती दत्ती से विवाह किया है और उनका एक पुत्र भी है.

राजनीतिक करियर

सदानंद गौड़ा ने जनसंघ के सदस्य के रूप में अपने राजनैतिक कैरियर की शुरुआत की और बाद में एक युवा नेता के रूप में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए. सदानंद गौड़ा पांच साल वर्ष 1983 से वर्ष 1988 तक भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा के सचिव रहे. वर्ष 2004 में सदानंद गौड़ा राज्य भाजपा के सचिव और बाद में पार्टी के राष्ट्रीय सचिव बने.

वर्ष 1994 में सदानंद गौड़ा को दक्षिणी कन्नड़ में पुत्तूर से कर्नाटक विधानसभा के लिए चुना गया था. वर्ष 1999 में सदानंद गौड़ा को उसी निर्वाचन क्षेत्र से फिर से चुना गया और उन्हें राज्य विधानसभा में विपक्ष का उप नेता बनाया गया. वर्ष 2003 में उन्हें राज्य विधानसभा में लोक लेखा समिति के अध्यक्ष के रूप में नामांकित किया गया था.

वर्ष 2004 में, सदानंद गौड़ा मंगलौर विधानसभा के 14 वें लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के वेरप्पा मोइली को पराजित करने में सफल हुए थे. इसके बाद सदानंद गौड़ा ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, पर्यावरण और वन लोकसभा समिति में कार्य किया.

वर्ष 2005 में सदानंद गौड़ा को भारत सरकार द्वारा कॉफी बोर्ड के निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था. वर्ष 2006 में सदानंद गौड़ा को कर्नाटक राज्य की भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया. सदानंद गौड़ा ने पार्टी अध्यक्ष के रूप में अपनी नियुक्ति को सही साबित किया, क्योंकि मई 2008 में भाजपा ने पहली बार दक्षिण भारत में विधानसभा चुनाव जीता था. वर्ष 2009 में सदानंद गौड़ा उडुपी चिकमंगलूर निर्वाचन क्षेत्र से 15वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए.

अगस्त 2011 में मुख्यमंत्री ये दियुरप्पा को खनन सौदों के लिए भ्रष्टाचार के आरोपों से बाहर निकलने के लिए मजबूर किया गया. डी. वी. एस. गौड़ा को भारतीय जनता पार्टी द्वारा मुख्यमंत्री के रूप में चुना गया और बाद में वह दिसंबर 2011 में कर्नाटक विधान परिषद के लिए निर्वाचित हुए.

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