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अर्जुन मुंडा : कोल्हान के जंगल आंदोलन के जरिये की सक्रिय राजनीति में प्रवेश

Updated at : 30 May 2019 10:36 PM (IST)
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अर्जुन मुंडा : कोल्हान के जंगल आंदोलन के जरिये की सक्रिय राजनीति में प्रवेश

सचिन्द्र कुमार दाश नयी दिल्ली : खूंटी के नव निर्वाचीत सांसद अर्जुन मुंडा को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाये जाने के बाद से ही बधाई देने वालों का तांता लगा रहा. अर्जुन मुंडा का खरसावां से गहरा लगाव है. अर्जुन मुंडा का पैतृक आवास खरसावां के खेजुरदा है. पांच मई 1968 […]

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सचिन्द्र कुमार दाश

नयी दिल्ली : खूंटी के नव निर्वाचीत सांसद अर्जुन मुंडा को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाये जाने के बाद से ही बधाई देने वालों का तांता लगा रहा. अर्जुन मुंडा का खरसावां से गहरा लगाव है. अर्जुन मुंडा का पैतृक आवास खरसावां के खेजुरदा है. पांच मई 1968 जन्में अर्जुन मुंडा के बचपन में ही पिता गणेश मुंडा का निधन हो गया. इसके बाद उनका पूरा परिवार यहां से जमशेदपुर जाकर घोडाबांधा में बस गया था.

मां सायरा मुंडा ने अर्जुन मुंडा को पढ़ा लिखा कर आगे बढ़ाया. भालुबासा हरिजन स्कूल में प्राथमिक व घोड़ाबांधा में माध्यमिक शिक्षा करने वाले अर्जुन मुंडा 1983 में मैट्रीक की परीक्षा पास की. मैट्रिक पास कराने के साथ ही अर्जुन मुंडा राजनीति में सक्रिय हो गये. साथ में पढ़ाई को भी जारी रखा. 80 के दशक में कोल्हान के जंगल आंदोलन के जरीए अर्जुन मुंडा ने राजनीति में प्रवेश किया.

इग्नू से समाजशास्त्र में स्नातक की डिग्री हासिल की. अर्जुन मुंडा अपने पांच भाई बहनों में सबसे छोटे हैं. उनके तीन बहन व एक भाई हैं. अर्जुन मुंडा का विवाह कुचाई के पोडाडीह गांव के मीरा मुंडा के साथ हुई. अर्जुन मुंडा के तीन पुत्र हैं. एक पुत्र अभिषेक मुंडा पेशे से डॉक्टर हैं. 1995 में पहली बार अर्जुन मुंडा ने झामुमो प्रत्याशी के रूप में खरसावां विस क्षेत्र से चुनाव लड़ते हुए कांग्रेस के दिग्गज नेता विजय सिंह सोय को पांच हजार वोट से हराकर पहली बार विधानसभा पहुंचे थे.

इसके बाद अर्जुन मुंडा 1999 में झामुमो छोड़ भाजपा में शामिल हुए और 2000 के विस चुनाव में पुन: खरसावां से भाजपा प्रत्याशी के रूप में करीब 15 हजार वोटों से, 2005 में करीब 57 हजार तथा 2010 के उप चुनाव में 17,000 वोट से जीत दर्ज की. 2014 के विस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

तीन बार रहे राज्य के मुख्यमंत्री

अर्जुन मुंडा राज्य में तीन बार मुख्यमंत्री रहे. बाबूलाल मरांडी के सरकार में 23 दिसंबर 2000 को कल्याण मंत्री रहे. बाबूलाल मरांडी के इस्तीफे के बाद 18 मार्च 2003, 12 मार्च 2005 से 14 सितंबर 2006 तथा 11 सितंबर 2010 से 18 जनवरी 2013 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे. अर्जुन मुंडा ने पहली बार 2009 में जमशेदपुर लोस क्षेत्र से जीत दर्ज की थी. नितिन गडकरी जब भाजपा के अध्‍यक्ष थे उस समय श्री मुंडा भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव व संसदीय बोर्ड के सदस्य भी रहे. 2019 के लोक सभा चुनाव में भी खूंटी लोकसभा क्षेत्र से पहली बार चुनाव लड़ते हुए विपरीत परिस्थिति में जीत दर्ज की.

एक नजर में

अर्जुन मुंडा कॉलेज की शिक्षा पूरी होते ही अस्सी के दशक में झारखंड आंदोलन से जुड़ गये.

झारखंड आंदोलन से निकल कर राजनीतिक मंच पर जगह बनायी.

वह 23 साल की उम्र में ही झारखंड आंदोलन की गतिविधियों से जुड़ गये.

27 साल की उम्र में चुनावी राजनीति में प्रवेश किया.

1995 के बिहार विधानसभा चुनाव में खरसावां विधानसभा से चुनाव लड़ा और जीते.

तीन के बाद 1998 में केंद्र में भाजपा गठबंधन सरकार आ चुकी थी. 1999 में झामुमो छोड़कर भाजपा में शामिल हुए.

बिहार विधानसभा के 2000 के चुनाव में खरसावां से भाजपा विधायक बने.

2000 के 15 नवंबर को झारखंड राज्य का गठन हो गया. झारखंड की बाबूलाल मरांडी सरकार में कल्याण मंत्री बनाये गये.

सबसे कम उम्र 35 साल में 18 मार्च 2003 को झारखंड के मुख्यमंत्री बने.

12 मार्च 2005 को दूसरी बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने.

2009 में 15 वीं लोकसभा के लिए पार्टी ने जमशेदपुर से उम्मीदवार बनाया. लोकसभा चुनाव जीतकर पहली बार सांसद बने.

भाजपा ने केंद्रीय संगठन में राष्ट्रीय महामंत्री बनाया.

11 सितंबर 2010 को अर्जुन मुंडा तीसरी बार मुख्यमंत्री बने. आठ जनवरी 2013 को झामुमो की समर्थन वापसी के बाद सरकार गिर गई.

2014 विधानसभा चुनाव में खरसावां विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हारे. 2019 लोकसभा का चुनाव खूंटी संसदीय क्षेत्र से लड़कर कांग्रेस को हराकर जीत दर्ज की.

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