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Loksabha Election 2019 : PM मोदी को टक्कर देना राहुल गांधी के लिए इस बार भी मुश्किल

Updated at : 03 May 2019 8:04 PM (IST)
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Loksabha Election 2019 : PM मोदी को टक्कर देना राहुल गांधी के लिए इस बार भी मुश्किल

लोकसभा चुनाव 2019 के चार चरणों का मतदान हो चुका है. पांचवें चरण के मतदान के लिए तमाम राजनीतिक पार्टियां जोर लगा रही हैं. इधर, प्रधानमंत्री बनने की आस लगाये (PM In Waiting) कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की राह इस बार भी आसान नहीं दिख रही. हाल ही में राहुल गांधी के अरमानों को तगड़ा […]

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लोकसभा चुनाव 2019 के चार चरणों का मतदान हो चुका है. पांचवें चरण के मतदान के लिए तमाम राजनीतिक पार्टियां जोर लगा रही हैं. इधर, प्रधानमंत्री बनने की आस लगाये (PM In Waiting) कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की राह इस बार भी आसान नहीं दिख रही.

हाल ही में राहुल गांधी के अरमानों को तगड़ा झटका तब लगा, जब चुनाव प्रचार के लिए कांग्रेस के थीम साॅन्ग लिखने वाले गीतकार जावेद अख्तर ने ही उन्हें लेकर एक सनसनीखेज बयान दे डाला. कांग्रेस पार्टी के करीबी माने जानेवाले जावेद की मानें, तो उन्हें राहुल गांधी पीएम मैटेरियल नहीं दिखते हैं.

बॉलीवुड और कला जगत की जहीन शख्सीयत माने जानेवाले जावेद अख्तर से हाल ही में जब एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूछा गया कि क्या आप राहुल गांधी को पीएम के तौर पर देखते हैं, तो उन्होंने साफ कह दिया – नहीं. उन्होंने कहा, अभी तक मुझे कुछ ऐसा नहीं लगा कि वो अच्छे पीएम हो जाएं. ऐसा कोई काम उनका देखा नहीं मैंने.

जावेद अख्तर की बात पर गौर करें, तो एक हद तक यह सही भी है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जिस विपक्षी एकता के नाम पर भाजपा को चुनौती देने की बात करते हैं, उसी के नेता कांग्रेस को कोई भाव नहीं दे रहे हैं. ममता बनर्जी, मायावती, अखिलेश यादव, शरद पवार, चंद्रबाबू नायडू, चंद्रशेखर राव जैसे दिग्गज नेता विपक्ष के नेता के रूप में राहुल की भूमिका को नकार चुके हैं. क्षेत्रीय दलों के इन नेताओं के रुख से साफ है कि राहुल गांधी 2019 की लड़ाई में अलग-थलग पड़ गये हैं.

शरद पवार ने दिया झटका

राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्‍यक्ष शरद पवार ने कहा है कि अगर एनडीए स्‍पष्‍ट बहुमत साबित करने में असफल रहती है, तो पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी, आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू और उत्तर प्रदेश की पूर्व सीएम मायावती प्रधानमंत्री पद के लिए प्रमुख दावेदार होंगे. उन्होंने ममता, मायावती और नायडू का नाम तो लिया, लेकिन प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदार में कांग्रेस अध्यक्ष का नाम नहीं लिया. एनसीपी प्रमुख इससे पहले भी कह चुके हैं कि जब बाजार में तुअर दाल बिकने आती है, तो हर दाना कहता है हम तुमसे भारी… लेकिन कीमत का पता तो बिकने पर ही चलता है. ऐसे में उन्होंने इशारों में ही सही, राहुल के पीएम पद की दावेदारी को भी खत्म कर दिया.

जब राहुल पहली बार बोले पीएम बनने की बात

कर्नाटक चुनाव के समय राहुल गांधी ने खुद को पहली बार प्रधानमंत्री पद का दावेदार बताते हुए कहा था कि अगर 2019 का चुनाव जीते, तो मैं पीएम बन सकता हूं. पिछले दिनों मुंबई में हुई कार्यकारिणी की बैठक में भी राहुल गांधी को सर्वसम्मति से गठबंधन का नेता और प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने पर सहमति जतायी गयी.

एक दूसरे के मातहत काम करने को कोई राजी नहीं

शरद पवार, ममता बनर्जी, सीताराम येचुरी, नवीन पटनायक, चंद्रशेखर राव सरीखे नेता दशकों से राजनीति में हैं, इनकी अपने-अपने राज्यों में जनता पर पकड़ भी है, लेकिन एक दूसरे के तहत काम करने को कोई राजी नहीं हैं. जाहिर है, राहुल गांधी के मन में प्रधानमंत्री बनने के सपने पल रहे हैं, लेकिन विपक्षी पार्टी के नेताओं ने भी अब मान लिया है कि राहुल का पीएम बनना संभव नहीं है.

विपक्ष की सहमति दूर की कौड़ी

प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कांग्रेस के तमाम नेताओं ने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद तक पहुंचाने के लिए एड़ी-चोटी एक कर रखा है. हर मंच और मौके पर उन्हें देश के अगले पीएम के तौर पर प्रोजेक्ट किया जा रहा है. वहीं दूसरी ओर, जिन सहयोगी दलों के बूते कांग्रेस राहुल को पीएम बनाने का सपना देख रही है, उन्हीं दलों के नेता दो टूक कह देते हैं कि प्रधानमंत्री का नाम तो चुनाव परिणाम के बाद ही तय किया जाएगा. ऐसे में विपक्ष की सहमति से राहुल को प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी बनना दूर की कौड़ी नजर आ रहा है. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में भी कांग्रेस का गठबंधन नहीं हो पाया और बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने तो इसके लिए कांग्रेस को ही जिम्मेदार ठहराया है.

सपा-बसपा ने लिया है यह स्टैंड

बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती जहां खुद को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर देख रही हैं, ऐसे में वह किसी दूसरे के नाम पर राजी कैसे हो सकती हैं. वहीं, समाजवादी पार्टी ने साफ संकेत दिये हैं कि उसे राहुल गांधी की पीएम पद की उम्मीदवारी पर आपत्ति है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने समय-समय पर स्पष्ट किया है कि विपक्ष की तरफ से पीएम कैंडिडेट कौन होगा, इसका फैसला चुनाव के नतीजों के बाद लिया जाएगा.

मुलायम सिंह, तेजस्वी को भी राहुल नागवार

समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव ने स्पष्ट संकेत दिये हैं कि वह कांग्रेस को राष्ट्रीय पार्टी के तौर पर नहीं देखते हैं और राहुल गांधी को अपना नेता किसी भी तरह से नहीं मानते हैं. वहीं, लालू यादव के जेल जाने के बाद पार्टी संभाल रहे तेजस्वी यादव ने इशारा कर चुके हैं कि विपक्ष में कई ऐसे नेता हैं, जो प्रधानमंत्री पद के दावेदार हैं. राहुल की दावेदारी के बारे पूछने पर तेजस्वी यादव कह चुके हैं कि राहुल गांधी के साथ-साथ ममता बनर्जी, शरद पवार, मायावती भी प्रधानमंत्री बनने की योग्यता रखते हैं. इसका मतलब साफ है कि राजद भी पूरी तरह से राहुल गांधी के साथ नहीं है.

ममता को भी राहुल स्वीकार नहीं

तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री विपक्षी गठबंधन की बड़ी नेता हैं. राहुल गांधी को लेकर ममता का रुख किसी से छिपा नहीं है. अभी हाल ही में कोलकाता में एक रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया था. यही नहीं, उन्होंने कांग्रेस और वाम दलों को बीजेपी के साथ हाथ नहीं मिलाने की चेतावनी भी दी थी. ममता के बयान से साफ है कि राहुल की अगुवाई उन्हें कतई स्वीकार नहीं. कहा तो यह भी जाता है कि ममता बनर्जी ने अभी तक राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनने की बधाई नहीं दी है और वो यह भी कह चुकी हैं कि राहुल अभी बच्चे हैं.

एक अनार, सौ बीमार

जहां राहुल गांधी पहले ही पीएम पद के लिए खुद के नाम का एेलान कर चुके हैं, वहीं विपक्ष अधिकतर नेताखुद को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार मान रहे हैं. शरद पवार, मायावती, ममता बनर्जी की महत्वाकांक्षाएं जगजाहिर हैं. माना यह भी जा रहा है कि 11 दलों के शीर्ष नेताओं ने 2019 में गठबंधन की सरकार बनने की सूरत में खुद को पीएम पद के तौर पर पेश करने के लिए अपनी कमर कस ली है.

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