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Lok Sabha Elections 2019 : यौन कर्मियों के लिए पेंशन, पहचान दस्तावेज, बैंक खाते अहम चुनावी मुद्दे

Updated at : 24 Apr 2019 1:37 PM (IST)
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Lok Sabha Elections 2019 : यौन कर्मियों के लिए पेंशन, पहचान दस्तावेज, बैंक खाते अहम चुनावी मुद्दे

नयी दिल्ली : चुनावी माहौल में महिला वोटरों को रिझाने के लिए महिला सशक्तिकरण और आरक्षण जैसे कई वादे विभिन्न चुनावी दलों ने किये हैं. लेकिन देश भर में यौनकर्मी के तौर पर काम करने वाली लगभग 50 लाख महिलाओं के लिए अभी भी चुनाव के अहम मुद्दे पहचान सुनिश्चित करने वाले सरकारी दस्तावेज, बैंक […]

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नयी दिल्ली : चुनावी माहौल में महिला वोटरों को रिझाने के लिए महिला सशक्तिकरण और आरक्षण जैसे कई वादे विभिन्न चुनावी दलों ने किये हैं. लेकिन देश भर में यौनकर्मी के तौर पर काम करने वाली लगभग 50 लाख महिलाओं के लिए अभी भी चुनाव के अहम मुद्दे पहचान सुनिश्चित करने वाले सरकारी दस्तावेज, बैंक खाते, पेंशन और उनके बच्चों को शिक्षा एवं स्वास्थ्य की सुविधा दिलवाना है.

बीते सप्ताह दिल्ली में विभिन्न महिला संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर जुलूस निकाला. इस जुलूस में कई यौनकर्मी और उनके बीच काम करने वाले संगठन भी शामिल हुए. दिल्ली के जीबी रोड में काम करने वाली एक यौनकर्मी अनीता (बदला हुआ नाम) ने कहा, ‘हमारे लिए सबसे अहम मुद्दा बैंक खातों और पेंशन का है. कलकत्ता के सोनागाछी में काम करने वाली अधिकतर यौनकर्मियों के बैंक खाते खुले हैं. इससे वह अपनी बचत की रकम उसमें जमा कर सकती हैं. लेकिन, दिल्ली या देश के अन्य शहरों में हम जैसी कई यौनकर्मियों के पास पहचान पत्र, आधार या अन्य किसी तरह के सरकारी दस्तावेज ही नहीं हैं. ऐसे में हमारे बैंक खाते कहां से खुलेंगे. जब एक उम्र के बाद हमारे पास काम नहीं होगा, तो उसके लिए हम अपनी बचत को जमा कैसे करेंगे? यदि हमारे बैंक खाते नहीं खुल सकते, तो सरकार को हमें 45 की उम्र के बाद कम से कम पेंशन ही देनी चाहिए.’

यौन कर्मियों के बीच काम करने वाले संगठन ‘ऑल इंडिया नेटवर्क ऑफ सेक्स वर्कर्स’ (एआईएनएसडब्ल्यू) की अध्यक्ष कुसुम ने कहा, ‘आमतौर पर समाज में लोग यौनकर्मियों को फिल्म या टेलीविजन में उनके चित्रण से जानने-समझने की कोशिश करते हैं. लेकिन, हकीकत में उनकी समस्याएं टीवी की दुनिया से बहुत अलग हैं. देश भर में महिला अधिकारों की बात हो रही है. हम चाहते हैं कि राजनीतिक दल हमें कम से कम महिलाओं के मूलभूत अधिकार देने की बात तो करें.’

उन्होंने कहा, ‘इस काम को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने की मांग हम पहले से कर रहे हैं. लेकिन इस क्षेत्र में मानव तस्करी भी एक बड़ी समस्या है. इसे लेकर यौनकर्मियों को कई तरह की पुलिस यातनाओं से भी गुजरना पड़ता है. हमने यौनकर्मी क्षेत्र में मानव तस्करी या जबरन किसी को इस काम में लगाने से रोकने के लिए कई शहरों में स्व-नियमन बोर्ड (एसआरबी) गठित करने में सफलता हासिल की है. हम चाहते हैं कि सरकार इस मॉडल को कानूनी मान्यता दे, ताकि मानव तस्करी को रोका जा सके.’

एक अन्य यौनकर्मी शबाना (बदला हुआ नाम) ने कहा कि यौनकर्मियों को मूलभूत स्वास्थ्य और उनके बच्चों को शिक्षा की सुविधा लेने में भी तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. यौनकर्मियों के रहने के स्थान, उनके काम के चयन को लेकर उन्हें सामाजिक सुविधाओं की प्राप्ति में भेदभाव और अपमान सहना पड़ता है. यौनकर्मियों के बच्चों को समान अवसर उपलब्ध नहीं होते. उन्हें स्कूलों में दाखिला नहीं मिलता और अस्पतालों में हमें जांच के दौरान हिकारत से देखा जाता है. सरकार को हमें इन भेदभावों से बचाने के लिए कुछ करना चाहिए.

कुसुम ने कहा कि यौनकर्मियों के बीच एक उम्र के बाद पैसे की तंगी सबसे बड़ी समस्या है. बैंक खाते खुलने से यह समस्या कुछ कम हो सकती है. वह अपनी बचत की रकम को जमा करके रख सकती हैं. नोटबंदी के दौरान कई यौनकर्मियों को इस समस्या से दो-चार होना पड़ा, क्योंकि उनकी जमा रकम को वह समय रहते बदल ही नहीं पायीं और जब दलालों से उन्होंने यह पैसे बदलवाये, तो उनकी जमा पूंजी का एक बड़ा हिस्सा टूट गया.

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