पहले रेल फिर तेल मोदी के अच्छे दिनों का दावा फेल!

नयी दिल्लीः पेट्रोल के दाम में 1.69 रुपये और डीजल के दाम में 50 पैसे की बढोतरी हुई है. इस बढोतरी के बाद एक बार फिर आम आदमी पर महंगाई का बोझ बढ़ गया है. नरेंद्र मोदी की सरकार से आम लोगों की जो उम्मीद बंधी थी. अब टूटती नजर आ रही है. सरकार पेट्रोल- […]
नयी दिल्लीः पेट्रोल के दाम में 1.69 रुपये और डीजल के दाम में 50 पैसे की बढोतरी हुई है. इस बढोतरी के बाद एक बार फिर आम आदमी पर महंगाई का बोझ बढ़ गया है. नरेंद्र मोदी की सरकार से आम लोगों की जो उम्मीद बंधी थी. अब टूटती नजर आ रही है. सरकार पेट्रोल- डीजल के दाम बढ़ने का जो कारण बता रही है, उसमें मुख्य रुप से इराक संकट और कच्चे तेल की कीमत में अंतराष्ट्रीय बाजार में हुई वृद्धि है. लेकिन अंतराष्ट्रीय बाजार में हालात अभी सुधरने वाली नहीं है. कच्चे तेल की कीमत में अभी और बढोतरी संभव है. मोदी सरकार इराक संकट को लेकर कई योजनाएं बनाने में लगी थी लेकिन इसका कोई खास असर नहीं हुआ. पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था, देश को तेल संकट से बचाने के लिए योजनाएं बनायी जा रही हैं, ताकि इराक संकट का असर भारत पर न पड़े.
बाजार के सूत्रों से भी सरकार की योजनाएं छनकर बाहर आ रही थी. जिसमें भारतीय तेल कंपनियां इस वर्ष 19.4 मिलियन मैट्रिक टन कच्चा तेल खरीदने की योजना बना चुकी थी. जिसमें से 18.7 मिलियन मैट्रिक टन इंडियन ऑयल और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के लिए खरीदा जाना था. लेकिन इन योजनाओं ने कितना काम किया और पेट्रोल और डीजल के दाम में कितनी कमी हुई यह आज पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से अंदाजा लगा. पेट्रोलियम मंत्री के राहत देने के दावे खोखले साबित हुए. इराक संकट को पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने का प्रमुख कारण बताया जा रहा है. इराक में जारी संघर्ष अभी थमने का नाम नहीं ले रहा है. चारों तरफ मौत की गोली और दहशत का बारूद उड़ रहा है इन सब के बीच इराकी सेना से लड़ रहे आतंकी संगठन द इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया यानी ISIS ने अपने अलग मुल्क का एलान कर दिया है.
इराक और सीरिया के कब्जे वाले अपने इलाके को अलग इस्लामी मुल्क घोषित कर दिया है. अगर आकड़ों की मानें, तो भारत लगभग 80 प्रतिशत तेल आयात करता है. इराक में आईएसआईएस के आतंकियों ने देश की सबसे बड़ी ऑइल रिफाइनरी पर हमला कर दिया इसका नुकसान इराक के साथ साथ भारत को भी उठाना पड़ा. इराक संकट के चलते भारत को अपनी तेल आयात रणनीति बदलनी पड़ेगी.
फिलहाल भारत इराक से सालाना 20 अरब डॉलर मूल्य के कच्चे तेल का आयात करता है. भले ही बढ़े हुए कीमतों का कारण जायज हो पर भाजपा विपक्ष में थी तो बढ़ी कीमतों पर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा था पहले रेल फिर तेल जनता समझती है कांग्रेस का खेल. अब सरकार में आने के बाद बढ़ी कीमतों पर भाजपा क्या जवाब देगी.
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