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मेघालय सरकार ने तय किया स्कूली बस्तों का वजन

Updated at : 13 Feb 2019 2:48 PM (IST)
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मेघालय सरकार ने तय किया स्कूली बस्तों का वजन

शिलांग : मेघालय सरकार ने छात्रों को बड़ी राहत देते हुए कक्षाओं के अनुसार स्कूली बस्तों का वजन तय किया है. साथ ही पहली और दूसरी कक्षा के लिए गृह कार्य पर भी प्रतिबंध लगा दिये हैं. राज्य शिक्षा विभाग के मुताबिक, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के निर्देशों के तहत स्कूल अधिकारियों को आधिकारिक […]

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शिलांग : मेघालय सरकार ने छात्रों को बड़ी राहत देते हुए कक्षाओं के अनुसार स्कूली बस्तों का वजन तय किया है. साथ ही पहली और दूसरी कक्षा के लिए गृह कार्य पर भी प्रतिबंध लगा दिये हैं. राज्य शिक्षा विभाग के मुताबिक, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के निर्देशों के तहत स्कूल अधिकारियों को आधिकारिक आदेश जारी किये गये हैं.

शिक्षा प्रमुख सचिव डीपी वहलांग ने कहा, ‘हमने स्कूल बैगों की वजन संबंधी सीमा तय करने के लिए अधिसूचना के जरिये निर्देश जारी किये हैं. यह केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप है.’ विभाग ने संस्थान प्रमुखों से ऐसा टाइम-टेबल बनाने को भी कहा है, जिससे छात्रों को ज्यादा किताबें और कॉपी स्कूल न लानी पड़ें.

अधिसूचना के अनुसार, ‘पहली और दूसरी कक्षा के बस्ते का वजन 1.5 किलोग्राम, तीसरी से पांचवीं तक की कक्षाओं के छात्रों के बैग तीन किलोग्राम से अधिक भारी नहीं होने चाहिए.’ विभाग ने कहा कि छठी और सातवीं कक्षा के लिए छात्रों के बैग अधिकतम चार किलोग्राम तक भारी हो सकते हैं. इसी तरह आठवीं और नौवीं के लिए 4.5 किलोग्राम और दसवीं के लिए पांच किलोग्राम की सीमा तय की गयी है.

आदेश में कहा गया, ‘स्कूलों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि छात्रों को टाइम-टेबल के हिसाब से ही किताबें लाने को कहा जाये.’ शिक्षा विभाग ने स्कूलों को पहली और दूसरी कक्षाओं के छात्रों को सीबीएसई, आईसीएसई या एमबीओएसई के पाठ्यक्रम के अलावा कोई गृह कार्य न देने भी निर्देश दिया है.

यहां बताना प्रासंगिक होगा कि नवंबर, 2018 में केंद्र सरकार ने स्कूली बस्तों के वजन पर एक गाइडलाइन जारी की थी. इसके बाद दिल्ली ने सबसे पहले इस नियम को लागू किया और बस्तों का वजन एक किलो से पांच किलो तक तय कर दिया. अब मेघालय ने भी इसे लागू कर दिया है.

भारी बस्तों से खतरे में बच्चों की सेहत

सरकार का मानना है कि भारी बस्तों से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है. इससे उनके वट्रिब्रल कॉलम और घुटनों को नुकसान हो सकता है. विशेषज्ञों का कहना था कि स्कूल बैग में किताबों के अलावा गाइड्स, होमवर्क/क्लासवर्क के नोटबुक्स, रफ वर्क नोट बुक्स, वाटर बॉटल, लंच बॉक्स की वजह से कई बार बहुत ज्यादा भारी हो जाते हैं. इसलिए पहली और दूसरी कक्षा के लिए सिर्फ तीन किताबों (हिंदी, अंग्रेजी और गणित) पढ़ाने की सलाह दी है. इन कक्षाओं के बच्चों को किसी प्रकार का होमवर्क नहीं दिया जायेगा.

इतना ही नहीं, छठी से 10वीं तक के बच्चों के लिए छह किताबें निश्चित की गयी हैं. इसमें तीन भाषाओं के साथ-साथ गणित, विज्ञान और समाज विज्ञान की किताबें होंगी. हर विषय के लिए प्रोजेक्ट्स, यूनिट टेस्ट, एक्सपेरिमेंट्स और एक्सरसाइज के लिए एक नोटबुक होगा, जिसके लिए स्कूल टाइम टेबल तय करेंगे, ताकि बच्चों को इतने सारे नोटबुक्स हर दिन स्कूल न ले जाना पड़े. यह भी सलाह दी गयी है कि यदि बच्चों को बस के लिए इंतजार करना पड़े या स्कूल असेंबली में बैग के साथ खड़ा होना पड़े, तो वे बैग को नीचे रख देंगे.

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