अब कॉलेज के पाठ्यक्रम में भ्रष्टाचार की रोकथाम का विषय

Updated at : 15 Jun 2014 1:15 PM (IST)
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अब कॉलेज के पाठ्यक्रम में भ्रष्टाचार की रोकथाम का विषय

नयी दिल्ली : लोकसभा चुनाव में भ्रष्टाचार का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाये जाने के बाद नई सरकार के तहत अब भ्रष्टाचार की रोकथाम के विषय को कालेज के पाठ्यक्रम में शामिल किये जाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, मानव संसाधन विकास […]

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नयी दिल्ली : लोकसभा चुनाव में भ्रष्टाचार का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाये जाने के बाद नई सरकार के तहत अब भ्रष्टाचार की रोकथाम के विषय को कालेज के पाठ्यक्रम में शामिल किये जाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है.

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सुझाव पर आयोग ने देश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को इस संबंध में पत्र लिखा है. कुलपतियों को यूजीसी के वित्तीय सलाहकार उपमन्यू बसु ने पत्र लिखकर भ्रष्टाचार की रोकथाम के विषय को कालेज के पाठ्यक्रम में शामिल करने का सुझाव दिया.

आयोग ने कुलपतियों से उच्च शिक्षण संस्थाओं में भ्रष्टाचार की रोकथाम के विषय पर शोध को बढ़ावा देने पर विचार करने को भी कहा है. अधिकारी ने कहा कि इस पहल का मकसद विश्वविद्यालय स्तर पर अनियमितता को हतोत्साहित करने के साथ छात्रों में इस बुराई के प्रति जागरुकता पैदा करना और जीवन में नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देना है.

आयोग ने इस विषय पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता का भी जिक्र करते हुए कहा कि भारत सरकार अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोधक अकादमी की गतिविधियों में सक्रियता से शामिल है और सभी तरह के भ्रष्टाचार को रोकने के लिए मंत्रालय ने यह पहल की है. आयोग ने नियामक के रुप में विश्वविद्यालय के कुलपतियों को अकादमिक एवं अनुदान संबंधी विषयों पर सलाह के संदर्भ में यह सुझाव दिया है.

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने विश्वविद्यालय को सुझाव में पाठ्यक्रम में विधि, लोक प्रशासन, मानवाधिकार जैसे पाठ्यक्रमों की तर्ज पर भ्रष्टाचार की रोकथाम के विषय को शामिल करने का आग्रह किया है. इससे पहले, दिल्ली में 16 दिसंबर सामूहिक बलात्कार कांड की घटना के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने पाठ्यपुस्तकों में नैतिक शिक्षा पर जोर देने की दिशा में पहल को आगे बढ़ाया था.

कुछ समय पहले ही केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने अपने दिशानिर्देश में कहा था कि पाठ्यपुस्तकों में नैतिक मूल्यों, लैंगिक संवेदनशीलता और समावेशी शिक्षा को ध्यान में रखा जाना चाहिए. समावेशी शिक्षा प्रदान करने के दौरान समाज के वंचित वर्ग और पहली पीढी के शिक्षा प्राप्त करने वाले बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए.

सीबीएसइ के अनुसार, पाठ्यपुस्तकों को जातीय, सांस्कृतिक, पर्यावरण, संवैधानिक दृष्टि से वैध होना चाहिए तथा इनमें नैतिक मूल्यों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए और इसमें कोई भी आपत्तिजनक सामग्री नहीं होनी चाहिए.

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