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कर्नाटक में कड़ी सुरक्षा के बीच मनाई जा रही टीपू जयंती

Updated at : 10 Nov 2018 6:54 PM (IST)
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कर्नाटक में कड़ी सुरक्षा के बीच मनाई जा रही टीपू जयंती

बेंगलुरू : कर्नाटक के मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति के बीच राज्य में शनिवार को टीपू जयंती मनाई जा रही है. वहीं, भाजपा और दक्षिणपंथी संगठन इन समारोहों का विरोध करते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं. टीपू सुल्तान 18वीं सदी में मैसूर रियासत के शासक रहे थे. उनका जन्म दिवस राज्य में टीपू जयंती […]

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बेंगलुरू : कर्नाटक के मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति के बीच राज्य में शनिवार को टीपू जयंती मनाई जा रही है. वहीं, भाजपा और दक्षिणपंथी संगठन इन समारोहों का विरोध करते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं. टीपू सुल्तान 18वीं सदी में मैसूर रियासत के शासक रहे थे. उनका जन्म दिवस राज्य में टीपू जयंती के तौर पर मनाया जा रहा है. भाजपा और अन्य संगठनों की धमकियों के मद्देनजर सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए गए हैं. बेंगलुरू में मुख्य कार्यक्रम फीका रहा है.
मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की अनुपस्थिति में उप मुख्यमंत्री जी परमेश्वर विधान सौध में मुख्य कार्यक्रम का उदघाटन करने वाले थे. लेकिन परमेश्वर भी कार्यक्रम में शरीक नहीं हुए. कुमारस्वामी ने कार्यक्रम में शरीक नहीं होने के लिए स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है. उन्होंने कहा कि चिकित्सकों ने उन्हें 11 नवंबर तक आराम करने की सलाह दी है. मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने कार्यक्रम में कुमारस्वामी के शरीक नहीं हो सकने के बारे में पूर्व घोषणा की थी और उनका नाम भी आमंत्रण पत्र पर नहीं छापा गया था. शहर से बाहर रहने के चलते परमेश्वर भी कार्यक्रम में शरीक नहीं हुए. उनके कार्यालय सूत्रों ने यह जानकारी दी.
कार्यक्रम से दूर रहने के मुख्यमंत्री के फैसले के बाद समारोहों को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन (कांग्रेस और जेडीएस) के बीच असहमति होने की खबरें आई थी. दरअसल, कुमारस्वामी ने विपक्ष में रहने के दौरान इस तरह के समारोहों की जरूरत पर सवाल उठाया था. इन कार्यक्रमों की शुरुआत पिछली सिद्धरमैया नीत कांग्रेस सरकार ने किया था. कुमारस्वामी ने अपनी पार्टी के गढ़ पुराने मैसूर क्षेत्र में वोटरों को नाराज नहीं करने के लिए कार्यक्रम से दूर रहने का विकल्प चुना. टीपू सुल्तान ने मैसूर के महाराज से शासन छीना था जबकि इस क्षेत्र में महाराज की एक तरह से पूजा होती है. हालांकि, सीएमओ ने कार्यक्रम में कुमारस्वामी की अनुपस्थिति पर एक बयान जारी किया.
टीपू जयंती समारोहों की सफलता की शुभकामना देते हुए जेडीएस नेता ने कहा कि प्रशासन में टीपू के प्रगतिशील कार्य, नवोन्मेष के प्रति उनका रुझान सराहनीय है. उन्होंने कहा कि वह चिकित्सकों की सलाह के चलते आराम कर रहे हैं, इसलिए वह कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके. सीएमओ ने बयान में कहा, ‘‘इसका कोई और मतलब निकालना अनावश्यक है.
यह भी सच से परे है कि वह सत्ता गंवाने के डर से कार्यक्रम में शरीक नहीं हो रहे हैं.” कुमारस्वामी नीत कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार के राज्य में सत्ता में आने के बाद से यह पहला टीपू जयंती समारोह है. भाजपा और कई हिंदूवादी संगठनों के विरोध के बावजूद सिद्धरमैया नीत पिछली कांग्रेस सरकार 2015 से हर साल 10 नवंबर को टीपू जयंती मना रही थी. इन समारोहों का विरोध करते हुए भाजपा और कई दक्षिणपंथी संगठन राज्य के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन कर रहे हैं.
प्रदेश भाजपा इकाई ने टीपू को एक धर्मांध शासक बताते हुए राज्य सरकार से टीपू जयंती मनाने का अपना फैसला बदलने का अनुरोध किया था. कोडागू जिला में साल 2015 में जब पहली बार आधिकारिक तौर पर टीपू जयंती मनाई गई थी, तब वहां बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और हिंसा हुई थी. जिले में टीपू जयंती विरोधी होराता समिति ने बंद का आह्वान किया है.
विधायक एमपी अप्पाचु रंजन के साथ भाजपा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने कोडागु जिले के मदीकेरी में हिरासत में ले लिया. ये लोग कार्यक्रम के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे. पुलिस ने बताया कि भाजपा के अन्य विधायक और विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष के जी बोपैया को प्रदर्शन के दौरान विराजपेट में हिरासत में ले लिया गया. मंगलूर में कुछ प्रदर्शनकारियों ने काले झंडे लेकर जिला पंचायत कार्यालय में घुसने की कोशिश की, जहां कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा था.
प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया. उत्तर कन्नड़ जिले के येल्लापुरा से भी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की खबरें हैं. चिकमंगलूर, बेल्लारी, कारवार और राज्य के विभिन्न हिस्सों से भी प्रदर्शन की खबरें हैं. कोडागू और चित्रदुर्ग जिलों, तटीय जिलों सहित अन्य क्षेत्रों में सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए हैं. इन इलाकों में स्थानीय लोग टीपू जयंती के विरोध में बताए जा रहे हैं. बेंगलूर के पुलिस आयुक्त टी.
सुनील कुमार ने कहा, ‘‘(बेंगलूर में) विधान सौध के आसपास करीब 500 पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को तैनात किया गया है. इस बीच, मुस्लिम नेताओं के एक समूह ने राज्य के मंत्री जमीर अहमद खान के साथ शनिवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धरमैया से मुलाकात की और टीपू जयंती के अवसर पर उन्हें सम्मानित किया. सिद्धरमैया ने टीपू को एक अच्छा प्रशासक बताया और टीपू जयंती समारोहों का विरोध करने को लेकर भाजपा पर प्रहार किया.
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