पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ रही है मांग, तलाशें अपना करियर, यहां संभावनाएं अनंत हैं

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 10 Sep 2018 6:23 AM

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एक ओर जहां पूरी दुनिया में पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती मांग को कैसे पूरा किया जाए इसपर काम किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह भी कोशिश की जा रही है कि ज्यादा से ज्यादा पेट्रोलियम उत्पादों की तलाश की जाये. दुनिया भर में पेट्रोलियम उत्पादों की मांग की जरूरत लगातार बढ़ रही है. […]

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एक ओर जहां पूरी दुनिया में पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती मांग को कैसे पूरा किया जाए इसपर काम किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह भी कोशिश की जा रही है कि ज्यादा से ज्यादा पेट्रोलियम उत्पादों की तलाश की जाये. दुनिया भर में पेट्रोलियम उत्पादों की मांग की जरूरत लगातार बढ़ रही है. ऐसे में इनकी खोज और उत्पादन के लिए बड़े स्तर पर प्रयास किये जा रहे हैं. इस प्रयास को अंजाम देने के लिए ऐसे कुशल लोगों की जरूरत पड़ रही है, जो इस क्षेत्र के जानकार हों. पेट्रोलियम उत्पादों की खोज और उत्पादन के लिए पेट्रोलियम इंजीनियरों की जरूरत होती है. ऐसे में यह ऐसा सेक्टर साबित हो रहा है, जहां संभावनाएं अनंत हैं.
काम की प्रकृति
तेल, गैस और इससे जुड़े अन्य उत्पादों की खोज करने वाले पेट्रोलियम इंजीनियर को जियोलॉजी, फिजिक्स, केमिस्ट्री, इकोनॉमिक्स और मैकेनिकल इंजीनियरिंग का ज्ञान होना जरूरी है. पेट्रोलियम इंडस्ट्री मुख्यत: तेल की खोज, ड्रिलिंग, प्रोडक्शन, रिजर्व मैनेजमेंट, ट्रांसपोर्ट और मशीनरी जैसे अलग-अलग हिस्सों से मिलकर बनी है. पेट्रोलियम इंजीनियर इन अलग-अलग हिस्सों के एक्सपर्ट होते हैं, जो इंजीनियर जिस फील्ड का एक्सपर्ट है, उसे उस क्षेत्र का कार्यभार सौंपा जाता है. दुनियाभर में इस समय साधारण भौगोलिक क्षेत्र वाले स्थानों में पेट्रोल की खोज की जा चुकी है. अब वह स्थान बचे हैं, जहां की भौगोलिक संरचना थोड़ी मुश्किल है. ऐसी जगहों पर पेट्रोल-गैस की खोज करना मुश्किल है.
लेकिन पेट्रोलियम इंजीनियर मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियों में भी अपने काम को बखूबी अंजाम देते हैं. यही कारण है कि एक कुशल पेट्रोलियम इंजीनियर को लाखों रुपये की सैलरी मिलती है. पेट्रोलियम इंडस्ट्री में सामान्य तौरपर ज्यादातर काम मशीनों से ही होता है, लेकिन कभी-कभी कुछ परिस्थितियां ऐसी आ जाती हैं कि बड़े से बड़े इंजीनियर को भी हाथों से मशीनों को ऑपरेट करना पड़ जाता है. ज्यादातर दिमागी कार्यक्षमता वाला यह क्षेत्र इस तथ्य पर आधारित होता है कि आप कितने मेहनतकश हैं.
व्यक्तिगत कौशल है जरूरी
इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए उम्मीदवार का संयमी होना जरूरी है. इस गुण के चलते मशीनों में किसी किस्म की खराबी होने पर आप शांति से मशीन को ठीक करने में रुचि लेंगे. यदि आप संयम नहीं बरत पा रहे हैं, तो जिस मशीन को ठीक करने में एक घंटे लगते हैं, उसमें आप चार से पांच घंटे बर्बाद कर सकते हैं. पेट्रोलियम इंडस्ट्री के क्षेत्र में सफल होने में टीम भावना भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. इसलिए एक टीम के रूप में काम करने की आदत इस पेशे की विशेष मांग है.
यह है योग्यता
इस क्षेत्र में प्रवेश के लिए अंडर ग्रेजुएट कोर्स और कई डिग्री प्रोग्राम कराये जाते हैं. अंडर ग्रेजुएट कोर्स के लिए साइंस स्ट्रीम से 12वीं पास होना चाहिए. पीजी कोर्स के लिए किसी भी इंजीनियरिंग स्ट्रीम से बैचलर डिग्री होना जरूरी है. देश में तमाम इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट पेट्रोलियम इंजीनियरिंग का कोर्स कराते हैं. इन संस्थानों में अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम की समय सीमा चार साल और पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम की समय सीमा दो साल निर्धारित होती है. कोर्स की फीस मुख्यत: संस्थान द्वारा तय मानक के आधार पर निर्धारित की जाती है.
ये हैं प्रमुख संस्थान
इंडियन स्कूल ऑफ माइंस, धनबाद
महाराष्ट्र इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पुणे
राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी, रायबरेली
उत्तरांचल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, देहरादून
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