गिरफ्तार कार्यकर्ताओं के समर्थन में उतरे रिटायर्ड जज और वकीलों ने की महाराष्ट्र पुलिस की आलोचना
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 01 Sep 2018 8:06 PM
मुंबई : कुछ सेवानिवृत्त न्यायाधीशों और वरिष्ठ वकीलों ने इस हफ्ते गिरफ्तार किये गये वामपंथी कार्यकर्ताओं के माओवादियों से कथित संबंधों की जांच के तौर पर जुटाये गये सबूतों का खुलासा मीडिया के सामने करने को लेकर शनिवार को महाराष्ट्र पुलिस की आलोचना की. बहरहाल, कानूनी बिरादरी के कुछ अन्य लोगों ने कहा कि इस […]
मुंबई : कुछ सेवानिवृत्त न्यायाधीशों और वरिष्ठ वकीलों ने इस हफ्ते गिरफ्तार किये गये वामपंथी कार्यकर्ताओं के माओवादियों से कथित संबंधों की जांच के तौर पर जुटाये गये सबूतों का खुलासा मीडिया के सामने करने को लेकर शनिवार को महाराष्ट्र पुलिस की आलोचना की. बहरहाल, कानूनी बिरादरी के कुछ अन्य लोगों ने कहा कि इस बारे में कोई नियम नहीं है कि पुलिस को किसी मामले में दस्तावेजों का खुलासा करना चाहिए या नहीं.
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अतिरिक्त महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) परमबीर सिंह ने यहां शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन में मामले की जानकारियां देते हुए कार्यकर्ताओं के कथित पत्रों को पढ़ा. पुलिस ने यह भी दावा किया कि उनके पास जून और इस सप्ताह गिरफ्तार वामपंथी कार्यकर्ताओं के माआवोदियों से संबंधों के ‘ठोस सबूत’ है. साथ ही, पुलिस ने कहा कि इनमें से एक कार्यकर्ता ने ‘मोदी राज को खत्म करने के लिए राजीव गांधी जैसी घटना’ को अंजाम देने की बात कही थी.
इस मामले में बंबई हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज पीडी कोडे ने कहा कि जांच के तौर पर जुटाये गये सबूतों का खुलासा करना गलत है. उन्होंने कहा कि किसी मामले के प्राथमिक चरण में पुलिस का काम सबूत जुटाना और उसे आरोपपत्र के तौर पर अदालत के समक्ष पेश करना होता है. पुलिस को ऐसे शुरुआती स्तर पर कोई राय नहीं बनानी चाहिए.
वहीं, वरिष्ठ वकील मिहिर देसाई ने इस बात पर हैरानी जतायी कि राज्य पुलिस ने किस तरीके से संवाददाता सम्मेलन बुलाया. देसाई ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ सबूत के तौर पर दस्तावेजों को पढ़ना गलत है. पुलिस ने इन दस्तावेजों को अदालत या बचाव पक्ष के वकीलों को नहीं दिया.
इसके अलावा, एक सरकारी अभियोजक ने गोपनीयता की शर्त पर कहा कि सबूतों का खुलासा करने का पुलिस का कदम ‘मूर्खतापूर्ण’ है. हाल में कांग्रेस में शामिल होने वाले बंबई हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज अभय थिप्से ने कहा कि ऐसे नियम नहीं है कि पुलिस को किसी मामले में दस्तावेजों का खुलासा करना चाहिए या नहीं.
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