निजी जानकारी साझा करने के लिये यूजर्स के साथ चालाकी कर रही फेसबुक व गूगल

ओस्लो/नयी दिल्ली: एक सरकारी अध्ययन में कहा गया है कि यूरोपीय संघ का एक नया कानून होने के बावजूद सोशल मीडिया वेबसाइट फेसबुक तथा सर्च इंजन गूगल हेरफेर और चालाकी दिखाते हुये अपने उपयोगकर्ताओं से उनकी निजी सूचनायें देने पर जोर दे रही है. नार्वेजियन कंज्यूमर काउंसिल ने अपने अध्ययन में यह निष्कर्ष निकाला है. […]
ओस्लो/नयी दिल्ली: एक सरकारी अध्ययन में कहा गया है कि यूरोपीय संघ का एक नया कानून होने के बावजूद सोशल मीडिया वेबसाइट फेसबुक तथा सर्च इंजन गूगल हेरफेर और चालाकी दिखाते हुये अपने उपयोगकर्ताओं से उनकी निजी सूचनायें देने पर जोर दे रही है.
नार्वेजियन कंज्यूमर काउंसिल ने अपने अध्ययन में यह निष्कर्ष निकाला है. इसके अनुसार ये कंपनियां उपयोगकर्ताओं को सीमित ‘ डिफाल्ट ‘ विकल्प ही उपलब्ध करवा रही हैं. जबकि यूरोपीय संघ (ईयू) के नये डेटा संरक्षण नियमों में डेटा गोपनीयता के बारे में उपयोक्ता को अधिक नियंत्रण व विकल्प देने का प्रावधान किया गया है.
काउंसिल का कहना है इन अमेरिकी कंपनियों की गोपनीयता संबंधी संशोधित नीति सामान्य डेटा संरक्षण नियमन (जीडीपीआर) के भी प्रतिकूल है. जीडीपीआर में भी यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि निजी सूचना साझी करते समय उपयोक्ताओं को क्या विकल्प दिये गये हैं.
काउंसिल के निदेशक (डिजिटल सेवा) फिन मिरस्टेड ने कहा कि ये कंपनियां हमें अपनी ही निजी जानकारी साझा करने के लिए एक तरह से चालाकी दिखाते हुये ‘ उलझाती ‘ हैं. उन्होंने कहा कि कंपनियों का व्यवहार दर्शाता है कि उनमें उपयोक्ताओं के लिए ‘ सम्मान कम है. ‘
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