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मोदी सरकार का फैसला : बलात्कार के लिए न्यूनतम सजा सात से बढ़ाकर 10 वर्ष की गयी

Updated at : 21 Apr 2018 8:39 PM (IST)
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मोदी सरकार का फैसला : बलात्कार के लिए न्यूनतम सजा सात से बढ़ाकर 10 वर्ष की गयी

नयी दिल्ली : अदालतों को 12 साल तक की आयु की बच्चियों से दुष्कर्म के दोषियों को मौत की सजा देने की इजाजत देनेवाला अध्यादेश बलात्कार के लिए न्यूनतम सजा सात वर्ष से बढ़ाकर 10 वर्ष करता है. इसके लिए अधिकतम सजा आजीवन कारावास है. दिसंबर 2012 में निर्भया मामले के बाद आपराधिक कानूनों में […]

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नयी दिल्ली : अदालतों को 12 साल तक की आयु की बच्चियों से दुष्कर्म के दोषियों को मौत की सजा देने की इजाजत देनेवाला अध्यादेश बलात्कार के लिए न्यूनतम सजा सात वर्ष से बढ़ाकर 10 वर्ष करता है. इसके लिए अधिकतम सजा आजीवन कारावास है.

दिसंबर 2012 में निर्भया मामले के बाद आपराधिक कानूनों में संशोधन किया गया था. इसके तहत किसी भी महिला से बलात्कार के लिए न्यूनतम सजा सात वर्ष की कठोर कारावास रखी गयी थी जो कि बढ़ाकर आजीवन कारावास की जा सकती थी. केंद्रीय कैबिनेट द्वारा शनिवार को मंजूर किये गये आपराधिक कानून संशोधन अध्यादेश के अनुसार अब किसी महिला से बलात्कार के लिए न्यूनतम सजा 10 वर्ष की कठोर कारावास होगी जो ‘आजीवन कारावास तक बढ़ायी जा सकती है.’ आजीवन कारावास का मतलब है कि दोषी को उसके ‘स्वभाविक जीवन’ तक जेल से रिहा नहीं किया जायेगा. अध्यादेश जारी होने के बाद भारतीय दंड संहिता, साक्ष्य अधिनियम, दंड प्रक्रिया संहिता और पोक्सो कानून भी संशोधित हो जायेंगे ताकि नये प्रावधानों के लिए मार्ग प्रशस्त हो सके.

इससे पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से दुष्कर्म के दोषियों को अदालतों द्वारा मौत की सजा देने संबंधी एक अध्यादेश को मंजूरी दी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस आपराधिक कानून संशोधन अध्यादेश 2018 को मंजूरी दी गयी. सरकार ने देश के कुछ हिस्सों में बलात्कार की घटनाओं पर गंभीर संज्ञान लिया है और ऐसी घटनाओं पर गहरा रोष व्यक्त किया है. ऐसी स्थिति से निपटने के लिए ठोस उपाय तैयार करने पर जोर दिया गया. आपराधिक कानून संशोधन अध्यादेश में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), साक्ष्य कानून, आपराधिक प्रक्रिया संहिता और बाल यौन अपराध संरक्षण कानून (पोक्सो) में संशोधन का प्रावधान है. इसमें ऐसे अपराधों के दोषियों के लिए मौत की सजा का नया प्रावधान लाने की बात कही गयी है.

जम्मू कश्मीर के कठुआ और गुजरात के सूरत जिले में हाल ही में लड़कियों से बलात्कार और हत्या की घटनाओं की पृष्ठभूमि में यह कदम उठाया गया है. अब इस अध्यादेश को मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जायेगा. इसमें 16 वर्ष से कम आयु की किशोरियों और 12 वर्ष से कम आयु की बच्चियों से बलात्कार के दोषियों के खिलाफ सख्त दंड का प्रावधान किया गया है. इसके तहत 12 साल से कम उम्र के बच्चियों से दुष्कर्म के दोषियों को अदालतों द्वारा मौत की सजा देने की बात कही गयी है.। इसके अलावा बलात्कार के मामलों की तेज गति से जांच और सुनवाई के लिए भी अनेक उपाए किये गये हैं. महिला के साथ बलात्कार के संदर्भ में सजा को 7 वर्ष से बढ़ाकर 10 वर्ष के कारावास किया गया है जिसे बढ़ाकर उम्र कैद किया जा सकता है. इसके साथ ही 16 वर्ष से कम आयु की किशोरी से बलात्कार के दोषियों को न्यूनतम सजा को 10 वर्ष कारावास से बढ़ाकर 20 वर्ष कारावास किया गया है जिसे बढ़ा कर उम्र कैद किया जा सकता है.

16 वर्ष से कम आयु की किशोरी से सामूहिक बलात्कार के दोषियों की सजा शेष जीवन तक की कैद होगी. बारह साल से कम उम्र के बच्चियों से दुष्कर्म के दोषियों को अदालतों द्वारा कम से कम 20 साल कारावास की सजा या मृत्यु दंड होगी. बारह साल से कम उम्र की लड़कियों से सामूहिक बलात्कार के दोषियों को शेष जीवन तक कैद या मौत की सजा का प्रावधान किया गया है. इसमें बलात्कार से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई का काम दो महीने में पूरा करने का प्रावधान किया गया है. ऐसे मामलों में अपील की सुनवाई छह महीने में पूरा करने की बात कही गयी है. इसमें यह कहा गया है कि 16 वर्ष से कम आयु की किशोरी से बलात्कार या सामूहिक बलात्कार के आरोपी लोगों के लिए अग्रिम जमानत का कोई प्रावधान नहीं होगा. इसमें राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों के साथ विचार-विमर्श करके त्वरित निपटान अदालतों के गठन की बात कही गयी है.

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