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नेफ्यू रियो : कांग्रेस का असंतुष्ट नेता कैसे बन गया भाजपा के लिए नागालैंड में सत्ता की सीढ़ी?

Updated at : 08 Mar 2018 12:17 PM (IST)
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नेफ्यू रियो : कांग्रेस का असंतुष्ट नेता कैसे बन गया भाजपा के लिए नागालैंड में सत्ता की सीढ़ी?

‘सेवेन्थ सिस्टर’ के नाम से मशहूर देश के पूर्वोत्तर हिस्सों के सात राज्यों में बीजेपी के लिए पांव जमा पाना आसान नहीं था.इसलिए नार्थइस्ट में जीत के बाद भाजपा के शीर्ष नेता व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारा दिया नो वन से वून, यानी जब हमारा वहां कोई आदमी नहीं था, वहां हम विजयी हुए […]

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‘सेवेन्थ सिस्टर’ के नाम से मशहूर देश के पूर्वोत्तर हिस्सों के सात राज्यों में बीजेपी के लिए पांव जमा पाना आसान नहीं था.इसलिए नार्थइस्ट में जीत के बाद भाजपा के शीर्ष नेता व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारा दिया नो वन से वून, यानी जब हमारा वहां कोई आदमी नहीं था, वहां हम विजयी हुए हैं. दिलचस्प बात यह कि इन राज्यों में भाजपा को कांग्रेस के अंसतुष्ट नेताओं का साथ मिला. बीजेपीको नये बनते समीकरण काम आये और अब त्रिपुरा, मेघालय समेत नागालैंड में भी पार्टी सत्ता में आ गयी है. नागालैंड में नेफ्यू रियो ने 11 कैबिनेट मंत्रियों के साथ आज शपथ लिया. कांग्रेस के ढहते संगठन के सबसे बड़े प्रतीक के रूप में उभरे नेफ्यू रियो नागालैंड के सबसे बड़े नेता हैं.नागालैंड के तीन बार मुख्यमंत्री और लोकसभा सदस्य रहे नेफ्यू रियो शुरुआती राजनीति में वह कांग्रेस पार्टी के हिस्सा थे.

रियो 1989 में नागालैंड के अंगामी पार्टी से चुनाव लड़ा और विधायक बने. चुनाव जीतने के बाद उन्हें शिक्षा व खेल मंत्रालय का जिम्मा संभाला. रियो ने नागालैंड इंडस्ट्रियल डेवलेपमेंट कॉरपोरेशन के अध्यक्ष पद भी संभाला. नेफ्यू रियो ने जब कांग्रेस छोड़ा उस वक्त वह नागालैंड के गृह मंत्री थे. नागा मुद्दे पर भड़क कर उन्होंनेतत्कालीनमुख्यमंत्री एससी जमीर को अपना त्यागपत्र सौंप दिया था.
कांग्रेस से नाता तोड़ने के बाद रियो ने ‘नागा पीपल्स फ्रंट’ ज्वाइन कर लिया. इस दौरान उनकी नजदीकी भाजपा से बढ़ती गयी. 2003 में उन्होंने भाजपा के साथ चुनाव लड़ा और कांग्रेस की सत्ता को उखाड़कर फेंका. दस साल तक लगातार सत्ता में रही कांग्रेस पार्टी का प्रभाव समाप्त होने लगा.
नागालैंड के सबसे बड़े नेताहैंनेफ्यू रियो?
नागालैंड में नेफ्यू रियो को सबसे बड़ा नेता माना जाता है. विरोधियों में भी उनका सम्मान किया जाता है. एक आंकड़े के मुताबिक वह नागालैंड के सबसे अमीर नेताओऎं में भी गिने जाते हैं. उनकी कुल संपत्ति 36.4 करोड़ है. नागालैंड के 60 सीटों में नेफ्यू की पार्टी ने 40 सीटों पर चुनाव लड़ा. 2003 में कांग्रेस से टूटने के बाद उन्होंने नागा पीपल्स फ्रंट से नाता जोड़ा. नेफ्यू रियो ने एक बार फिर नागा पीपल्स फ्रंट से नाता तोड़ा और नेशनल डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी बना बीजेपी से जुड़े.
नेफ्यू रियो नागालैंड के पहले ऐसे नेता हैं जो तीन बार सीएम बने और अब चौथी बाद पद संभाला है. वे अंगामी नागा आदिवासी हैं. 67 वर्षीय नेफ्यू रियो नेे शुरुआती शिक्षा कोहिमा के बेपटिस्ट इंग्लिश स्कूल में हासिल की. फिर उन्होंने पश्चिम बंगाल के पुरलिया में सैनिक स्कूल से पढाई की. उन्होंने दार्जिलिंग के सेंट जोसेफ कॉलेज व कोहिमा को आर्ट कॉलेज में उच्च शिक्षा हासिल की.

दरअसल, नेफ्यू रियो ही नहीं असम और मेघालय में भी कांग्रेस के पूर्व नेता भी भाजपा के लिए सत्ता में पहुंचने का माध्यम बने. असम में भाजपा सरकार में नंबर दो कीहैसियतरखने वाले शख्स हेमंत बिस्वा सरमा पूर्व कांग्रेस नेता हैं और हालिया चुनाव में पूर्वोत्तर विजय के वे बड़े सूत्रधार हैं. असम के भाजपाई मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनेवाल पहले असम गण परिषद के नेता हैं. मेघालय में भी भाजपा जिनके जरिये सत्ता में आयी उनका पूर्व में कांग्रेस से नाता रहा है.

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