श्रीदेवी के अंतिम संस्कार के बाद कुमार विश्वास का मीडिया पर तंज भरा ट्वीट, एसएससी स्कैम की चर्चा

नयी दिल्ली : आम आदमी पार्टी के नेता व कवि कुमार विश्वास ने आज श्रीदेवी के निधन पर व्यापक मीडिया कवरेज को लेकर बिना अभिनेत्री का नाम लिये मीडिया पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि अब वे दूसरी ओर भी ध्यान दे. श्रीदेवी का दाह संस्कार संपन्न होने के बाद कुमार विश्वास ने ट्वीट […]
नयी दिल्ली : आम आदमी पार्टी के नेता व कवि कुमार विश्वास ने आज श्रीदेवी के निधन पर व्यापक मीडिया कवरेज को लेकर बिना अभिनेत्री का नाम लिये मीडिया पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि अब वे दूसरी ओर भी ध्यान दे. श्रीदेवी का दाह संस्कार संपन्न होने के बाद कुमार विश्वास ने ट्वीट किया – भारतीय मीडिया से अनुरोध है कि यदि वो बाथटब से बाहर आ गयी तो गर्त में जा रहे युवाओं के भविष्य की भी थोड़ी सुध ले ले. उन्होंने एसएससी स्कैम हैसटैग के साथ यह ट्वीट किया है और वे इस ओर मीडिया का ध्यान खींचना चाहते हैं.
भारतीय मीडिया से अनुरोध है कि यदि वो “बाथटब” से बाहर आ गई हो गर्त में जा रहे युवाओं के भविष्य की भी थोड़ी सुध ले ले ! 🙏 #sscscam
— Dr Kumar Vishvas (@DrKumarVishwas) February 28, 2018
ध्यान रहे कि अभिनेत्री श्रीदेवी का निधन दुबई में बाथटब में डूबने से हुआ था. कुमार विश्वास ने आज सुबह भी एक ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने लिखा था – चांदनी के लम्हे, आखिरी रास्ता पर जुदाई की ओर हैं. हवा-हवाई सफर पर जाते हुए सदमा देती गयीं श्रीदेवी.
जवान सपनों की हत्या करके क्या हम “युवा-भारत” के निर्माण का स्वप्न भी देख सकते हैं ? रंगो के त्यौहार होली की पूर्वसंध्या पर, अगर देश का यौवन, न्याय की प्रत्याशा में सड़क पर है तो यह हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था पर आवश्यक प्रश्नचिह्न है ! जिसका उत्तर मिलना ही चाहिए 👎 #sscscam
— Dr Kumar Vishvas (@DrKumarVishwas) February 28, 2018
कुमार विश्वास ने एसएससी स्कैम हैसटैग के साथ एक ट्वीट करते हुए लिखा है – माएं गहने गिरवी रख कर होनहार बेटे-बेटियों के जिस सपने को देखती हैं, उसे व्यवस्था के दलाल एसएससी स्कैम करके बेच देते हैं. युवा-पीढ़ी का यूं इस भ्रष्ट सिस्टम के सामने बेहस हो जाना पूरे देश और मीडिया के लिए गहन चिंतन का विषय होना चाहिए.
उन्हाेंने एक ट्वीट में लिखा है कि एसएससी कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल एक्जाम पेपर का लिक होना और फिर परीक्षा रद्द होना दुर्भाग्यपूर्ण है. 30 लाख से अधिक सपने चूर-चूर हो गये. हम में से किसी को कौन यह लाखों के भविष्य से खेलने की अनुमति देता है. यह सिर्फ एक परीक्षा का मामला नहीं है, इसके पीछे सपने हैं. यह समाज पर हमला है. लोग दिन-रात एक कर परीक्षा की तैयारी करते हैं. उन्होंने देश में रोजगार की बुरी स्थिति पर भी चिंता जतायी है.
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