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अन्ना ने राजघाट से शुरू किया सत्याग्रह, मोदी सरकार को याद दिलाया ''अच्छे दिन का वादा''

Updated at : 02 Oct 2017 7:04 PM (IST)
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अन्ना ने राजघाट से शुरू किया सत्याग्रह, मोदी सरकार को याद दिलाया ''अच्छे दिन का वादा''

नयी दिल्ली : समाजासेवी अन्ना हजारे ने देश में भ्रष्टाचार से निपटने के लिये किये जा रहे प्रयासों को नाकाफी बताते हुये गांधी जयंती के अवसर पर आज यहां राजघाट पर एक दिवसीय उपवास कर भ्रष्टाचार के खिलाफ सत्याग्रह की शुरुआत की. हजारे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर भ्रष्टाचार के खिलाफ चुनाव पूर्व […]

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नयी दिल्ली : समाजासेवी अन्ना हजारे ने देश में भ्रष्टाचार से निपटने के लिये किये जा रहे प्रयासों को नाकाफी बताते हुये गांधी जयंती के अवसर पर आज यहां राजघाट पर एक दिवसीय उपवास कर भ्रष्टाचार के खिलाफ सत्याग्रह की शुरुआत की.

हजारे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर भ्रष्टाचार के खिलाफ चुनाव पूर्व किये गये अच्छे दिनों के वादे की याद दिलाते हुये उन्हें सत्याग्रह शुरू करने की जानकारी दी. सुबह दिल्ली पहुंचने पर हजारे ने संवाददाताओं से कहा, आज दो अक्टूबर को गांधी जयंती है, हमारे देश को आजाद हुये 70 साल हो गये हैं, लेकिन गांधी जी के सपनों के भारत से हम भटक गये हैं. यही वजह है कि मैं गांधी जी की समाधि से अपना सत्याग्रह शुरू कर रहा हूं.

उन्होंने दिन में लगभग 11 बजे राजघाट पहुंचने पर बापू को श्रद्धासुमन अर्पित करने के बाद लगभग तीन घंटे तक मौन साधना की. इससे पहले मोदी को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि आज गांधी जयंती के अवसर पर आत्मचिंतन करते हुए मन बड़ा दुखी है. हजारे ने भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाने के लिए देश में लोकपाल की नियुक्ति करने, विदेशों में जमा काला धन वापस लाने, कृषि उपज का पूरा दाम दिलाकर किसानों की आत्महत्या रोकने जैसे चुनावपूर्व किये गये तमाम वादों का जिक्र करते हुये हालात में कोई बदलाव नहीं आने पर दुख व्यक्त किया. उन्होंने लिखा कि न लोकपाल की नियुक्ति हुई, ना विदेश से काला धन वापस आया और ना ही नोटबंदी से देश में छुपाये काले धन का जनता को हिसाब मिला.
किसानों की आत्महत्या भी नहीं रुकी. भ्रष्टाचार दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है. इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुये उन्होंने पूछा कि क्या महात्मा गांधी, सरदार बल्लभ भाई पटेल और शहीद भगत सिंह का सपना पूरा हुआ. हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ 2012 में किये गये अपने आंदोलन की याद दिलाते हुये कहा कि उस समय भाजपा नेताओं ने लोकपाल की नियुक्ति का वादा किया था लेकिन भाजपा सरकार बनने के तीन साल बाद भी यह बात अधूरी है. इतना ही नहीं उन्होंने मोदी को भी तीन साल से लगातार इस बात की याद दिलाते हुए कहा कि मैंने आपको इस बारे में पत्र लिखे, लेकिन आपने किसी पत्र का जबाब भी नहीं दिया.
हजारे ने मौजूदा हालात में भ्रष्टाचार को खत्म करने के बजाय लोकतंत्र को कमजोर करने और पार्टीतंत्र को मजबूत करने की कोशिशें होने पर दुख जताया. उन्होंने कहा कि मैंने अपना संपूर्ण जीवन को समाज और देश के लिए समर्पित किया है. कई सालों से मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहां हूं. लेकिन कभी किसी व्यक्ति या दल के खिलाफ आंदोलन नहीं किया. सिर्फ व्यवस्था परिवर्तन के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष कर रहा हूं.
भ्रष्टाचार से देश के आम आदमी की बढ़ती मुसीबतों को खत्म करने का वादा पूरा नहीं होने की शिकायत करते हुये हजारे ने कहा, इससे व्यथित हो कर मैं आज महात्मा गांधीजी की जयंती के अवसर पर उनके चरणों में देश के लिए प्रार्थना तथा सत्याग्रह करने जा रहा हूं.
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