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सेना के दो अधिकारी की पत्नियों के बीच हुई मारपीट, मामला पहुंचा PMO, रिपोर्ट तलब

Updated at : 25 Jul 2017 8:49 PM (IST)
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सेना के दो अधिकारी की पत्नियों के बीच हुई मारपीट, मामला पहुंचा PMO, रिपोर्ट तलब

नयी दिल्ली : पंजाब के एक सैन्य अड्डे पर दो अधिकारियों की पत्नियों के बीच कथित झड़प का मामला प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) पहुंच गया है. यहां आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि दोनों महिलाओं के बीच करीब एक हफ्ते पहले आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसियेशन (एडब्ल्यूडब्ल्यूए) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में झड़प हुई. […]

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नयी दिल्ली : पंजाब के एक सैन्य अड्डे पर दो अधिकारियों की पत्नियों के बीच कथित झड़प का मामला प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) पहुंच गया है. यहां आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि दोनों महिलाओं के बीच करीब एक हफ्ते पहले आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसियेशन (एडब्ल्यूडब्ल्यूए) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में झड़प हुई.

सूत्रों के अनुसार पीएमओ ने सेना मुख्यालय से घटना को लेकर रिपोर्ट मांगी है. सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मामले से सेना के शीर्ष अधिकारी शर्मिंदा हैं. इस तरह के मामलों की जांच आमतौर पर अंदरुनी स्तर पर होती है. सूत्रों ने बताया कि यह लड़ाई तब शुरू हुई जब सेना अड्डे के कमांडिंग ऑफिसर की पत्नी ने कथित रूप से एक लेफ्टिनेंट कर्नल की पत्नी से दुर्व्यवहार किया.

सीओ की पत्नी ने दूसरी महिला के साथ मारपीट भी की. उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में कई वरिष्ठ अधिकारी और उनकी पत्नियां मौजूद थीं. लेफ्टिनेंट कर्नल ने पीएमओ, पंजाब पुलिस तथा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से मामले की शिकायत की है. सूत्रों ने कहा कि अल्पसंख्यक आयोग भी मामले की जांच कर रहा है.

सूत्रों के अनुसार सेना कर्मियों की पत्नियां सेना अधिनियम के दायरे में नहीं आती लेकिन इस तरह के मामलों से निपटने के कई तरीके हैं. उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों से निपटने के लिए आमतौर पर काउंसलिंग सत्र आयोजित किये जाते हैं.

आपको बताते चलें कि जिस अधिकारी की पत्‍नी के बदसलूकी की गयी थी उस अधिकारी ने प्रधानमंत्री को शिकायत दर्ज करते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय महिला आयोग, सीबीआई और डीजीपी पंजाब पुलिस के नाम एक शिकायत पत्र जारी किया है. इस आधिकारिक शिकायत में यह भी लिखा गया है, ‘एडब्ल्यूडब्ल्यूएए और इसके सहयोगी संगठन द्वारा पीड़ित को असंवैधानिक रूप से परेशान किया गया और उसे न्याय की मांग करने से भी रोका गया.’ व्हाट्सएप पर प्रसारित एक संदेश के मुताबिक, ‘कमांडर ऑफ द कोर’ ने अब पूरे मुद्दे को हल करने का प्रयास किया है और अधिकारी को इस मामले को आगे ना ले जाने के लिए धमकियां भी मिल रही हैं.

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