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प्रणब दा के ''पदचिह्नों'' पर चलने जा रहा हूं, देश की सफलता का मंत्र उसकी विविधता : रामनाथ कोविंद

Updated at : 25 Jul 2017 2:09 PM (IST)
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प्रणब दा के ''पदचिह्नों''  पर चलने जा रहा हूं, देश की सफलता का मंत्र उसकी विविधता : रामनाथ कोविंद

नयी दिल्ली: देश के नए राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने आज अपना पदभार संभालने के बाद राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि देश की सफलता का मंत्र उसकी विविधता है और यही विविधता हमारा वह आधार है जो हमें अद्वितीय बनाता है.उन्होंने कहा कि मैं डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद, डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन, डॉक्टर ए.पी.जे. अब्दुल […]

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नयी दिल्ली: देश के नए राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने आज अपना पदभार संभालने के बाद राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि देश की सफलता का मंत्र उसकी विविधता है और यही विविधता हमारा वह आधार है जो हमें अद्वितीय बनाता है.उन्होंने कहा कि मैं डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद, डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन, डॉक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम और मेरे पूर्ववर्ती श्री प्रणब मुखर्जी, जिन्हें हम स्नेह से ‘प्रणब दा ‘ कहते हैं, जैसी विभूतियों के पदचिह्नों पर चलने जा रहा हूँ. कोविंद ने कहा, ‘ ‘इस देश में हमें राज्यों और क्षेत्रों, पंथों, भाषाओं, संस्कृतियों, जीवन शैलियों जैसी कई बातों का सम्मिश्रण देखने को मिलता है. हम बहुत अलग हैं, लेकिन फिर भी एक हैं, एकजुट हैं. ‘ ‘ उन्होंने कहा कि देश की सफलता का मंत्र उसकी विविधता है. विविधता ही हमारा वह आधार है जो हमें अद्वितीय बनाता है. नए राष्ट्रपति ने कहा कि 21वीं सदी का भारत, ऐसा भारत होगा जो हमारे पुरातन मूल्यों के अनुरूप होने के साथ ही साथ चौथी औद्योगिक क्रांति को भी विस्तार देगा. इसमें ना कोई विरोधाभास है और ना ही किसी तरह के विकल्प का प्रश्न उठता है. राष्ट्रपति का पहला संबोधन अहम होता है और उसमें भविष्य की झलक मिलती है. प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रपति के रूप में अपने कार्यकाल के पांच वर्ष में विविधता में एकता पर हमेशा जोर दिया.

प्राचीन भारत के ज्ञान व समकालीन भारत के विज्ञान को साथ लेकर चलना होगा

राष्ट्रपतिरामनाथ कोविंद ने कहा कि हमें अपनी परंपरा और प्रौद्योगिकी, प्राचीन भारत के ज्ञान और समकालीन भारत के विज्ञान को साथ लेकर चलना है. कोविंद ने कहा कि एक तरह जहां ग्राम पंचायत पर सामुदायिक भावना से विचार विमर्श करके समस्याओं का निस्तारण होगा, वहीं दूसरी ओर डिजिटल राष्ट्र हमें विकास कीनयी उंचाइयों पर पहुंचने में सहायता करेगा. ये हमारे राष्ट्रीय प्रयासों के दो महत्वपूर्ण स्तंभ हैं.

राष्ट्र निर्माण में सरकार सहायक

उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण अकेले सरकारों द्वारा नहीं किया जा सकता. सरकार सहायक हो सकती है, वो राष्ट्र की उद्यमी और रचनात्मक प्रवृत्तियों को दिशा दिखा सकती है, प्रेरक बन सकती है. उन्होंने कहा, ‘ ‘राष्ट्र निर्माण का आधार है- राष्ट्रीय गौरव : हमें गर्व है भारत की मिट्टी और पानी पर, हमें गर्व है भारत की विविधता और समग्रता पर, हमें गर्व है भारत की संस्कृति, परंपरा और अध्यात्म पर, हमें गर्व है देश के प्रत्येक नागरिक पर, हमें गर्व है अपने कर्तव्यों के निर्वहन पर और हमें गर्व है हर छोटे से छोटे काम पर, जो हम प्रतिदिन करते हैं. ‘ ‘

मैं पूरी विनम्रता से ग्रहण करता हूं पद

देश के नए राष्ट्रपति का दायित्व सौंपे जाने के लिए सभी का आभार व्यक्त करते हुए कोविंद ने कहा कि वह पूरी विनम्रता के साथ यह पद ग्रहण कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘ ‘यहाँ सेंट्रल हॉल में आकर मेरी कई पुरानी स्मृतियां ताजा होगयी हैं. मैं संसद का सदस्य रहा हूं, और इसी सेंट्रल हॉल में मैंने आप में से कई लोगों के साथ विचार-विनिमय किया है. कई बार हम सहमत होते थे, कई बार असहमत. लेकिन इसके बावजूद हम सभी ने एक-दूसरे के विचारों का सम्मान करना सीखा. यही लोकतंत्र की खूबसूरती है. ‘ ‘ अपने अब तक के सफर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘ ‘ मैं एक छोटे से गांव में मिट्टी के घर में पला-बढ़ा हूँ. मेरी यात्रा बहुत लंबी रही है, लेकिन ये यात्रा अकेले सिर्फ मेरी नहीं रही है. हमारे देश और हमारे समाज की भी यही गाथा रही है. हर चुनौती के बावजूद, हमारे देश में, संविधान की प्रस्तावना में उल्लिखितन्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल मंत्र का पालन किया जाता है और मैं इस मूल मंत्र का सदैव पालन करता रहूँगा. ‘ ‘ कोविंद ने कहा, ‘ ‘ मैं इस महान राष्ट्र के 125 करोड़ नागरिकों को नमन करता हूँ और उन्होंने मुझ पर जो विश्वास जताया है, उस पर खरा उतरने का मैं वचन देता हूं. मुझे इस बात का पूरा एहसास है कि मैं डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद, डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन, डॉक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम और मेरे पूर्ववर्ती श्री प्रणब मुखर्जी, जिन्हें हम स्नेह से ‘प्रणब दा ‘ कहते हैं, जैसी विभूतियों के पदचिह्नों पर चलने जा रहा हूँ. ‘ ‘ उन्होंने कहा, ‘ ‘हमारी स्वतंत्रता, महात्मा गांधी के नेतृत्व में हजारों स्वतंत्रता सेनानियों के प्रयासों का परिणाम थी. बाद में, सरदार पटेल ने हमारे देश का एकीकरण किया. हमारे संविधान के प्रमुख शिल्पी, बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर ने हम सभी में मानवीय गरिमा और गणतांत्रिक मूल्यों का संचार किया. ‘ ‘ राष्ट्रपति ने कहा, ‘ ‘ वे इस बात से संतुष्ट नहीं थे कि केवल राजनीतिक स्वतंत्रता ही काफी है. उनके लिए, हमारे करोड़ों लोगों कीआर्थिक और सामाजिक स्वतंत्रता के लक्ष्य को पाना भी बहुत महत्त्वपूर्ण था. ‘ ‘ उन्होंने कहा, ‘ ‘ अब स्वतंत्रता मिले 70 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं. हम 21वीं सदी के दूसरे दशक में हैं, वो सदी, जिसके बारे में हम सभी को भरोसा है कि ये भारत की सदी होगी, भारत की उपलब्धियां ही इस सदी की दिशा और स्वरुप तय करेंगी. हमें एक ऐसे भारत का निर्माण करना है जो आर्थिक नेतृत्व देने के साथ ही नैतिक आदर्श भी प्रस्तुत करे. हमारे लिए ये दोनों मापदंड कभी अलग नहीं हो सकते. ये दोनोंजुड़े हुए हैं और इन्हें हमेशाजुड़े ही रहना होगा. ‘ ‘

देश का हर नागरिक राष्ट्रनिर्माता

देश के हर नागरिक को राष्ट्रनिर्माता बताते हुए कोविंद ने कहा, ‘ ‘ हम में से प्रत्येक व्यक्ति भारतीय परंपराओं और मूल्यों का संरक्षक है और यही विरासत हम आने वालीपीढ़ियों को देकर जाएंगे. ‘ ‘ उन्होंने कहा, ‘ ‘देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले और हमें सुरक्षित रखने वाले सशस्त्र बल, राष्ट्र निर्माता हैं. जो पुलिस और अर्धसैनिक बल, आतंकवाद और अपराधों सेलड़ रहे हैं, वो राष्ट्र निर्माता हैं. जो किसान तपती धूप में देश के लोगों के लिए अन्न उपजा रहा है, वो राष्ट्र निर्माता है. और हमें ये भी नहीं भूलना चाहिए, कि खेत में कितनीबड़ी संख्या में महिलाएं भी काम करती हैं. ‘ ‘ उन्होंने आगे कहा, ‘ ‘ जो वैज्ञानिक 24 घंटे अथक परिश्रम कर रहा है, भारतीय अंतरिक्ष मिशन को मंगल तक ले जा रहा है, या किसी वैक्सीन का अविष्कार कर रहा है, वो राष्ट्र निर्माता है. जो नर्स या डॉक्टर सुदूर किसी गांव में, किसी मरीज की गंभीर बीमारी से लड़ने में उसकी मदद कर रहे हैं, वो राष्ट्र निर्माता हैं. जिस नौजवान ने अपना स्टार्ट-अप शुरू किया है और अब स्वयं रोजगार दाता बन गया है, वो राष्ट्र निर्माता है. ‘ ‘ कोविंद ने कहा कि ये स्टार्ट-अप कुछ भी हो सकता है. किसी छोटे से खेत में आम से अचार बनाने का काम हो, कारीगरों के किसी गांव में कार्पेट बुनने का काम हो या फिर कोई लैबोरेटरी, जिसे बडी स्क्रीनों से रौशन किया गया हो. उन्होंने कहा कि वो आदिवासी और सामान्य नागरिक, जो जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में हमारे पर्यावरण, हमारे वनों, हमारे वन्य जीवन की रक्षा कर रहे हैं और वे लोग जो नवीकरणीय ऊर्जा के महत्त्व को बढावा दे रहे हैं, वे भी राष्ट्र निर्माता हैं.

साथ ही उन्होंने कहा, ‘ ‘ वो प्रतिबद्ध लोकसेवक जो पूरी निष्ठा के साथ अपना कर्त्तव्य निभा रहे हैं, कहीं पानी से भरी सड़क पर ट्रैफिक को नियंत्रित कर रहे हैं, कहीं किसी कमरे में बैठकर फाइलों पर काम कर रहे हैं, वे राष्ट्र निर्माता हैं. वो शिक्षक, जो नि:स्वार्थ भाव से युवाओं को दिशा दे रहे हैं, उनका भविष्य तय कर रहे हैं, वे राष्ट्र निर्माता हैं. ‘ ‘ आधी आबादी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘ ‘ वो अनगिनत महिलाएं जो घर पर और बाहर, तमाम दायित्व निभाने के साथ ही अपने परिवार की देख-रेख कर रही हैं, अपने बच्चों को देश का आदर्श नागरिक बना रही हैं, वे राष्ट्र निर्माता हैं. ‘ ‘

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